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MCX में गिरावट का असर गोल्ड-सिल्वर ETF 8% तक टूटे

Ratna Netam
25 Jun 2026 3:32 PM IST
MCX में गिरावट का असर गोल्ड-सिल्वर ETF 8% तक टूटे
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चिंता का माहौल बन गया है।

Business बिजनेस : गुरुवार को गोल्ड और सिल्वर से जुड़े एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में बड़ी गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने-चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव और गिरावट का सीधा असर ETF पर भी पड़ा, जिसके चलते ये फंड्स करीब 8 प्रतिशत तक टूट गए। इस अचानक गिरावट से निवेशकों में चिंता का माहौल बन गया है।

बाजार के आंकड़ों के अनुसार, टाटा सिल्वर ETF में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। यह ETF करीब 8 प्रतिशत लुढ़ककर दिन के निचले स्तर 20.01 रुपये पर पहुंच गया। जबकि इसका पिछला बंद भाव 21.66 रुपये था। एक ही दिन में इतनी बड़ी गिरावट को बाजार विशेषज्ञ असामान्य मूवमेंट मान रहे हैं, जो कमोडिटी बाजार में तेज उतार-चढ़ाव का संकेत देता है।

विश्लेषकों का कहना है कि ETF की कीमतें सीधे तौर पर उनके अंतर्निहित एसेट यानी सोना और चांदी की कीमतों पर निर्भर करती हैं। जब MCX पर गोल्ड और सिल्वर में गिरावट या अस्थिरता बढ़ती है, तो उसका असर तुरंत ETF पर दिखाई देता है। गुरुवार को भी यही स्थिति देखने को मिली, जहां कीमती धातुओं में तेज गिरावट के चलते ETF दबाव में आ गए।

गोल्ड और सिल्वर को आमतौर पर सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है, लेकिन हाल के दिनों में वैश्विक संकेतों, कमोडिटी बाजार की हलचल और निवेशकों की बदलती धारणा के कारण इनमें तेज उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसी का असर अब ETF जैसे निवेश साधनों पर भी दिख रहा है।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ETF में आई यह गिरावट निवेशकों के लिए अल्पकालिक झटका हो सकती है, लेकिन लंबी अवधि में इन फंड्स की स्थिति कमोडिटी की कीमतों पर निर्भर करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे समय में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए और बाजार की दिशा को समझकर ही कदम उठाना चाहिए।

टाटा सिल्वर ETF के अलावा अन्य गोल्ड और सिल्वर आधारित ETF में भी दबाव देखा गया है, हालांकि सबसे ज्यादा असर सिल्वर से जुड़े फंड्स पर पड़ा है। सिल्वर की कीमतों में उतार-चढ़ाव अधिक होने के कारण इसके ETF भी ज्यादा संवेदनशील माने जाते हैं।

इस तरह गुरुवार का दिन गोल्ड और सिल्वर निवेशकों के लिए काफी अस्थिर रहा, जहां MCX में आई गिरावट ने सीधे ETF बाजार को प्रभावित किया और निवेशकों के पोर्टफोलियो पर दबाव बढ़ा दिया।

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