
Career:भारत में सेमीकंडक्टर सेक्टर तेजी से एक बड़े तकनीकी बदलाव की ओर बढ़ रहा है। मोबाइल फोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक व्हीकल, 5G नेटवर्क, मेडिकल डिवाइस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों की रीढ़ माने जाने वाले सेमीकंडक्टर की मांग दुनिया भर में लगातार बढ़ रही है। इसी को देखते हुए भारत में भी इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर निवेश और विकास देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि वर्ष 2014 में देश में एक भी सेमीकंडक्टर यूनिट नहीं थी, लेकिन आज भारत में 10 से अधिक सेमीकंडक्टर यूनिट्स पर काम चल रहा है या वे स्थापित हो रही हैं। सरकार का उद्देश्य भारत को ग्लोबल चिप मैन्युफैक्चरिंग और डिजाइन हब बनाना है। इसी दिशा में ‘सेमीकंडक्टर मिशन’ को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे देश की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता को मजबूत किया जा सके।
सेमीकंडक्टर इंजीनियरिंग में माइक्रोचिप डिजाइन, VLSI (Very Large Scale Integration), एम्बेडेड सिस्टम, नैनो टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक मटेरियल्स, IC डिजाइन और चिप फैब्रिकेशन जैसी तकनीकों की पढ़ाई शामिल होती है। यह क्षेत्र पूरी तरह से आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर हार्डवेयर पर आधारित है, जहां प्रोफेशनल इंजीनियरों की मांग लगातार बढ़ रही है।इस फील्ड में प्रमुख विषयों में VLSI डिजाइन, चिप डिजाइन और वेरिफिकेशन, सेमीकंडक्टर डिवाइस, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स, एम्बेडेड सिस्टम, नैनो इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक मटेरियल्स और AI हार्डवेयर सिस्टम शामिल हैं। इन सभी तकनीकों के माध्यम से छोटे-छोटे चिप्स तैयार किए जाते हैं, जो आज की डिजिटल दुनिया को चलाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
भारत के प्रमुख संस्थान जैसे IIT मद्रास, IIT बॉम्बे, IIT दिल्ली, IIT हैदराबाद, IIT कानपुर, IIT खड़गपुर, IIT रुड़की और IIT गुवाहाटी में माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और VLSI से जुड़े कई पोस्ट ग्रेजुएट और रिसर्च प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा NIT वारंगल, NIT त्रिची, NIT सुरथकल, NIT राउरकेला, NIT कालीकट, NIT कुरुक्षेत्र, NIT जालंधर और NIT सिलचर जैसे संस्थानों में भी सेमीकंडक्टर और VLSI से जुड़े कोर्स उपलब्ध हैं।इन कोर्स में एडमिशन के लिए BTech स्तर पर JEE Main और JEE Advanced के जरिए प्रवेश मिलता है, जबकि MTech कोर्स के लिए GATE परीक्षा अनिवार्य होती है। कुछ संस्थान विशेष रूप से चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी में स्पेशलाइज्ड प्रोग्राम भी ऑफर करते हैं।
सेमीकंडक्टर सेक्टर में डिमांड बढ़ने का सबसे बड़ा कारण भारत सरकार की नीतियां और ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनियों का निवेश है। देश में नई चिप फैक्ट्रियों की स्थापना, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा और डिजिटल इंडिया मिशन के कारण इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सेमीकंडक्टर इंजीनियरिंग भारत के सबसे मजबूत और हाई-पेइंग टेक्नोलॉजी करियर विकल्पों में से एक बन सकता है। जो छात्र इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर हार्डवेयर और नई तकनीकों में रुचि रखते हैं, उनके लिए यह क्षेत्र बड़े अवसर लेकर आ रहा है और भविष्य में वैश्विक स्तर पर भी मजबूत पहचान दिला सकता है।





