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GST सुधारों पर पीएम मोदी का बड़ा बयान

Ratna Netam
8 Oct 2026 10:03 PM IST
GST सुधारों पर पीएम मोदी का बड़ा बयान
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद द्वारा मंजूर किए गए नए सुधारों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इन सुधारों से देश की कर प्रणाली अधिक सरल, पारदर्शी और कारोबारियों के अनुकूल बनेगी। प्रधानमंत्री के अनुसार, जीएसटी व्यवस्था में किए जा रहे बदलावों से फैसले लेने की प्रक्रिया तेज होगी, नियमों के पालन में आने वाला खर्च कम होगा और करदाताओं को रिफंड प्राप्त करने में आसानी होगी। उन्होंने गिरफ्तारी संबंधी प्रावधानों को हटाने, कुछ अपराधों को आपराधिक श्रेणी से बाहर करने और कर प्रशासन को विश्वास आधारित बनाने की दिशा में उठाए गए कदमों को महत्वपूर्ण बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से जीएसटी परिषद की सिफारिशों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन सुधारों का करदाताओं और व्यापारियों पर बेहद सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाने, स्वचालित रिफंड की व्यवस्था विकसित करने और कर प्रशासन में विश्वास बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
गुरुवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में केंद्र और राज्यों के प्रतिनिधियों ने जीएसटी व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। परिषद ने कर प्रशासन, पंजीकरण, रिफंड, इनपुट टैक्स क्रेडिट और प्रवर्तन से संबंधित कई महत्वपूर्ण सुधारों को मंजूरी दी। इन फैसलों का उद्देश्य कारोबारियों पर प्रक्रियागत बोझ कम करना और कर प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना है।
बैठक का एक प्रमुख निर्णय जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी संबंधी शक्तियों में बदलाव से जुड़ा रहा। परिषद ने अभियोजन से पहले कर अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्तियां समाप्त करने की सिफारिश की है। इस कदम को कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है। लंबे समय से व्यापारिक संगठनों की ओर से मांग की जा रही थी कि कर संबंधी मामलों में अत्यधिक सख्त कार्रवाई के बजाय पारदर्शी और न्यायसंगत प्रक्रियाओं को प्राथमिकता दी जाए।
जीएसटी परिषद ने कर संबंधी अपराधों में अभियोजन की मौद्रिक सीमा बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। रिपोर्टों के अनुसार, यह सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का निर्णय लिया गया है। इसका उद्देश्य अपेक्षाकृत छोटे कर विवादों में आपराधिक कार्रवाई का दायरा सीमित करना है। हालांकि, इन सुधारों का अर्थ यह नहीं है कि कर चोरी या धोखाधड़ी से जुड़े सभी मामलों में कानूनी कार्रवाई समाप्त हो जाएगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने इन बदलावों को विश्वास आधारित प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। इस व्यवस्था का उद्देश्य ईमानदारी से कर जमा करने वाले लोगों और व्यवसायों के लिए प्रक्रियाएं आसान बनाना है। सरकार का मानना है कि करदाताओं और प्रशासन के बीच भरोसा बढ़ने से नियमों के स्वैच्छिक पालन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
जीएसटी परिषद ने रिफंड की प्रक्रिया को अधिक तेज और स्वचालित बनाने पर भी जोर दिया है। मौजूदा व्यवस्था में कई कारोबारियों को रिफंड प्राप्त करने के लिए दस्तावेजी प्रक्रियाओं और जांच का सामना करना पड़ता है। इससे विशेष रूप से छोटे कारोबारियों की कार्यशील पूंजी प्रभावित हो सकती है।
नई सिफारिशों के तहत रिफंड प्रक्रिया में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने और अधिकांश पात्र दावों का स्वचालित निपटारा करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत रिफंड दावों को स्वचालित प्रणाली के माध्यम से संसाधित करने की योजना है। इससे कारोबारियों को रिफंड प्राप्त करने में लगने वाला समय कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
जीएसटी पंजीकरण को आसान बनाना भी सुधारों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। छोटे कारोबारियों और नए उद्यमियों के लिए पंजीकरण संबंधी प्रक्रियाओं को अधिक सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही छोटे ऑनलाइन विक्रेताओं के लिए नियमों में बदलाव की सिफारिश की गई है, ताकि उन्हें व्यापार विस्तार में अनावश्यक प्रक्रियागत कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
परिषद ने इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी से संबंधित विवादों के समाधान पर भी ध्यान दिया है। इस संबंध में ईमानदार खरीदारों के हितों की रक्षा करने और कर अनुपालन की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट बनाने के उपायों पर विचार किया गया। इनपुट टैक्स क्रेडिट व्यवस्था कारोबारियों को खरीदारी पर चुकाए गए पात्र जीएसटी का समायोजन करने की सुविधा देती है।
नए सुधारों में माल परिवहन के दौरान होने वाली जांच संबंधी प्रक्रियाओं को भी अधिक व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य अनावश्यक जांच से होने वाली देरी को कम करना और नियमों के पालन को अधिक पारदर्शी बनाना है।
जीएसटी परिषद ने निर्यातकों से संबंधित प्रक्रियाओं में भी राहत देने के उपायों को मंजूरी दी है। विशेष रूप से सेवा निर्यात और रिफंड से जुड़े कुछ नियमों को अधिक स्पष्ट तथा सुविधाजनक बनाने की दिशा में बदलाव किए गए हैं। इनसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में काम करने वाली भारतीय कंपनियों को मदद मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, इस बैठक में जीएसटी की मौजूदा कर दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। परिषद का मुख्य ध्यान कर की दरें घटाने या बढ़ाने के बजाय प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और व्यवसायों के लिए अनुपालन को सुविधाजनक बनाने पर रहा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जीएसटी सुधारों का नया दौर कर प्रशासन में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रक्रियाओं को सरल बनाने और स्वचालित व्यवस्था विकसित करने को कारोबारियों तथा करदाताओं के हित में बताया।
विशेषज्ञों के अनुसार, कर अनुपालन की लागत कम होने से छोटे और मध्यम उद्यमों को लाभ मिल सकता है। छोटे व्यवसायों के लिए समय पर रिटर्न दाखिल करना, रिकॉर्ड बनाए रखना और रिफंड प्राप्त करना महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं हैं। ऐसे में डिजिटल प्रणालियों के विस्तार और नियमों के सरलीकरण से उनकी प्रशासनिक जिम्मेदारियां कम हो सकती हैं।
जीएसटी परिषद की सिफारिशों के बाद अब संबंधित कानूनी संशोधनों और अधिसूचनाओं के माध्यम से विभिन्न सुधारों को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। कुछ महत्वपूर्ण बदलावों को 1 अप्रैल 2027 से लागू किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसलिए परिषद की मंजूरी और नए नियमों के प्रभावी होने की तारीख में अंतर करना आवश्यक है।
प्रधानमंत्री मोदी ने उम्मीद जताई कि इन उपायों से करदाताओं को राहत मिलेगी और देश में कारोबार करने की प्रक्रिया अधिक आसान होगी। गिरफ्तारी संबंधी प्रावधानों में बदलाव, अपराधों की श्रेणी में कमी, स्वचालित रिफंड और सरल पंजीकरण जैसी सिफारिशें जीएसटी प्रशासन में महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत देती हैं।
गुरुवार को घोषित इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य ऐसी कर व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें नियमों का पालन आसान हो और ईमानदार कारोबारियों को अनावश्यक प्रक्रियाओं का सामना न करना पड़े। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन निर्णयों का स्वागत करते हुए कहा कि जीएसटी परिषद की सिफारिशों से व्यापारियों और करदाताओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा तथा विश्वास आधारित कर प्रशासन को बढ़ावा मिलेगा।
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