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DU के 8 विदेशी भाषा कोर्स में एडमिशन

Saba Naaz
25 Jun 2026 2:51 PM IST
DU के 8 विदेशी भाषा कोर्स में एडमिशन
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नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग (COL) ने सत्र 2026-27 के लिए 8 विदेशी भाषाओं के सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स में दाखिले की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ये सभी कोर्स शॉर्ट टर्म और एक वर्षीय कार्यक्रम के रूप में डिजाइन किए गए हैं, जिनका उद्देश्य छात्रों और कामकाजी लोगों को वैश्विक स्तर पर करियर के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

इन कोर्सेज के लिए इच्छुक उम्मीदवार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। विश्वविद्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार इन कार्यक्रमों का मकसद युवाओं में विदेशी भाषाओं के ज्ञान को बढ़ाना, संचार कौशल को मजबूत करना और विभिन्न संस्कृतियों को समझने की क्षमता विकसित करना है।

डीयू द्वारा जिन 8 विदेशी भाषाओं के कोर्स उपलब्ध कराए गए हैं उनमें जापानी, जर्मन, फ्रेंच, चीनी, स्पेनिश, इटैलियन, पुर्तगाली और कोरियाई शामिल हैं। ये भाषाएं आज के वैश्विक रोजगार बाजार में काफी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, जिससे छात्रों को नौकरी और उच्च शिक्षा दोनों क्षेत्रों में लाभ मिल सकता है।

कोर्स और योग्यता की जानकारी

इन कोर्सेज को दो श्रेणियों में बांटा गया है। सर्टिफिकेट कोर्स के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। इसमें CUET स्कोर की आवश्यकता नहीं होगी। वहीं डिप्लोमा कोर्स के लिए संबंधित भाषा में सर्टिफिकेट कोर्स पूरा होना अनिवार्य है।

डीयू ने बताया कि इन कोर्सेज में एडमिशन “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर दिया जाएगा। यानी सीटें सीमित हैं और चयन उपलब्धता के अनुसार होगा।

आवेदन प्रक्रिया

इच्छुक उम्मीदवार दिल्ली विश्वविद्यालय के आधिकारिक पोर्टल cifl.oldcdu.ac.in पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 10 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।

इन विदेशी भाषा कोर्सेज को कॉलेज छात्रों के साथ-साथ वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए भी उपयोगी बनाया गया है, ताकि वे अपनी स्किल्स को अपग्रेड कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर प्राप्त कर सकें।

डीयू का यह कदम उन युवाओं के लिए खास माना जा रहा है जो भविष्य में विदेशी कंपनियों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों या उच्च शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। विदेशी भाषाओं का ज्ञान आज के समय में ग्लोबल कम्युनिकेशन और रोजगार के लिए एक महत्वपूर्ण स्किल बन चुका है।

विश्वविद्यालय का मानना है कि इन कोर्सेज के माध्यम से छात्रों को न केवल भाषा का ज्ञान मिलेगा बल्कि उन्हें अलग-अलग संस्कृतियों को समझने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में भी मदद मिलेगी।

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