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IAF के 30,000 करोड़ रुपये के UAV सौदे में 10 भारतीय रक्षा कंपनियों की बोली

Gulabi Jagat
16 Jun 2026 10:01 PM IST
IAF के 30,000 करोड़ रुपये के UAV सौदे में 10 भारतीय रक्षा कंपनियों की बोली
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New Delhi नई दिल्ली। भारतीय रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम सामने आया है। भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए 87 मीडियम-अल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस (MALE) अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (UAV) खरीदने के लगभग 30,000 करोड़ रुपये के मेगा प्रोजेक्ट में करीब 10 भारतीय सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों ने बोली लगाई है।

रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, बोली जमा करने की अंतिम तिथि आज निर्धारित थी और इस प्रक्रिया में देश की प्रमुख रक्षा कंपनियों ने हिस्सा लिया। इस परियोजना को पिछले वर्ष रक्षा मंत्रालय ने मंजूरी दी थी।

प्रमुख कंपनियों ने दिखाई रुचि

इस महत्वपूर्ण रक्षा परियोजना में भाग लेने वाली कंपनियों में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड, अडानी डिफेंस सिस्टम्स लिमिटेड, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और Raphe mPhibr Ltd जैसी कंपनियां शामिल हैं।

यह परियोजना भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में निजी और सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।

87 आधुनिक UAV की होगी खरीद

इस परियोजना के तहत भारतीय वायुसेना के लिए कुल 87 अत्याधुनिक UAV खरीदे जाएंगे, जिनका उपयोग मुख्य रूप से निगरानी (surveillance), टोही (reconnaissance) और जरूरत पड़ने पर लक्ष्य पर हमला करने की क्षमता के लिए किया जाएगा।

इन ड्रोन में रियल-टाइम इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) क्षमता होगी, जिससे सीमाओं पर निगरानी को और मजबूत किया जा सकेगा।

स्वदेशी हथियार प्रणाली से लैस करने की योजना

सूत्रों के अनुसार, इन UAV में भविष्य में स्वदेशी मिसाइल सिस्टम को भी एकीकृत करने की योजना है, जिससे भारत की आक्रामक और रक्षात्मक क्षमता दोनों को मजबूती मिलेगी।

यह कदम भारत को विदेशी ड्रोन आपूर्ति पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

दो बार बढ़ाई गई समयसीमा

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय कंपनियों को तैयारी का पर्याप्त समय देने के लिए इस बोली प्रक्रिया की समयसीमा दो बार बढ़ाई थी। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक घरेलू कंपनियों की भागीदारी सुनिश्चित करना था।

रणनीतिक जरूरतों के हिसाब से डिजाइन

अधिकारियों ने बताया कि इन UAV की तकनीकी आवश्यकताएं एक विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन के बाद तय की गई हैं। इसका मुख्य उद्देश्य देश की सीमाओं, खासकर पाकिस्तान और चीन के साथ लगी सीमाओं पर निगरानी क्षमता को मजबूत करना है।

विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में कदम

अब तक भारतीय सशस्त्र बलों को ड्रोन और UAV जरूरतों के लिए अमेरिका और इज़रायल जैसे देशों पर काफी हद तक निर्भर रहना पड़ता था। यह परियोजना इस निर्भरता को कम करने और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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