करियर
IIT बनाएगा देश का पहला फिजिकल AI स्कूल, छात्रों को मिलेगी नई शिक्षा
Rajeshwari Nishad
27 Oct 2026 8:02 PM IST

x
खड़गपुर। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की पढ़ाई और रिसर्च को नई ऊंचाई देने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर ने बड़ी पहल की है। संस्थान देश का पहला विशेष फिजिकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्कूल स्थापित करने जा रहा है। इसका नाम बेंजामिन गुप्ता स्कूल ऑफ फिजिकल एआई (Benjamin Gupta School of Physical AI) होगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 35 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यहां इंटेलिजेंट रोबोटिक्स, ऑटोनॉमस सिस्टम, कंप्यूटेशनल इंजीनियरिंग, साइंटिफिक एआई और डिजिटल ट्विन जैसी आधुनिक तकनीकों पर शोध किया जाएगा। इसके अलावा छात्रों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और कामकाजी पेशेवरों के लिए विशेष पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है। संस्थान का उद्देश्य ऐसी एआई तकनीक विकसित करना है, जो केवल कंप्यूटर स्क्रीन तक सीमित न रहकर वास्तविक दुनिया की समस्याओं का समाधान कर सके।
35 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित होगा स्कूल
आईआईटी खड़गपुर ने 26 अक्टूबर 2026 को इस परियोजना की घोषणा की।
इसके लिए संस्थान ने अपने पूर्व छात्र और उद्योगपति विनोद गुप्ता तथा अमेरिका स्थित आईआईटीकेजीपी फाउंडेशन के साथ त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 35 करोड़ रुपये रखी गई है।
विनोद गुप्ता का परिवार 12.5 करोड़ रुपये का योगदान देगा, जबकि संस्थान के एक अन्य पूर्व छात्र ने 10 करोड़ रुपये देने की प्रतिबद्धता जताई है।
शेष 12.5 करोड़ रुपये आईआईटी खड़गपुर उपलब्ध कराएगा।
इस धनराशि का इस्तेमाल आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं, प्रयोगशालाओं और शोध संबंधी बुनियादी ढांचे को विकसित करने में किया जाएगा।
बेटे बेंजामिन की याद में रखा जाएगा स्कूल का नाम
इस स्कूल का नाम उद्योगपति विनोद गुप्ता के दिवंगत बेटे बेंजामिन गुप्ता की स्मृति में रखा जाएगा।
विनोद गुप्ता आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र हैं और शिक्षा तथा अनुसंधान से जुड़ी विभिन्न पहलों में योगदान देते रहे हैं।
संस्थान के अनुसार, इस परियोजना के माध्यम से व्यक्तिगत स्मृति को तकनीकी नवाचार और शैक्षणिक प्रगति से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
बेंजामिन गुप्ता स्कूल ऑफ फिजिकल एआई में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विभाग के लिए विशेष बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा।
इसके साथ ही विभिन्न इंजीनियरिंग और विज्ञान विभागों के बीच संयुक्त अनुसंधान को भी बढ़ावा मिलेगा।
आखिर क्या है Physical AI?
फिजिकल एआई कृत्रिम बुद्धिमत्ता की ऐसी उभरती हुई तकनीक है, जिसमें कंप्यूटर आधारित बुद्धिमत्ता को वास्तविक दुनिया की भौतिक प्रणालियों से जोड़ा जाता है।सामान्य एआई तकनीक मुख्य रूप से डेटा का विश्लेषण करने, सवालों के जवाब देने, तस्वीरों को पहचानने और भविष्यवाणी करने जैसे कार्यों के लिए इस्तेमाल की जाती है।वहीं, फिजिकल एआई का उद्देश्य ऐसी मशीनें और सिस्टम तैयार करना है, जो अपने आसपास के वातावरण को समझकर उचित कार्रवाई कर सकें।उदाहरण के लिए, कोई स्मार्ट रोबोट अपने सामने मौजूद वस्तुओं की पहचान करने के साथ उनकी दूरी, वजन और गति का अनुमान लगाकर सुरक्षित तरीके से काम कर सकता है।इस तकनीक में भौतिकी, गणित, इंजीनियरिंग और मशीन लर्निंग के सिद्धांतों का इस्तेमाल किया जाता है।
रोबोटिक्स और ऑटोनॉमस सिस्टम पर होगा विशेष शोध
नए स्कूल में इंटेलिजेंट रोबोटिक्स और ऑटोनॉमस सिस्टम को प्रमुख शोध क्षेत्रों में शामिल किया जाएगा।इंटेलिजेंट रोबोटिक्स के अंतर्गत ऐसे रोबोट विकसित किए जाते हैं, जो सेंसर और एआई की सहायता से आसपास की परिस्थितियों को समझ सकें।वहीं, ऑटोनॉमस सिस्टम ऐसी तकनीक है, जिसमें मशीनें निर्धारित परिस्थितियों में सीमित मानवीय हस्तक्षेप के साथ निर्णय लेकर काम कर सकती हैं।इन तकनीकों का उपयोग कारखानों, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं और कृषि उपकरणों में किया जा सकता है।इसके अलावा स्कूल में एडवांस्ड सेंसिंग और एआई आधारित प्रयोगों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
डिजिटल ट्विन तकनीक की भी होगी पढ़ाई
आईआईटी खड़गपुर के प्रस्तावित स्कूल में डिजिटल ट्विन तकनीक पर भी शोध होगा।डिजिटल ट्विन किसी वास्तविक मशीन, उपकरण या प्रणाली का कंप्यूटर आधारित आभासी मॉडल होता है।इस मॉडल की सहायता से इंजीनियर वास्तविक उपकरण में बदलाव करने से पहले विभिन्न परिस्थितियों का परीक्षण कर सकते हैं।उदाहरण के लिए, किसी औद्योगिक मशीन का डिजिटल मॉडल बनाकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि अलग-अलग तापमान या दबाव में उसका प्रदर्शन कैसा होगा।इस तकनीक से उपकरणों की कार्यक्षमता समझने और संभावित खराबियों का समय रहते अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है।
साइंटिफिक AI और कंप्यूटेशनल इंजीनियरिंग पर जोर
नए स्कूल में साइंटिफिक एआई को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया जाएगा।इस तकनीक में वैज्ञानिक सिद्धांतों और मशीन लर्निंग को जोड़कर जटिल समस्याओं का समाधान खोजने की कोशिश की जाती है।कंप्यूटेशनल इंजीनियरिंग की मदद से बड़े वैज्ञानिक और तकनीकी मॉडल तैयार किए जाते हैं।इसका उपयोग ऊर्जा उत्पादन, मौसम अध्ययन, नई सामग्री के विकास और औद्योगिक प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने में किया जा सकता है।आईआईटी खड़गपुर की योजना ऐसे एआई मॉडल विकसित करने की है, जो केवल उपलब्ध डेटा के आधार पर निष्कर्ष न निकालें, बल्कि भौतिक विज्ञान के स्थापित नियमों का भी पालन करें।
स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र में भी मिलेगी मदद
फिजिकल एआई की उपयोगिता केवल रोबोटिक्स तक सीमित नहीं है।इसका इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल उपकरणों और कृषि क्षेत्र में भी किया जा सकता है।उदाहरण के लिए, एआई आधारित चिकित्सा उपकरणों की मदद से मरीज की शारीरिक स्थिति की निगरानी करने वाली प्रणालियों को बेहतर बनाया जा सकता है।कृषि क्षेत्र में स्मार्ट मशीनों और सेंसर की मदद से फसलों की स्थिति, मिट्टी की नमी और सिंचाई की जरूरतों का आकलन किया जा सकता है।इसी तरह ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी समस्याओं पर भी शोध करने की योजना है।संस्थान इन क्षेत्रों में सुरक्षित और भरोसेमंद एआई तकनीक विकसित करने पर जोर देगा।
छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए शुरू होंगे नए कोर्स
बेंजामिन गुप्ता स्कूल ऑफ फिजिकल एआई में छात्रों के साथ कामकाजी पेशेवरों को भी पढ़ाई के अवसर देने की योजना है।प्रस्तावित पाठ्यक्रमों में हाइब्रिड मास्टर्स प्रोग्राम, एग्जीक्यूटिव एजुकेशन, प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन और विशेष इंटरडिसिप्लिनरी कोर्स शामिल हो सकते हैं।इन पाठ्यक्रमों में इंजीनियरिंग, भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान और चिकित्सा पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों को आधुनिक एआई तकनीक से जोड़ा जाएगा।पढ़ाई के दौरान प्रयोगशाला प्रशिक्षण, औद्योगिक समस्याओं पर आधारित परियोजनाएं और व्यावहारिक अनुभव को महत्व दिया जाएगा।हालांकि, पाठ्यक्रम शुरू करने से पहले आवश्यक शैक्षणिक मंजूरियां ली जाएंगी।कोर्स की अंतिम फीस, प्रवेश योग्यता और आवेदन की तारीखों की घोषणा अभी नहीं हुई है।
अगले शैक्षणिक सत्र से पढ़ाई शुरू करने की योजना
संस्थान की योजना आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद आगामी शैक्षणिक सत्र से पाठ्यक्रम शुरू करने की है।रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2027 के शैक्षणिक सत्र में नए कार्यक्रम शुरू होने की संभावना हैहालांकि, प्रवेश प्रक्रिया और पाठ्यक्रमों की शुरुआत की अंतिम तारीख संस्थान की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।आईआईटी खड़गपुर के इस कदम से उन विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जो रोबोटिक्स, मशीन लर्निंग और वैज्ञानिक अनुसंधान में करियर बनाना चाहते हैं।
आईआईटी खड़गपुर के निदेशक ने बताया ऐतिहासिक कदम
आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने सूचनाओं को संसाधित करने का तरीका बदल दिया है।अब एआई का अगला बड़ा विकास वास्तविक दुनिया को समझने और उसके साथ काम करने वाली तकनीकों में होगा।
उन्होंने जोर दिया कि भविष्य के इंजीनियरों को केवल एआई एल्गोरिदम चलाना ही नहीं, बल्कि मशीनों के पीछे काम करने वाले भौतिक सिद्धांतों को भी समझना होगा।इसी प्रकार वैज्ञानिकों और चिकित्सा विशेषज्ञों को अपने विषय के ज्ञान को एआई तकनीक के साथ जोड़ना होगा।उनके अनुसार, इससे ऐसी तकनीक विकसित की जा सकेगी, जो विश्वसनीय और व्यावहारिक होने के साथ समाज के लिए उपयोगी भी हो।
भारत को AI तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम
आईआईटी खड़गपुर की यह पहल भारत में अत्याधुनिक एआई अनुसंधान को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।प्रस्तावित स्कूल विश्वविद्यालयों, उद्योगों, स्टार्टअप, शोध संस्थानों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाने का काम करेगा।इससे आधुनिक तकनीक विकसित करने के साथ कुशल पेशेवरों को तैयार करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
Next Story





