करियर
IIT-IIM की चमक के पीछे की सच्चाई, छात्रों ने बताई आपबीती
Rajeshwari Nishad
20 Oct 2026 5:55 PM IST

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नई दिल्ली: आज के समय में माता-पिता अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए हर संभव कोशिश करते हैं। अच्छी स्कूलिंग, अच्छे नंबर, महंगी कोचिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को अक्सर सफलता की सीढ़ी माना जाता है। कई परिवारों का सपना होता है कि उनके बच्चे आगे चलकर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) या इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिला लें। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कुछ बच्चे छोटी उम्र से ही पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट जाते हैं।
लेकिन क्या जीवन में सफल होने के लिए हर बच्चे को इसी रास्ते पर चलना जरूरी है? क्या अच्छी नौकरी, बेहतर कमाई और संतुष्ट जीवन के लिए किसी बड़े संस्थान की डिग्री ही सबसे अहम है? इन्हीं सवालों को लेकर सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ गई है। इस चर्चा में ऐसे लोग भी अपनी राय रख रहे हैं, जो खुद देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों से पढ़ाई कर चुके हैं। उनका कहना है कि बच्चों को करियर के नाम पर एक तय रास्ते में बांधने के बजाय अपनी रुचि पहचानने, जरूरी हुनर सीखने और अपनी पसंद का भविष्य बनाने का अवसर मिलना चाहिए।
IIT-IIM में दाखिले की दौड़ क्यों?
भारत में IIT और IIM जैसे संस्थानों को बेहतर शिक्षा, प्रतिष्ठा और करियर के अवसरों से जोड़कर देखा जाता है। इन संस्थानों में प्रवेश के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा होती है। ऐसे में माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे इस कठिन प्रतियोगिता में सफल हों और भविष्य में अच्छे अवसर हासिल करें।
इसके पीछे आर्थिक सुरक्षा, अच्छी नौकरी और सामाजिक पहचान की उम्मीद भी हो सकती है। कई परिवार बच्चों की पढ़ाई और कोचिंग पर काफी समय और पैसा खर्च करते हैं। उन्हें लगता है कि प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिला मिलने से बच्चे के करियर की मजबूत शुरुआत हो सकती है।
हालांकि, समस्या तब पैदा होती है जब यह लक्ष्य बच्चे की अपनी पसंद से ज्यादा परिवार की अपेक्षा बन जाता है। हर बच्चे की रुचि, क्षमता और सीखने का तरीका अलग होता है। किसी को गणित और विज्ञान पसंद हो सकता है, तो किसी की दिलचस्पी खेल, कला, लेखन, डिजाइन, संगीत या कारोबार में हो सकती है। सभी बच्चों के लिए सफलता का एक ही पैमाना तय करने से उनकी वास्तविक रुचियों को समझने का अवसर कम हो सकता है।
सोशल मीडिया पर क्या उठ रहे हैं सवाल?
सोशल मीडिया पर चल रही बहस का मुख्य सवाल यही है कि क्या बच्चों को अपनी पसंद का करियर चुनने की आजादी मिलनी चाहिए। इस चर्चा में एक पक्ष का मानना है कि IIT और IIM जैसे संस्थान बेहतरीन अवसर दे सकते हैं, लेकिन दूसरा पक्ष यह सवाल उठाता है कि क्या इन संस्थानों में दाखिला नहीं मिलने का मतलब करियर में असफल होना है।
प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ाई कर चुके कुछ लोगों की राय है कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए केवल डिग्री या परीक्षा में हासिल किए गए अंक पर्याप्त नहीं हैं। व्यावहारिक ज्ञान, संवाद कौशल, समस्या सुलझाने की क्षमता, रचनात्मक सोच और लगातार सीखने की आदत भी महत्वपूर्ण हैं।
इसका अर्थ यह नहीं है कि IIT या IIM की डिग्री का महत्व नहीं है। इन संस्थानों में पढ़ने से विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा, नेटवर्क और करियर के अवसर मिल सकते हैं। लेकिन हर बच्चे के लिए इन्हीं संस्थानों में जाना अनिवार्य लक्ष्य बना देना उचित नहीं है। करियर के कई रास्ते हैं और उनमें सफलता हासिल करने के तरीके भी अलग-अलग हो सकते हैं।
पढ़ाई का दबाव बच्चों को कैसे प्रभावित कर सकता है?
पढ़ाई में मेहनत करना, लक्ष्य तय करना और नियमित अभ्यास करना बच्चों के विकास के लिए उपयोगी है। लेकिन जब हर समय अच्छे नंबर लाने, दूसरों से आगे निकलने और प्रतियोगी परीक्षा में सफल होने का दबाव बना रहता है, तो पढ़ाई तनाव का कारण बन सकती है।
कुछ बच्चों को असफलता का डर सताने लगता है। वे अपनी तुलना दोस्तों या दूसरे विद्यार्थियों से करने लगते हैं और अपेक्षित परिणाम नहीं आने पर खुद को कमतर समझ सकते हैं। हालांकि, हर बच्चे पर दबाव का असर अलग होता है, लेकिन माता-पिता और शिक्षकों के लिए बच्चों की भावनाओं और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है।
बच्चों को यह समझना चाहिए कि किसी परीक्षा में कम अंक आना या मनचाहे कॉलेज में दाखिला नहीं मिलना उनके पूरे भविष्य का फैसला नहीं करता। गलतियों से सीखना, अपनी कमियों को पहचानना और नए विकल्प तलाशना भी जीवन में आगे बढ़ने का हिस्सा है।
डिग्री के साथ हुनर भी है जरूरी
आज करियर के विकल्प पहले से कहीं ज्यादा विविध हैं। इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के अलावा तकनीक, डिजाइन, मीडिया, स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्त, खेल, शोध और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी अवसर मौजूद हैं। हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए अलग तरह की योग्यता और कौशल की जरूरत होती है।
किसी प्रतिष्ठित संस्थान की डिग्री कई अवसरों के दरवाजे खोल सकती है, लेकिन लंबे समय तक अच्छा प्रदर्शन करने के लिए अनुभव, अनुशासन और काम की समझ भी अहम हैं। वहीं, किसी दूसरे संस्थान से पढ़ाई करने वाला विद्यार्थी भी अपने हुनर, मेहनत और सीखने की क्षमता के दम पर सफल करियर बना सकता है।
इसीलिए बच्चों को केवल परीक्षा की तैयारी तक सीमित रखने के बजाय खेल, रचनात्मक गतिविधियों, टीमवर्क और व्यावहारिक अनुभवों के अवसर भी देने चाहिए। इससे वे अपनी क्षमताओं को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
माता-पिता बच्चों को कैसे दें सही दिशा?
बच्चों के करियर को लेकर माता-पिता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। वे अपने अनुभव और जानकारी के आधार पर बच्चों को रास्ता दिखा सकते हैं, लेकिन अंतिम लक्ष्य तय करते समय बच्चे की रुचि और क्षमता को भी महत्व देना चाहिए।
बच्चों की रुचि पहचानें: उनसे पूछें कि उन्हें कौन-से विषय और गतिविधियां पसंद हैं।
तुलना करने से बचें: दूसरे बच्चों के अंकों या उपलब्धियों के आधार पर दबाव बनाने के बजाय उनकी अपनी प्रगति पर ध्यान दें।
करियर के विकल्प बताएं: अलग-अलग क्षेत्रों, पाठ्यक्रमों और प्रशिक्षण के अवसरों के बारे में जानकारी दें।
असफलता को सीखने का अवसर मानें: खराब परिणाम आने पर डांटने के बजाय आगे की योजना बनाने में मदद करें।
पढ़ाई और जीवन में संतुलन रखें: नींद, खेल, दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताना भी बच्चों के विकास के लिए जरूरी है।
सफलता का रास्ता हर बच्चे के लिए अलग
IIT और IIM जैसे संस्थान विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा और करियर के अवसर प्रदान कर सकते हैं। लेकिन हर बच्चे की प्रतिभा, रुचि और जीवन का लक्ष्य अलग होता है। इसलिए किसी एक डिग्री को सफलता का एकमात्र पैमाना मानना सही नहीं होगा।
सोशल मीडिया पर चल रही यह बहस एक महत्वपूर्ण मुद्दे की ओर ध्यान दिलाती है: बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करते समय क्या उनकी पसंद, हुनर और मानसिक स्वास्थ्य को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है? शिक्षा का उद्देश्य केवल किसी प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिला दिलाना नहीं, बल्कि बच्चों को आत्मनिर्भर, समझदार और जिम्मेदार व्यक्ति बनने में मदद करना भी है।
आखिरकार, सफलता का अर्थ हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। किसी के लिए यह बड़ी कंपनी में नौकरी पाना है, तो किसी के लिए अपना कारोबार शुरू करना या पसंदीदा क्षेत्र में काम करके संतुष्टि हासिल करना। बच्चों को अपनी क्षमता पहचानने, सही मार्गदर्शन पाने और अपनी पसंद का रास्ता चुनने का अवसर देना उनके बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
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