व्यापार

ITR फाइल करने से पहले टैक्स स्लैब समझें

Saba Naaz
25 Jun 2026 3:36 PM IST
ITR फाइल करने से पहले टैक्स स्लैब समझें
x

Vyapaar: नई दिल्ली। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। ऐसे में नौकरीपेशा और अन्य करदाताओं के मन में यह सवाल है कि आखिर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट उनकी टैक्स देनदारी कैसे तय करता है। रिटर्न फाइल करने से पहले यह समझना जरूरी है कि टैक्स की गणना किन चरणों में की जाती है।

सबसे पहले विभाग यह तय करता है कि करदाता निवासी (Resident) है या अनिवासी (Non-Resident)। निवासी व्यक्ति की वैश्विक आय पर टैक्स लागू हो सकता है, जबकि अनिवासी व्यक्ति पर केवल भारत में अर्जित आय पर ही टैक्स लगता है। यही आधार आगे की पूरी टैक्स गणना को प्रभावित करता है।

इसके बाद कुल आय का आकलन किया जाता है, जिसमें पांच प्रमुख स्रोत शामिल होते हैं—वेतन (Salary), हाउस प्रॉपर्टी से आय, व्यवसाय या पेशे से कमाई, पूंजीगत लाभ (Capital Gain) और अन्य स्रोत जैसे ब्याज, एफडी और डिविडेंड। इन सभी आय को जोड़कर कुल आय निकाली जाती है।

इसके बाद विभाग जरूरी एडजस्टमेंट करता है, जिसमें क्लबिंग ऑफ इनकम, पुराने नुकसान का सेट-ऑफ और कैरी फॉरवर्ड, तथा धारा 80C, 80D जैसी कटौतियों को घटाया जाता है। इसके बाद कर योग्य आय (Taxable Income) तय होती है।

टैक्स देनदारी की गणना दो हिस्सों में होती है—सामान्य आय और विशेष दर वाली आय। सामान्य आय पर चुने गए टैक्स रिजीम और स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है, जबकि कुछ आय पर अलग दरें लागू होती हैं। कृषि आय को आमतौर पर टैक्स से छूट प्राप्त होती है, हालांकि कुछ मामलों में इसका उपयोग दर निर्धारण में किया जाता है।

अंतिम टैक्स निकालते समय पहले कुल टैक्स की गणना की जाती है और फिर पहले से भुगतान किए गए टैक्स जैसे TDS, TCS, एडवांस टैक्स और सेल्फ असेसमेंट टैक्स को घटाया जाता है। अगर टैक्स समय पर जमा नहीं किया गया हो तो उस पर ब्याज और लेट फीस भी जुड़ जाती है। इसके बाद सरचार्ज और हेल्थ-एंड-एजुकेशन सेस जोड़कर अंतिम देनदारी तय की जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि रिटर्न भरने से पहले अपनी आय, कटौतियों और TDS का सही मिलान करना बेहद जरूरी है। इससे गलतियों से बचा जा सकता है और अतिरिक्त टैक्स या नोटिस जैसी समस्याओं की संभावना कम हो जाती है।

सही जानकारी के साथ ITR फाइल करना न केवल आसान होता है, बल्कि यह भविष्य में होने वाली वित्तीय परेशानियों से भी बचाता है।

Next Story