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UK यूनिवर्सिटीज की बिगड़ी हालत, छात्र और शिक्षक परेशान

Rajeshwari Nishad
13 Oct 2026 2:53 PM IST
UK यूनिवर्सिटीज की बिगड़ी हालत, छात्र और शिक्षक परेशान
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लंदन। अपनी विश्वस्तरीय शिक्षा, आधुनिक कैंपस और बेहतरीन शैक्षणिक सुविधाओं के लिए मशहूर ब्रिटेन की यूनिवर्सिटीज इन दिनों गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं। बढ़ती लागत, वित्तीय दबाव और आय के स्रोतों में आ रही चुनौतियों के बीच कई विश्वविद्यालयों को अपने खर्चों में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसका असर अब सीधे तौर पर शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नौकरियों, छात्रों के पाठ्यक्रमों और शैक्षणिक सुविधाओं पर दिखाई देने लगा है।
इसी कड़ी में यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंघम में भी खर्च घटाने के लिए कई बड़े बदलाव किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रस्तावित कदमों में कर्मचारियों की संख्या कम करना, आधुनिक विदेशी भाषाओं और संगीत से जुड़े कुछ पाठ्यक्रमों को बंद करना तथा छात्रों को मिलने वाली पारंपरिक वन-टू-वन पर्सनल ट्यूटरिंग व्यवस्था समाप्त करना शामिल है। इन बदलावों से विश्वविद्यालय के शैक्षणिक ढांचे और छात्रों के अनुभव पर असर पड़ने की आशंका है।
ब्रिटेन में उच्च शिक्षा क्षेत्र लंबे समय से वित्तीय स्थिरता बनाए रखने की चुनौती से जूझ रहा है। अब इस संकट का असर उन संस्थानों पर भी पड़ रहा है, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और शोध के लिए जाना जाता है।
आर्थिक संकट के बीच विश्वविद्यालयों में खर्च घटाने की तैयारी
ब्रिटेन की यूनिवर्सिटीज को अपने संचालन के लिए कई तरह के खर्च उठाने पड़ते हैं। इनमें शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन, भवनों का रखरखाव, प्रयोगशालाओं का संचालन, पुस्तकालयों की सुविधाएं, शोध परियोजनाएं और विद्यार्थियों को दी जाने वाली सहायता शामिल है। महंगाई और परिचालन लागत में वृद्धि के कारण विश्वविद्यालयों के लिए इन सभी खर्चों को संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय छात्रों से मिलने वाली फीस भी कई संस्थानों की आय का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में विदेशी विद्यार्थियों के नामांकन में कमी या अनुमान से कम आय होने पर विश्वविद्यालयों का वित्तीय संतुलन प्रभावित हो सकता है।
इन परिस्थितियों में कई संस्थान अपने बजट की समीक्षा कर रहे हैं। कुछ जगहों पर कर्मचारियों की भर्ती सीमित की जा रही है, तो कहीं विभागों के पुनर्गठन और पाठ्यक्रमों में बदलाव पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, प्रत्येक विश्वविद्यालय की वित्तीय स्थिति और कटौती के कारण अलग-अलग हो सकते हैं।
42 पाठ्यक्रमों पर असर, 600 से ज्यादा पदों में कटौती की योजना
यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंघम की छात्रसंघ वेबसाइट के अनुसार, विश्वविद्यालय की 'फ्यूचर नॉटिंघम' पुनर्गठन योजना के तहत शैक्षणिक वर्ष 2026-27 में 42 पाठ्यक्रमों में नए विद्यार्थियों का प्रवेश रोकने का प्रस्ताव रखा गया था। इन पाठ्यक्रमों को भविष्य में स्थायी रूप से बंद करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा, अगले तीन वर्षों में 609 पूर्णकालिक समकक्ष पदों में कटौती की योजना बताई गई है। लगभग 2,697 कर्मचारियों को संभावित छंटनी के जोखिम के बारे में सूचित किया गया था।【turn497825search0】
आधुनिक विदेशी भाषाओं और संगीत विभागों पर प्रस्तावित फैसलों ने खास तौर पर चिंता बढ़ाई है। संगीत विभाग एक सदी से भी अधिक समय से विश्वविद्यालय का हिस्सा रहा है। अक्टूबर 2026 में आई रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय ने संगीत विभाग को बंद करने और संगीत से जुड़े पांच डिग्री पाठ्यक्रम समाप्त करने की योजना को मंजूरी दी है। आधुनिक विदेशी भाषाओं के पाठ्यक्रमों का भविष्य भी पुनर्गठन का हिस्सा है
इन फैसलों का असर केवल मौजूदा कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में इन विषयों की पढ़ाई करने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों के लिए भी विकल्प कम हो सकते हैं।
वन-टू-वन पर्सनल ट्यूटरिंग व्यवस्था में भी बदलाव
विश्वविद्यालय की प्रस्तावित पुनर्गठन योजना में छात्रों को मिलने वाली पारंपरिक व्यक्तिगत ट्यूटरिंग व्यवस्था को भी बदलना शामिल है। अब व्यक्तिगत स्तर पर एक छात्र को एक ट्यूटर से मिलने वाली सहायता के बजाय टीम आधारित सहायता मॉडल अपनाने की योजना है।
पारंपरिक व्यवस्था में विद्यार्थी अपने अकादमिक ट्यूटर से पढ़ाई, असाइनमेंट, करियर और व्यक्तिगत समस्याओं पर चर्चा कर सकते थे। नई व्यवस्था में सहायता उपलब्ध कराने का तरीका बदलने से छात्रों के अनुभव पर असर पड़ सकता है।
छात्रों के प्रतिनिधियों और शिक्षकों के बीच इस बात को लेकर चिंता है कि कर्मचारियों की संख्या घटने तथा विद्यार्थियों और शिक्षकों के अनुपात में बदलाव होने से व्यक्तिगत मार्गदर्शन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। छात्रसंघ के मुताबिक, योजना में विद्यार्थियों और अकादमिक कर्मचारियों का अनुपात 18:1 से बढ़ाकर 22:1 करने का प्रस्ताव भी शामिल है।
कर्मचारियों और शिक्षकों ने जताई चिंता
विश्वविद्यालय में प्रस्तावित कटौती को लेकर यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज यूनियन (UCU) ने विरोध जताया है। यूनियन का कहना है कि बड़े पैमाने पर नौकरियों में कटौती, पाठ्यक्रम बंद करने और शिक्षकों पर काम का बोझ बढ़ने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
इस विवाद के कारण विश्वविद्यालय में कर्मचारियों की हड़ताल भी जारी है। द गार्जियन की 9 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, नॉटिंघम में कर्मचारियों की औद्योगिक कार्रवाई 5 अक्टूबर से शुरू हुई और दिसंबर तक जारी रहने की योजना है। इससे विद्यार्थियों की कक्षाओं और शैक्षणिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि 'फ्यूचर नॉटिंघम' योजना का उद्देश्य वित्तीय जोखिम कम करना और संस्थान को लंबे समय तक आर्थिक रूप से स्थिर बनाना है। ऐसे में प्रबंधन और कर्मचारी संगठनों के बीच विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि वित्तीय चुनौतियों का समाधान नौकरियों और पाठ्यक्रमों में कटौती के जरिए किया जाए या वैकल्पिक उपाय तलाशे जाएं।
ब्रिटेन की उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा सवाल
नॉटिंघम विश्वविद्यालय में हो रहे बदलाव ब्रिटेन की उच्च शिक्षा व्यवस्था के सामने मौजूद व्यापक चुनौतियों को भी उजागर करते हैं। आर्थिक दबाव के कारण विश्वविद्यालयों को अब यह तय करना पड़ रहा है कि सीमित संसाधनों का इस्तेमाल किन विषयों, विभागों और सुविधाओं पर किया जाए।
आधुनिक विदेशी भाषाएं, संगीत और मानविकी जैसे विषय समाज, संस्कृति, शोध और रोजगार के कई क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन विषयों के पाठ्यक्रम बंद होने से भविष्य में विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकल्पों और संबंधित क्षेत्रों में प्रशिक्षित पेशेवरों की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।
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