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Delhi दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को, जिन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था, दयालपुर इलाके में 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में दंगे भड़काने का दोषी ठहराया, जबकि बाकी 12 आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। एडिशनल सेशन जज प्रवीण सिंह ने हुसैन को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147 (दंगे के लिए सज़ा) और धारा 109 (उकसाने/साज़िश में शामिल होने) के तहत दोषी ठहराया, जबकि अन्य आरोपों से उन्हें बरी कर दिया।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में शामिल होने के आरोप में FIR दर्ज होने के कुछ ही घंटों बाद, फरवरी 2020 में AAP ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। 2024 में वे असदुद्दीन ओवैसी की हैदराबाद स्थित पार्टी AIMIM में शामिल हो गए और उसके बाद AIMIM के टिकट पर 2025 का दिल्ली चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। शनिवार को अदालत ने हुसैन को दी जाने वाली सज़ा की अवधि पर बहस के लिए मामले की सुनवाई 16 नवंबर के लिए तय की। विस्तृत आदेश का इंतज़ार है।
इस मामले में 13 आरोपी थे - हुसैन, मोहम्मद शादाब, शाह आलम, रियासत अली, गुलफाम, राशिद, मोहम्मद रिहान, मोहम्मद आबिद, अरशद कय्यूम, इरशाद अहमद, दीपक सिंह सैनी, नवनीत और महक सिंह। इन सभी पर दंगा करने, संपत्ति को नुकसान पहुँचाने, आग से नुकसान पहुँचाने और आपराधिक साज़िश रचने जैसे आरोप लगाए गए थे। अदालत ने हुसैन के 12 सह-आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया, जबकि पूर्व पार्षद को दो मामलों में दोषी ठहराया और बाकी आरोपों से बरी कर दिया।
जुलाई में, दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़े एक मामले में हुसैन और चार अन्य लोगों को दोषी ठहराया था। यह मामला शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत पर दयालपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR से जुड़ा है। इस मामले में नाम सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) ने हुसैन को सस्पेंड कर दिया था। फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई, कई अन्य घायल हो गए और संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचा।
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