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चीनी कंपनियों के शेयरों में उछाल निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी

Ratna Netam
17 Aug 2026 5:12 PM IST
चीनी कंपनियों के शेयरों में उछाल निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी
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नई दिल्ली। शेयर बाजार में सोमवार 17 अगस्त को शुगर कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। बलरामपुर चीनी मिल्स, त्रिवेणी इंजीनियरिंग, धामपुर शुगर, डालमिया भारत शुगर, उत्तम शुगर, श्री रेणुका शुगर्स और EID Parry जैसे शेयरों में जोरदार तेजी आई। कुछ शुगर स्टॉक्स कारोबारी सत्र में करीब 7 प्रतिशत तक उछल गए। इस तेजी के पीछे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों और सप्लाई को लेकर चिंता को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
क्यों भाग रहे हैं शुगर स्टॉक्स?
शुगर कंपनियों के शेयरों में तेजी की सबसे बड़ी वजह चीनी की कीमतों में आया उछाल है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में रॉ शुगर की कीमत करीब एक साल के उच्च स्तर 16.6 सेंट प्रति पाउंड तक पहुंची है। वहीं व्हाइट शुगर की कीमत लगभग 15 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई। वैश्विक बाजार में कीमतों की मजबूती का असर भारतीय शुगर कंपनियों के शेयरों पर भी दिखाई दिया।
घरेलू बाजार में भी चीनी महंगी हुई है। पिछले करीब एक महीने में कीमतों में लगभग 8 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मुंबई में चीनी के भाव लगभग 5,000 से 5,090 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचने की रिपोर्ट है। कीमतों में तेजी से शुगर कंपनियों के मार्जिन में सुधार की उम्मीद बढ़ी है और यही कारण है कि निवेशक इन शेयरों में खरीदारी कर रहे हैं।
इन शेयरों में दिखा जोरदार उछाल
सोमवार के कारोबार में बलरामपुर चीनी मिल्स, त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज, धामपुर शुगर मिल्स, डालमिया भारत शुगर एंड इंडस्ट्रीज, श्री रेणुका शुगर्स और EID Parry सहित कई कंपनियों के शेयर तेजी में रहे। शुगर पैक में कुछ शेयरों ने करीब 7 प्रतिशत तक की छलांग लगाई।
यह तेजी केवल एक कारोबारी दिन तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ सत्रों से शुगर स्टॉक्स में लगातार निवेशकों की दिलचस्पी दिखाई दे रही है। पिछले सप्ताह घरेलू चीनी कीमतों में तेजी के बाद कई प्रमुख शुगर शेयर दो कारोबारी सत्रों में करीब 12 प्रतिशत तक उछल चुके थे।
सप्लाई की चिंता ने बढ़ाया भाव
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे सप्लाई को लेकर चिंता भी महत्वपूर्ण है। प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में मौसम और फसल की स्थिति पर बाजार की नजर है। भारत के साथ ब्राजील और थाईलैंड जैसे बड़े उत्पादक देशों की सप्लाई संभावनाएं भी वैश्विक कीमतों को प्रभावित कर रही हैं।
भारत में उत्पादन और उपलब्धता को लेकर बढ़ी चिंता के बीच सरकार ने चीनी स्टॉक की निगरानी भी बढ़ाई है। खाद्य मंत्रालय स्टॉक और खपत से जुड़े आंकड़ों पर नजर रखने के साथ मिलों में भौतिक सत्यापन जैसे कदम उठा रहा है, ताकि जमाखोरी या सट्टेबाजी से कीमतों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
त्योहारी मांग से भी मिल सकता है सहारा
भारत में आने वाले त्योहारी सीजन के दौरान मिठाई और अन्य खाद्य उत्पादों में चीनी की खपत बढ़ती है। ऐसे में बाजार को मजबूत त्योहारी मांग की भी उम्मीद है। मांग मजबूत रहने और सप्लाई सीमित होने की स्थिति में चीनी की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।
शुगर कंपनियों के लिए ऊंची चीनी कीमतें आमतौर पर सकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि इससे उनकी बिक्री से होने वाली प्राप्ति बढ़ सकती है। हालांकि इसका वास्तविक फायदा प्रत्येक कंपनी की उत्पादन लागत, इन्वेंट्री और एथेनॉल कारोबार पर निर्भर करेगा।
क्या आगे भी आएगी तेजी?
शुगर स्टॉक्स की आगे की चाल कई कारकों पर निर्भर करेगी। अगर घरेलू और वैश्विक चीनी कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं और सप्लाई को लेकर चिंता जारी रहती है तो सेक्टर में सकारात्मक माहौल बना रह सकता है। दूसरी तरफ सरकार द्वारा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदम या उत्पादन अनुमान में सुधार इस तेजी को सीमित कर सकते हैं।
एथेनॉल भी शुगर कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण फैक्टर है। हालांकि हाल के आंकड़े बताते हैं कि कुल एथेनॉल सप्लाई में अनाज आधारित एथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ी है और गन्ना आधारित एथेनॉल का हिस्सा घटा है। इसलिए सभी शुगर कंपनियों को एथेनॉल से समान फायदा मिलने की उम्मीद करना उचित नहीं होगा।
फिलहाल चीनी की ऊंची कीमतों ने शुगर स्टॉक्स में नया जोश भर दिया है। निवेशकों के लिए अब घरेलू कीमतों, मानसून, उत्पादन अनुमान, सरकारी नीतियों और वैश्विक सप्लाई पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। हाल की 7 प्रतिशत तक की तेजी आकर्षक जरूर है, लेकिन कमोडिटी आधारित शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव भी देखने को मिलता है। ऐसे में केवल मौजूदा तेजी देखकर निवेश का फैसला करने के बजाय कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन और जोखिमों का आकलन करना जरूरी है।
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