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army doctor : अगर आप देश की सेवा करने का जज्बा रखते हैं और साथ ही मेडिकल क्षेत्र में एक शानदार करियर बनाना चाहते हैं, तो भारतीय सशस्त्र बलों की मेडिकल सर्विस आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकती है। आर्मी मेडिकल ऑफिसर बनकर आप केवल डॉक्टर के तौर पर मरीजों का इलाज नहीं करते, बल्कि देश की रक्षा में तैनात जवानों, अधिकारियों और उनके परिवारों की स्वास्थ्य संबंधी जिम्मेदारी भी संभालते हैं।
भारतीय सशस्त्र बलों में डॉक्टर के रूप में सेवा देने के लिए आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल सर्विसेज यानी AFMS के तहत कई अवसर मिलते हैं। इनमें आर्मी मेडिकल कोर यानी AMC की अहम भूमिका होती है। डॉक्टर सेना के अस्पतालों, फील्ड मेडिकल यूनिट, सैन्य स्वास्थ्य संस्थानों और अलग-अलग ऑपरेशनल क्षेत्रों में तैनात किए जा सकते हैं।
आर्मी मेडिकल ऑफिसर बनने के मुख्य रूप से दो बड़े रास्ते हैं। पहला रास्ता 12वीं के बाद AFMC पुणे से MBBS की पढ़ाई करके सैन्य चिकित्सा सेवा में जाना है। दूसरा रास्ता किसी मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेज से MBBS पूरा करने के बाद AFMS में डॉक्टर के रूप में भर्ती के लिए आवेदन करना है।
पहला रास्ता: 12वीं के बाद AFMC पुणे
जो छात्र शुरुआत से ही सैन्य चिकित्सा सेवा में करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए Armed Forces Medical College यानी AFMC पुणे सबसे प्रमुख विकल्पों में से एक है।
AFMC देश के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में शामिल है। यहां MBBS की पढ़ाई के साथ छात्रों को सैन्य वातावरण, अनुशासन और मेडिकल सर्विस की जरूरतों के मुताबिक तैयार किया जाता है।
AFMC के MBBS कोर्स में प्रवेश के लिए उम्मीदवार को NEET UG में क्वालिफाई करना जरूरी होता है। इसके बाद तय प्रक्रिया के आधार पर उम्मीदवारों को स्क्रीनिंग के लिए बुलाया जाता है।
AFMC के 2026 नियमों के अनुसार उम्मीदवार भारतीय नागरिक होना चाहिए, अविवाहित होना चाहिए और निर्धारित मेडिकल फिटनेस मानकों को पूरा करना जरूरी है। प्रवेश वाले वर्ष की 31 दिसंबर तक उम्मीदवार की उम्र कम से कम 17 साल होनी चाहिए और 24 साल पूरी नहीं हुई होनी चाहिए।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उम्मीदवार ने 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी या बायोटेक्नोलॉजी और अंग्रेजी पढ़ी हो। तीनों साइंस विषयों में कुल मिलाकर कम से कम 60 प्रतिशत अंक और प्रत्येक साइंस विषय तथा अंग्रेजी में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक जरूरी हैं। 10वीं स्तर पर गणित भी पास होना चाहिए।
AFMC में MBBS की अवधि साढ़े चार साल है, जिसके बाद एक साल की अनिवार्य रोटेटिंग इंटर्नशिप होती है। यानी पूरी मेडिकल ट्रेनिंग लगभग साढ़े पांच साल की होती है।
AFMC में एक साल में 145 मेडिकल कैडेट्स को प्रवेश देने का प्रावधान है, जिनमें 115 लड़के और 30 लड़कियां शामिल हैं। इसके अलावा सरकार कुछ विदेशी छात्रों के लिए भी सीटें उपलब्ध करा सकती है।
AFMC से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए सबसे अहम बात सर्विस लायबिलिटी है। MBBS पूरा करने के बाद चयनित मेडिकल कैडेट्स को सशस्त्र बलों की मेडिकल सर्विस में कमीशंड ऑफिसर के रूप में सेवा देनी होती है। एडमिशन के समय इससे जुड़ा बॉन्ड भी साइन करना पड़ता है।
दूसरा रास्ता: MBBS के बाद AFMS में एंट्री
अगर आपने किसी अन्य मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेज से MBBS पूरा कर लिया है, तब भी आप सशस्त्र बलों में डॉक्टर के रूप में करियर बना सकते हैं।
AFMS समय-समय पर मेडिकल ऑफिसर के पदों के लिए भर्ती निकालता है। ऐसे उम्मीदवारों को संबंधित भर्ती अधिसूचना में दी गई योग्यता, उम्र, रजिस्ट्रेशन और अन्य शर्तों को पूरा करना होता है।
आमतौर पर उम्मीदवार के पास मान्यता प्राप्त संस्थान से MBBS डिग्री और वैध मेडिकल रजिस्ट्रेशन होना जरूरी होता है। कई भर्तियों में इंटर्नशिप पूरा होना भी अनिवार्य शर्त रहती है।
चयन प्रक्रिया में आवेदन, दस्तावेजों की जांच, इंटरव्यू और मेडिकल फिटनेस टेस्ट शामिल हो सकते हैं। अंतिम नियम हर भर्ती अधिसूचना के अनुसार अलग हो सकते हैं, इसलिए उम्मीदवारों को आवेदन से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ना चाहिए।
इस रास्ते से चयनित डॉक्टरों को शॉर्ट सर्विस कमीशन या उपलब्ध नियमों के अनुसार अन्य प्रकार का कमीशन मिल सकता है। चयन के बाद डॉक्टरों को सेना, नौसेना या वायुसेना की मेडिकल जरूरतों के मुताबिक नियुक्त किया जा सकता है।
क्या होती है मेडिकल ऑफिसर की जिम्मेदारी?
आर्मी मेडिकल ऑफिसर का काम सामान्य अस्पताल के डॉक्टर से कई मामलों में अलग हो सकता है। उन्हें सैन्य अस्पतालों के अलावा फील्ड एरिया में भी तैनाती मिल सकती है।
उनकी जिम्मेदारी में सैनिकों की नियमित मेडिकल जांच, बीमारी का इलाज, चोटों और आपातकालीन मामलों को संभालना, ऑपरेशन से पहले और बाद की चिकित्सा देखभाल तथा यूनिट के स्वास्थ्य मानकों की निगरानी शामिल हो सकती है।
युद्ध या किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन के दौरान मेडिकल ऑफिसर की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे समय घायल जवानों को तत्काल उपचार देना और उन्हें सुरक्षित मेडिकल सेंटर तक पहुंचाने में मेडिकल टीम अहम भूमिका निभाती है।
मेडिकल ऑफिसर को मिलती है ऑफिसर की पहचान
AFMS में डॉक्टर सिर्फ चिकित्सक नहीं होते, बल्कि कमीशंड ऑफिसर भी होते हैं। इसलिए मेडिकल जिम्मेदारियों के साथ उन्हें सैन्य अनुशासन और अधिकारी के तौर पर जिम्मेदारियों का भी पालन करना पड़ता है।
सेना में डॉक्टर के पद पर सेवा करने वालों को वेतन के साथ निर्धारित सैन्य भत्ते, आवास, चिकित्सा सुविधा और अन्य लाभ मिल सकते हैं। हालांकि वेतन और भत्तों की वास्तविक राशि रैंक, पोस्टिंग और लागू सरकारी नियमों के अनुसार तय होती है।
पोस्ट ग्रेजुएशन का भी मौका
मेडिकल ऑफिसर के रूप में सेवा करने के दौरान डॉक्टरों को आगे विशेषज्ञता हासिल करने के अवसर भी मिल सकते हैं। AFMC पुणे और सशस्त्र बलों से जुड़े कई मेडिकल संस्थानों में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल ट्रेनिंग की व्यवस्था है।
डॉक्टर मेडिसिन, सर्जरी, एनेस्थीसिया, रेडियोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, पैथोलॉजी और अन्य क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं। इससे आगे के करियर में स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट के तौर पर काम करने के अवसर बढ़ते हैं।
किसके लिए बेहतर है यह करियर?
यह करियर उन युवाओं के लिए खास तौर पर अच्छा है जो मेडिकल क्षेत्र में रुचि रखते हैं लेकिन साथ ही अनुशासन, सैन्य जीवन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने के लिए भी तैयार हैं।
यह केवल एक सरकारी नौकरी नहीं है। इसमें कई बार दूरदराज के क्षेत्रों, सैन्य अस्पतालों और कठिन परिस्थितियों में भी काम करना पड़ सकता है। इसलिए शारीरिक फिटनेस और मानसिक मजबूती दोनों जरूरी हैं।
अगर आप अभी 12वीं में हैं तो NEET UG की मजबूत तैयारी करके AFMC पुणे को लक्ष्य बना सकते हैं। वहीं अगर MBBS कर चुके हैं तो AFMS की मेडिकल ऑफिसर भर्ती पर नजर रख सकते हैं।
कुल मिलाकर आर्मी मेडिकल ऑफिसर बनने के दो प्रमुख रास्ते हैं—पहला 12वीं के बाद NEET UG के जरिए AFMC पुणे में MBBS करना और दूसरा MBBS पूरा करने के बाद AFMS की डॉक्टर भर्ती में शामिल होना। दोनों ही रास्तों में मेडिकल योग्यता के साथ शारीरिक फिटनेस, अनुशासन और देश सेवा के प्रति प्रतिबद्धता बेहद जरूरी है।
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