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CM रेखा गुप्ता का बड़ा निर्देश, दिल्ली फायर सर्विस में बदलेगा भर्ती का पूरा ढांचा

Rajeshwari Nishad
1 Nov 2026 1:01 PM IST
CM रेखा गुप्ता का बड़ा निर्देश, दिल्ली फायर सर्विस में बदलेगा भर्ती का पूरा ढांचा
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नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में तेजी से बढ़ती आबादी, घनी बस्तियों, बहुमंजिला इमारतों और औद्योगिक क्षेत्रों में आग लगने की घटनाओं से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली फायर सर्विस (DFS) में 2,345 अतिरिक्त पदों के सृजन को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद विभाग में स्वीकृत पदों की कुल संख्या 3,096 से बढ़कर 5,441 हो जाएगी। यानी अग्निशमन विभाग की स्वीकृत कर्मचारी क्षमता में करीब 76 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी।
खास बात यह है कि वर्ष 1942 में विभाग की स्थापना के बाद 84 साल के इतिहास में पहली बार इतने बड़े स्तर पर कैडर का पुनर्गठन किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य राजधानी में आगजनी, दुर्घटनाओं और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना है। नए पदों के सृजन से विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर मौके पर आग बुझाने और लोगों को बचाने वाले कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने का रास्ता खुलेगा।
3,096 से बढ़कर 5,441 होंगे स्वीकृत पद
दिल्ली सरकार की मंजूरी के अनुसार फायर सर्विस में कुल 2,345 नए पद जोड़े जाएंगे। वर्तमान में विभाग की स्वीकृत कर्मचारी क्षमता 3,096 पदों की है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह संख्या 5,441 तक पहुंच जाएगी। इस प्रकार विभाग की स्वीकृत क्षमता में लगभग 76 प्रतिशत की वृद्धि होगी।
यह फैसला दिल्ली की बदलती शहरी जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है। राजधानी में लगातार नई इमारतों, आवासीय परिसरों, बाजारों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों का विस्तार हो रहा है। ऐसे में आग लगने की घटनाओं पर तत्काल नियंत्रण पाने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों और अधिकारियों की पर्याप्त संख्या जरूरी है।
वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर फायर ऑपरेटर तक बढ़ेंगे पद
इस कैडर पुनर्गठन के तहत केवल फायरमैन या अग्निशामकों की संख्या ही नहीं बढ़ाई जाएगी, बल्कि विभाग के अलग-अलग स्तरों पर पदों का विस्तार किया जाएगा। इनमें उप मुख्य अग्निशमन अधिकारी (Deputy Chief Fire Officer), मंडल अधिकारी (Divisional Officer), सहायक मंडल अधिकारी (Assistant Divisional Officer), स्टेशन अधिकारी (Station Officer), उप अधिकारी (Sub-Officer), अग्रणी अग्निशामक (Leading Fireman) और अग्नि ऑपरेटर (Fire Operator) के पद शामिल हैं।
इसके अलावा विभाग में चपरासी और माली जैसे सहायक कर्मचारियों के पद भी बढ़ाए जाएंगे। इससे विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था और संचालन को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर परिणाम के लिए केवल मौके पर कर्मचारियों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं होती, बल्कि मजबूत नेतृत्व और निगरानी व्यवस्था भी आवश्यक होती है। नए पदों से विभाग के विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियों का बेहतर बंटवारा किया जा सकेगा।
बढ़ती आबादी और ऊंची इमारतों ने बढ़ाई चुनौती
दिल्ली में पिछले कुछ वर्षों में शहरीकरण तेजी से बढ़ा है। कई इलाकों में घनी आबादी वाली बस्तियां हैं, जहां मकान एक-दूसरे के बेहद करीब बने हुए हैं। कई पुरानी कॉलोनियों में सड़कें इतनी संकरी हैं कि बड़े दमकल वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में परेशानी होती है। ऐसी परिस्थितियों में आग लगने पर शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
इसके अलावा राजधानी में बहुमंजिला इमारतों और ऊंचे व्यावसायिक परिसरों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। ऊंची इमारतों में आग लगने की स्थिति में बचाव कार्य अधिक जटिल हो जाता है। इसके लिए विशेष प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और पर्याप्त कर्मचारियों की आवश्यकता होती है।
औद्योगिक क्षेत्रों में भी आग लगने की घटनाएं गंभीर चुनौती पैदा करती हैं। कई बार ज्वलनशील पदार्थों और मशीनों के कारण आग तेजी से फैल सकती है। ऐसे मामलों में दमकल कर्मियों को अधिक सावधानी और समन्वय के साथ अभियान चलाना पड़ता है।
केवल आग बुझाने तक सीमित नहीं है विभाग की जिम्मेदारी
दिल्ली फायर सर्विस की जिम्मेदारी केवल आग बुझाने तक सीमित नहीं है। विभाग सड़क दुर्घटनाओं, इमारतों के ढहने, फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
किसी इमारत में आग लगने पर लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना, ऊंची इमारतों में फंसे लोगों तक पहुंचना और दुर्घटनास्थल पर राहत कार्य करना भी अग्निशमन कर्मियों की जिम्मेदारियों में शामिल है। ऐसे में अतिरिक्त पदों के सृजन से विभाग की कार्यक्षमता और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस फैसले को नागरिकों की सुरक्षा और उनकी संपत्ति की रक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका कहना है कि दिल्ली की बढ़ती जरूरतों के अनुसार अग्निशमन सेवाओं को मजबूत करना जरूरी है। वहीं, दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने भी इस पुनर्गठन को विभाग की संस्थागत क्षमता मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
भर्ती को लेकर युवाओं की नजरें
फायर सर्विस में 2,345 नए पदों को मंजूरी मिलने के बाद सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भी संभावनाएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, नए पदों के सृजन का मतलब यह नहीं है कि सभी पदों पर भर्ती प्रक्रिया तत्काल शुरू हो जाएगी।
फिलहाल सरकार की ओर से इन पदों पर भर्ती का विस्तृत कार्यक्रम, आवेदन की तारीख, शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और चयन प्रक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए उम्मीदवारों को भर्ती संबंधी आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना होगा। पदों के सृजन और वास्तविक नियुक्तियों की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में पूरी हो सकती है।
1942 में हुई थी दिल्ली फायर सर्विस की स्थापना
दिल्ली फायर सर्विस की स्थापना वर्ष 1942 में हुई थी। शुरुआत में विभाग के पास केवल चार फायर स्टेशन, 14 दमकल वाहन और 186 कर्मचारी थे। समय के साथ राजधानी का विस्तार हुआ और अग्निशमन विभाग का नेटवर्क भी बढ़ता गया। वर्तमान में विभाग के पास 71 फायर स्टेशन हैं, जिनमें मुख्यालय और प्रशिक्षण केंद्र भी शामिल हैं।
अब 84 साल बाद हुए इस बड़े कैडर पुनर्गठन से दिल्ली की अग्निशमन व्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसकी वास्तविक सफलता नए पदों पर समयबद्ध नियुक्तियों, कर्मचारियों के प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और दमकल केंद्रों के बेहतर संचालन पर निर्भर करेगी।
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