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NEET काउंसलिंग पर सवाल, छात्र ने छोड़ी MBBS सीट

Ashish verma
6 Oct 2026 12:58 PM IST
NEET काउंसलिंग पर सवाल, छात्र ने छोड़ी MBBS सीट
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NEET UG 2026 : नीट यूजी 2026 पास करने वाले एक छात्र ने मेघालय स्टेट कोटा के तहत मिली अपनी MBBS सीट छोड़ दी है। छात्र ने काउंसलिंग और सीट अलॉटमेंट प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और अन्याय का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि बेहतर मेरिट और कॉलेज की प्राथमिकता देने के बावजूद उसे उसकी पसंद के मुताबिक सीट नहीं मिली। मामला सामने आने के बाद मेघालय में MBBS एडमिशन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, छात्र ने NEET UG 2026 परीक्षा पास करने के बाद मेघालय के डायरेक्टरेट ऑफ हेल्थ सर्विसेज यानी DHS की ओर से आयोजित काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। इस प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों से आवश्यक दस्तावेज जमा कराए गए और उनसे मेरिट के आधार पर मेडिकल कॉलेजों की प्राथमिकता बताने को कहा गया।
छात्र का आरोप है कि पहली अलॉटमेंट लिस्ट जारी होने के बाद उसे उसकी चौथी पसंद का कॉलेज मिला। छात्र के मुताबिक उसे उम्मीद थी कि उसकी मेरिट को देखते हुए ऊंची प्राथमिकता वाला कॉलेज मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उसने दावा किया कि उससे कम NEET स्कोर वाले कुछ छात्रों को NEIGRIHMS में सीट मिल गई, जबकि उसे RIMS, Ranchi अलॉट किया गया।
छात्र ने इसके बाद इस मामले को लेकर आपत्ति जताई। रिपोर्ट के मुताबिक उसने VPP की स्टेट यूथ विंग से संपर्क किया, जिसके बाद उसे दूसरे चरण की काउंसलिंग में शामिल होने का मौका मिला। छात्र का दावा है कि दूसरी काउंसलिंग में उसने NEIGRIHMS को अपनी पहली पसंद के रूप में चुना, लेकिन उसे बताया गया कि वहां सीट उपलब्ध नहीं है।
इसके बाद उसने GMCH, Guwahati और RIMS, Imphal को विकल्प के तौर पर चुना। छात्र का कहना है कि इन कॉलेजों में भी सीट उपलब्ध नहीं होने की जानकारी उसे दी गई। आखिर में उसने Jorhat में उपलब्ध सीट स्वीकार कर ली।
हालांकि बाद में जारी सूची देखने के बाद छात्र ने फिर सवाल उठाए। उसका आरोप है कि उससे कम अंक पाने वाले दो छात्रों को RIMS, Imphal में सीट अलॉट की गई, जबकि काउंसलिंग के समय उसे बताया गया था कि वहां कोई सीट खाली नहीं है। छात्र ने इसी आधार पर पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।
छात्र ने आरोप लगाया कि अगर सीट उपलब्ध थी तो उसे सही जानकारी क्यों नहीं दी गई। उसके मुताबिक वह ऐसी सीट स्वीकार
नहीं करना चाहता था जो उसकी मेरिट और दी गई प्राथमिकताओं के अनुरूप न हो। इसी नाराजगी के चलते उसने आखिरकार अपने नाम अलॉट की गई MBBS सीट सरेंडर करने का फैसला किया।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब मेघालय की MBBS और BDS काउंसलिंग प्रक्रिया पहले से ही सवालों के घेरे में रही है। सितंबर में Jaintia Students' Union ने भी सीट अलॉटमेंट में कथित मेरिट उल्लंघन का आरोप लगाया था। संगठन ने दावा किया था कि कुछ कम NEET स्कोर वाले उम्मीदवारों को प्रमुख संस्थानों में सीटें मिलीं, जबकि बेहतर अंक वाले उम्मीदवारों को नजरअंदाज किया गया। इन शिकायतों के बाद DHS ने पहले जारी की गई अलॉटमेंट लिस्ट वापस लेकर नई सूची जारी करने की बात कही थी।
मेघालय सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए MBBS और BDS की चयन सूची 11 सितंबर को जारी की गई थी। इसके बाद राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने काउंसलिंग प्रक्रिया के लिए एक संयुक्त Standard Operating Procedure यानी SOP भी जारी किया। इस SOP में चार राउंड तक काउंसलिंग की व्यवस्था, सीट सरेंडर, खाली सीटों और शिकायत निवारण से जुड़े नियम शामिल किए गए हैं।
सरकार की ओर से जारी SOP में काउंसलिंग के दौरान ग्रिवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म यानी शिकायत निवारण व्यवस्था का भी प्रावधान किया गया है। राज्य काउंसलिंग अथॉरिटी को हेल्प डेस्क, कंट्रोल रूम और आधिकारिक सूचनाओं के जरिए उम्मीदवारों की शिकायतों का समाधान करने की जिम्मेदारी दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर 2026-27 सत्र के लिए MBBS और BDS सीटों को लेकर री-काउंसलिंग, नई अलॉटमेंट सूची और शिकायत निवारण से संबंधित कई नोटिफिकेशन भी जारी किए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि इस साल सीट आवंटन प्रक्रिया में कई चरणों पर पुनर्विचार और संशोधन किया गया है।
फिलहाल सीट छोड़ने वाले छात्र द्वारा लगाए गए आरोप उसके पक्ष से सामने आए दावे हैं। इन आरोपों पर संबंधित विभाग का विस्तृत जवाब सामने आना बाकी है। यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि अलग-अलग उम्मीदवारों को सीट मिलने में कैटेगरी, कोटा, कॉलेज प्रेफरेंस और उपलब्ध सीटों जैसे कई नियम प्रभाव डाल सकते हैं।
इसके बावजूद छात्र द्वारा सीट छोड़ना एक गंभीर मामला माना जा रहा है, क्योंकि MBBS सीट हासिल करने के लिए छात्र वर्षों तक तैयारी करते हैं। ऐसे में मेरिट और कॉलेज प्रेफरेंस को लेकर विवाद खड़ा होना काउंसलिंग सिस्टम पर भरोसे को प्रभावित कर सकता है।
अब नजर इस बात पर है कि स्वास्थ्य विभाग छात्र के आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और सीट अलॉटमेंट रिकॉर्ड की दोबारा जांच की जाती है या नहीं। निष्पक्ष और पारदर्शी काउंसलिंग सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि योग्य उम्मीदवारों को उनकी मेरिट और तय नियमों के अनुसार सीट मिल सके।
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