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शिक्षा विभाग में बड़ी हलचल, 35 हजार शिक्षकों की नौकरी पर लटकी तलवार
Rajeshwari Nishad
30 Oct 2026 2:54 PM IST

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पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में पिछले कई वर्षों से पढ़ा रहे हजारों शिक्षकों के सामने नौकरी बचाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य के प्राथमिक शिक्षा विभाग ने 31 मार्च 2015 के बाद नियुक्त हुए अप्रशिक्षित शिक्षकों की सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों और जिला शिक्षा पदाधिकारियों को ऐसे शिक्षकों की पहचान कर उनकी सूची तैयार करने तथा नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। शिक्षक संगठनों का दावा है कि इस फैसले से बिहार के करीब 35 हजार शिक्षकों की नौकरी प्रभावित हो सकती है। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक भी हैं, जो पिछले 10 से 11 वर्षों से सरकारी विद्यालयों में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। इस आदेश के बाद शिक्षक संगठनों में नाराजगी और प्रभावित परिवारों में चिंता बढ़ गई है। हालांकि, राज्य सरकार ने शिक्षकों को राहत दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात भी कही है।
31 मार्च 2015 के बाद नियुक्त शिक्षकों पर संकट
शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, जिन प्रारंभिक शिक्षकों की नियुक्ति 31 मार्च 2015 के बाद आवश्यक प्रशिक्षण योग्यता के बिना हुई थी, उनकी नियुक्ति को अवैध मानते हुए सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जाएगी।
प्राथमिक शिक्षा निदेशक कुमार निशांत विवेक ने एक अक्टूबर 2026 को पत्र जारी कर सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए थे।यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 28 जुलाई 2026 के आदेश के आलोक में की जा रही है। अदालत ने शिक्षक नियुक्ति के लिए निर्धारित न्यूनतम प्रशिक्षण योग्यता और उसकी समयसीमा को महत्वपूर्ण माना है।विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियुक्ति के समय निर्धारित प्रशिक्षण योग्यता नहीं रखने वाले शिक्षकों की नियुक्ति केवल बाद में प्रशिक्षण प्राप्त कर लेने से स्वतः वैध नहीं हो जाएगी।इस निर्देश से उन शिक्षकों के सामने भी परेशानी खड़ी हो गई है, जिन्होंने नौकरी मिलने के बाद डीएलएड की योग्यता हासिल कर ली थी।
जिलेवार तैयार की जा रही शिक्षकों की सूची
शिक्षा विभाग ने सभी जिलों में प्रभावित शिक्षकों का विवरण जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों से ऐसे शिक्षकों की जानकारी प्राप्त करें, जिनकी नियुक्ति निर्धारित तारीख के बाद हुई थी और जो नियुक्ति के समय अप्रशिक्षित थे।इसके लिए नियुक्ति तिथि, प्रशिक्षण की स्थिति, विद्यालय का नाम और संबंधित सेवा अभिलेखों की जांच की जा रही है।सुपौल जिले में भी जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से शिक्षकों के विवरण की मांग की गई है। यहां अलग-अलग श्रेणियों में शिक्षकों की जानकारी जुटाई जा रही है।इसमें 31 मार्च 2015 से पहले नियुक्त शिक्षक, पूर्व में बर्खास्त शिक्षक और निर्धारित तारीख के बाद अप्रशिक्षित अवस्था में नियुक्त शिक्षक शामिल हैं।इन विवरणों के आधार पर विभाग आगे की कार्रवाई करेगा।
बाद में डीएलएड करने वालों को भी राहत नहीं?
शिक्षा विभाग के निर्देश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि केवल बाद में डीएलएड की डिग्री प्राप्त कर लेना नियुक्ति को वैध बनाने के लिए पर्याप्त नहीं माना गया है।दरअसल, शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्रारंभिक शिक्षक बनने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक और प्रशिक्षण योग्यता निर्धारित की गई है।31 मार्च 2015 तक कुछ श्रेणियों में अप्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति के लिए छूट उपलब्ध थी। लेकिन निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद ऐसी नियुक्तियों को लेकर कानूनी विवाद शुरू हुआ।सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छूट की अवधि समाप्त होने के बाद आवश्यक योग्यता के बिना की गई नियुक्तियों को वैध नहीं माना जा सकता।हालांकि, किसी शिक्षक के मामले में अंतिम कार्रवाई उसके व्यक्तिगत सेवा रिकॉर्ड, नियुक्ति की परिस्थितियों और लागू न्यायिक निर्देशों के आधार पर होगी।
पुराने शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक मौका
इस आदेश में एक श्रेणी के शिक्षकों को राहत भी दी गई है।जिन अप्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति 31 मार्च 2015 तक हो चुकी थी और जो उस तारीख को सेवा में थे, उन्हें डीएलएड प्रशिक्षण पूरा करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया गया है।इसके अलावा जिन पात्र शिक्षकों की सेवा पटना हाईकोर्ट के 20 मार्च 2024 के फैसले के आधार पर समाप्त कर दी गई थी, उन्हें दोबारा सेवा में लेने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।सुप्रीम कोर्ट ने पहले आयोजित डीएलएड परीक्षा के लंबित परिणाम जल्द घोषित करने के भी निर्देश दिए हैं।इस तरह न्यायिक आदेश में नियुक्ति की तारीख के आधार पर शिक्षकों के लिए अलग-अलग व्यवस्था निर्धारित की गई है।
35 हजार शिक्षकों के परिवारों की बढ़ी चिंता
बिहार स्टेट टीचर्स एसोसिएशन गोपगुट के अनुसार, शिक्षा विभाग के इस आदेश से पूरे राज्य में लगभग 35 हजार शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है।संगठन का कहना है कि इनमें कई शिक्षक लंबे समय से सरकारी विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।इन शिक्षकों ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कई शिक्षक ऐसे हैं, जिनके परिवार की आजीविका पूरी तरह सरकारी नौकरी पर निर्भर है।नौकरी समाप्त होने की आशंका से शिक्षकों के साथ उनके परिवारों में भी चिंता बढ़ गई है।हालांकि, 35 हजार का आंकड़ा शिक्षक संगठन की ओर से बताया गया है। विभागीय सत्यापन पूरा होने के बाद ही प्रभावित शिक्षकों की वास्तविक संख्या स्पष्ट हो सकेगी।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से लगाई गुहार
प्रभावित शिक्षकों ने अपनी नौकरी बचाने के लिए जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की मांग शुरू कर दी है।बेगूसराय में बिहार स्टेट टीचर्स एसोसिएशन गोपगुट के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय मंत्री और बेगूसराय सांसद गिरिराज सिंह को ज्ञापन सौंपा।संगठन ने मांग की है कि वर्षों से कार्यरत शिक्षकों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर समाधान निकाला जाए।शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने सरकारी व्यवस्था के तहत नियुक्ति प्राप्त की थी और लंबे समय तक विद्यालयों में सेवा दी है।ऐसे में अचानक सेवा समाप्त होने की स्थिति में उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट जाएगी बिहार सरकार
इस पूरे मामले में शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम भी सामने आया है।18 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रभावित शिक्षकों की नौकरी बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी।सरकार का प्रयास है कि कानूनी दायरे में रहते हुए प्रभावित शिक्षकों को राहत दिलाने का रास्ता तलाशा जाएहालांकि, जब तक कोई नया न्यायिक आदेश या राहत नहीं मिलती, तब तक विभागीय स्तर पर जारी निर्देश प्रभावी बने रहेंगे।अब शिक्षकों की नजर सरकार के अगले कदम और संभावित कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हुई है।
स्कूलों की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है असर
यदि बड़ी संख्या में शिक्षकों की सेवा समाप्त होती है, तो इसका असर सरकारी विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।ग्रामीण क्षेत्रों के कई स्कूल सीमित शिक्षक संख्या के साथ संचालित होते हैं। ऐसे में शिक्षकों की संख्या घटने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है।हालांकि, वास्तविक प्रभाव प्रभावित शिक्षकों की अंतिम संख्या, उनकी तैनाती और वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर करेगा।फिलहाल शिक्षा विभाग नियुक्ति अभिलेखों और प्रशिक्षण योग्यता की जांच कर रहा है।आने वाले दिनों में जिला स्तर पर तैयार होने वाली सूचियां और राज्य सरकार के कानूनी कदम इस मामले में महत्वपूर्ण होंगे।बिहार के हजारों शिक्षक अब इस उम्मीद में हैं कि उन्हें वर्षों की सेवा और वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्यायिक या प्रशासनिक राहत मिल सकेगी।
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