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सेहत पर भारी पड़ती हैं ये 5 नौकरियां, जानें खतरे

Rajeshwari Nishad
30 Oct 2026 12:49 PM IST
सेहत पर भारी पड़ती हैं ये 5 नौकरियां, जानें खतरे
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Worst Careers for Health India: आज के दौर में अच्छी नौकरी, शानदार सैलरी और करियर में सफलता हर किसी का सपना होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस नौकरी के लिए आप रोजाना 9 से 10 घंटे मेहनत करते हैं, वही धीरे-धीरे आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है? भारत में लाखों लोग ऐसे पेशों में काम कर रहे हैं, जहां लंबे समय तक बैठना, लगातार तनाव झेलना, रात की शिफ्ट में काम करना और पर्याप्त नींद नहीं लेना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। इन आदतों के कारण मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अध्ययन में भी लंबे कामकाजी घंटों और हृदय रोग के बीच संबंध सामने आया है। आइए जानते हैं ऐसी पांच नौकरियों के बारे में, जिनमें काम करने वाले लोगों को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।
1. आईटी और कॉर्पोरेट सेक्टर की नौकरी
आईटी कंपनियों, बैंकिंग ऑफिस और कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों को अक्सर घंटों कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठना पड़ता है। कई लोग दिन में 8 से 10 घंटे या उससे भी ज्यादा समय तक लगातार काम करते हैं।लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती हैं। इसके कारण वजन बढ़ने, कमर और गर्दन में दर्द तथा मांसपेशियों में अकड़न जैसी समस्याएं हो सकती हैं।इसके अलावा प्रोजेक्ट की डेडलाइन, काम का दबाव और लगातार ऑनलाइन उपलब्ध रहने की अपेक्षा मानसिक तनाव बढ़ा सकती है।
WHO के अनुसार, लंबे समय तक निष्क्रिय रहने की आदत हृदय रोग और टाइप-2 डायबिटीज सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी हुई है। इसलिए ऑफिस कर्मचारियों को काम के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लेकर चलना-फिरना चाहिए।
2. डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ
अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की नौकरी भी स्वास्थ्य के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकती है।अस्पतालों में कई कर्मचारियों को लगातार लंबी शिफ्ट में काम करना पड़ता है। आपातकालीन सेवाओं में तैनात डॉक्टरों और नर्सों को कई बार रातभर जागकर मरीजों की देखभाल करनी पड़ती है।लगातार बदलती शिफ्ट और पर्याप्त नींद की कमी शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित कर सकती है। इससे थकान, चिड़चिड़ापन, तनाव और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी हो सकती है।
अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ऑक्यूपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ (NIOSH) के मुताबिक, शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों में हृदय संबंधी बीमारियों, डायबिटीज और कुछ मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम अधिक हो सकता है।
हालांकि, यह जोखिम सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों में समान नहीं होता। काम के घंटे, नींद और व्यक्तिगत स्वास्थ्य संबंधी आदतें इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
3. ट्रक ड्राइवर और वाहन चालक
लंबी दूरी के ट्रक ड्राइवर, टैक्सी चालक और अन्य पेशेवर ड्राइवर भी ऐसे काम करते हैं, जिनमें स्वास्थ्य संबंधी जोखिम अधिक हो सकते हैं।इन कर्मचारियों को कई घंटे वाहन चलाते हुए बैठना पड़ता है। लंबी यात्राओं के दौरान नियमित भोजन और पर्याप्त आराम करना मुश्किल हो सकता है।लगातार बैठने, अनियमित दिनचर्या और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण वजन बढ़ने तथा मेटाबॉलिक समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
इसके अलावा नींद पूरी न होने पर वाहन चलाना दुर्घटनाओं का कारण भी बन सकता है।अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) ने पेशेवर ड्राइवरों को उन व्यावसायिक समूहों में शामिल किया है, जिनमें हृदय रोग का जोखिम अधिक पाया गया है।
4. पुलिस और सुरक्षा सेवाओं में काम करने वाले कर्मचारी
पुलिसकर्मियों और सुरक्षा सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की नौकरी शारीरिक और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण होती है।इन कर्मचारियों को कई बार लंबे समय तक ड्यूटी करनी पड़ती है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना, आपातकालीन परिस्थितियों का सामना करना और अनियमित शिफ्ट में काम करना उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा हो सकता है।
लगातार तनाव और आराम की कमी शरीर पर नकारात्मक असर डाल सकती है।
कुछ पुलिसकर्मियों को लंबे समय तक खड़े रहना पड़ता है, जबकि अन्य को डेस्क पर बैठकर काम करना पड़ता है। इसलिए जोखिम उनकी जिम्मेदारियों के अनुसार बदल सकता है।CDC के अनुसार, पुलिसकर्मियों और अग्निशमन कर्मचारियों जैसे प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले पेशों में हृदय रोग का जोखिम अधिक पाया गया है।नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, पर्याप्त आराम और तनाव कम करने की गतिविधियां ऐसे कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
5. मीडिया और पत्रकारिता क्षेत्र
मीडिया और पत्रकारिता क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की दिनचर्या भी काफी व्यस्त हो सकती है।पत्रकारों, न्यूज एंकरों, वीडियो एडिटरों और डिजिटल न्यूज डेस्क के कर्मचारियों को कई बार लगातार बदलती शिफ्ट, ब्रेकिंग न्यूज और समयसीमा के दबाव में काम करना पड़ता है।
विशेष रूप से न्यूज डेस्क पर काम करने वाले कर्मचारियों को लंबे समय तक कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठना पड़ सकता है। इससे आंखों में थकान, गर्दन और पीठ में दर्द जैसी परेशानियां हो सकती हैं।रात की शिफ्ट में काम करने वाले लोगों में नींद का समय भी प्रभावित हो सकता है।
हालांकि, पत्रकारिता को भारत की पांच सबसे अस्वस्थ नौकरियों में शामिल करने वाली कोई सार्वभौमिक वैज्ञानिक रैंकिंग उपलब्ध नहीं है। लेकिन इस क्षेत्र में लंबे कामकाजी घंटे, तनाव और अनियमित नींद जैसे जोखिम मौजूद हो सकते हैं।
लंबे समय तक काम करने से कितना बढ़ता है हार्ट अटैक का खतरा?
WHO और ILO के संयुक्त अध्ययन के अनुसार, सप्ताह में 35 से 40 घंटे काम करने वालों की तुलना में 55 घंटे या उससे अधिक काम करने वाले लोगों में स्ट्रोक का जोखिम लगभग 35 प्रतिशत अधिक और इस्केमिक हृदय रोग से मृत्यु का जोखिम लगभग 17 प्रतिशत अधिक पाया गया।अध्ययन के अनुसार, साल 2016 में दुनिया भर में लंबे कामकाजी घंटों से जुड़े स्ट्रोक और इस्केमिक हृदय रोग के कारण अनुमानित 7.45 लाख मौतें हुई थीं।हालांकि, ये आंकड़े वैश्विक अध्ययन से संबंधित हैं और किसी एक नौकरी या केवल भारतीय कर्मचारियों पर आधारित नहीं हैं।
नौकरी के साथ सेहत को ऐसे रखें सुरक्षित
सेहत को सुरक्षित रखने के लिए काम छोड़ना जरूरी नहीं है, बल्कि कामकाजी दिनचर्या में सुधार करना महत्वपूर्ण है।WHO की सलाह के अनुसार, वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 से 300 मिनट मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। इसके साथ सप्ताह में कम से कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाली गतिविधियां भी उपयोगी हैं।ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारियों को समय-समय पर सीट से उठना, थोड़ी देर चलना और लगातार स्क्रीन देखने से ब्रेक लेना चाहिए।साथ ही संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद, धूम्रपान से दूरी और नियमित स्वास्थ्य जांच पर ध्यान देना चाहिए। तनाव ज्यादा होने या नींद की समस्या लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
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