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जुलाई में बेरोजगारी दर घटी, रोजगार बाजार में सुधार के संकेत

Kavita2
17 Aug 2026 5:21 PM IST
जुलाई में बेरोजगारी दर घटी, रोजगार बाजार में सुधार के संकेत
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नई दिल्ली। भारत के श्रम बाजार के लिए जुलाई 2026 में सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) की ओर से जारी पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के अनुसार, जुलाई महीने में देश की बेरोजगारी दर में गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही लेबर फोर्स में लोगों की भागीदारी भी बढ़ी है, जिससे रोजगार बाजार में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।

PLFS के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के बीच बेरोजगारी दर (Unemployment Rate-UR) जून 2026 में 5.5 प्रतिशत थी, जो जुलाई में घटकर 5.1 प्रतिशत रह गई।

आंकड़ों से संकेत मिलता है कि जुलाई महीने में अधिक संख्या में लोग रोजगार गतिविधियों से जुड़े और श्रम बाजार में भागीदारी बढ़ी।

ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी में बड़ी गिरावट

बेरोजगारी दर में कमी का सबसे बड़ा असर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिला है। आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी दर जून के 5 प्रतिशत से घटकर जुलाई 2026 में 4.5 प्रतिशत पर आ गई।

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में सुधार को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। कृषि गतिविधियों, ग्रामीण रोजगार योजनाओं और स्थानीय स्तर पर बढ़ती आर्थिक गतिविधियों का असर श्रम बाजार पर दिखाई दे सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर में गिरावट यह संकेत देती है कि गांवों में काम की उपलब्धता में सुधार हुआ है और अधिक लोग रोजगार से जुड़ पाए हैं।

शहरी बेरोजगारी दर लगभग स्थिर

जहां ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर में गिरावट दर्ज की गई, वहीं शहरी क्षेत्रों में स्थिति लगभग स्थिर रही।

PLFS के अनुसार, शहरी भारत में बेरोजगारी दर जुलाई में 6.7 प्रतिशत रही, जबकि जून में यह 6.6 प्रतिशत थी। यानी शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है।

शहरी क्षेत्रों में रोजगार बाजार पर उद्योग, सेवा क्षेत्र और निजी कंपनियों में भर्ती की गति का सीधा असर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने से शहरी रोजगार के आंकड़ों में भी सुधार हो सकता है।

लेबर फोर्स में बढ़ी भागीदारी

बेरोजगारी दर में कमी के साथ-साथ जुलाई में लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन में भी सुधार दर्ज किया गया है।

लेबर फोर्स में वे लोग शामिल होते हैं जो या तो रोजगार में हैं या रोजगार की तलाश कर रहे हैं। भागीदारी दर बढ़ने का मतलब है कि अधिक लोग काम करने के लिए बाजार में सक्रिय हुए हैं।

यह अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है, क्योंकि अधिक लोगों का रोजगार बाजार में शामिल होना आर्थिक गतिविधियों में बढ़ोतरी को दर्शाता है।

PLFS से मिलती है रोजगार की जानकारी

नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस की ओर से जारी पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे देश में रोजगार और बेरोजगारी की स्थिति को समझने का प्रमुख स्रोत है।

इस सर्वे के जरिए सरकार को श्रम बाजार की स्थिति, रोजगार के अवसरों और लोगों की आर्थिक भागीदारी से जुड़े आंकड़े मिलते हैं।

नीति निर्माण और रोजगार योजनाओं को तैयार करने में इन आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

रोजगार बाजार में सुधार के संकेत

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई के आंकड़े श्रम बाजार में धीरे-धीरे सुधार के संकेत दे रहे हैं। बेरोजगारी दर में गिरावट और श्रम भागीदारी में बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत हैं।

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि रोजगार की गुणवत्ता, स्थायी नौकरियों की उपलब्धता और युवाओं के लिए पर्याप्त अवसर अभी भी महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं।

भारत जैसे बड़े देश में रोजगार बाजार पर लगातार नजर रखना जरूरी है, क्योंकि हर साल बड़ी संख्या में युवा कार्यबल में शामिल होते हैं।

आगे की राह

सरकार रोजगार बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में निवेश, कौशल विकास कार्यक्रम और उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आर्थिक गतिविधियां लगातार मजबूत बनी रहती हैं तो आने वाले महीनों में रोजगार के आंकड़ों में और सुधार देखने को मिल सकता है।

जुलाई 2026 के PLFS आंकड़े बताते हैं कि देश के श्रम बाजार में कुछ सकारात्मक बदलाव हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी में कमी और कुल बेरोजगारी दर में गिरावट अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरे संकेत माने जा रहे हैं।

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