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शेयर बाजार में मचा कोहराम, सेंसेक्स 909 अंक टूटा, निफ्टी भी धड़ाम

Ashish verma
8 Oct 2026 2:07 PM IST
शेयर बाजार में मचा कोहराम, सेंसेक्स 909 अंक टूटा, निफ्टी भी धड़ाम
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बिजनेस। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 22,300 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। बाजार में अचानक आई इस भारी गिरावट से निवेशकों में चिंता बढ़ गई। शुरुआती कारोबार से ही बाजार पर दबाव बना हुआ था, लेकिन दिन बढ़ने के साथ बिकवाली तेज होती गई। सेंसेक्स कारोबार के दौरान 71,700 के स्तर से भी नीचे पहुंच गया। शेयर बाजार में गिरावट का असर दिग्गज कंपनियों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दिखाई दिया। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें, भारतीय रिजर्व बैंक की सख्त मौद्रिक नीति, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले कमजोर संकेत बाजार में गिरावट की प्रमुख वजह रहे।
सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट
गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 204 अंक टूटकर 72,439.20 पर पहुंच गया था। वहीं एनएसई निफ्टी 69.35 अंक गिरकर 22,533.70 पर कारोबार कर रहा था।
हालांकि, इसके बाद बिकवाली का दबाव बढ़ने लगा। दोपहर के कारोबार के दौरान सेंसेक्स 950 अंक से अधिक गिरकर 71,691.95 तक पहुंच गया। निफ्टी में भी 300 अंकों से ज्यादा की गिरावट देखी गई और सूचकांक 22,300 के नीचे आ गया।
बाजार की यह गिरावट केवल कुछ कंपनियों तक सीमित नहीं रही। कई प्रमुख शेयरों के साथ व्यापक बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए शेयर बेचने शुरू किए, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया। ये कारोबार के दौरान दर्ज स्तर हैं, अंतिम बंद भाव नहीं।
आरबीआई के फैसले से बढ़ी निवेशकों की चिंता
बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहों में भारतीय रिजर्व बैंक का हालिया मौद्रिक नीति फैसला शामिल है। आरबीआई ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है।करीब चार साल बाद ब्याज दर में हुई इस बढ़ोतरी से निवेशकों के बीच चिंता बढ़ी है। रेपो रेट बढ़ने का असर बैंकों की उधारी लागत और भविष्य में कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है।ब्याज दरें बढ़ने से कंपनियों के लिए कर्ज लेना महंगा हो सकता है। इससे कारोबारी विस्तार और निवेश संबंधी योजनाओं की लागत बढ़ने की आशंका रहती है।
इसके अलावा आरबीआई के सख्त मौद्रिक रुख से बाजार में यह धारणा बनी कि महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए ब्याज दरें कुछ समय तक ऊंचे स्तर पर रह सकती हैं। यही चिंता निवेशकों की बिकवाली में दिखाई दी।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई परेशानी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 103 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से देश का आयात बिल बढ़ने की आशंका रहती है। इसके अलावा पेट्रोलियम उत्पादों की लागत बढ़ने से महंगाई पर भी दबाव पड़ सकता है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें विमानन, पेंट, रसायन और परिवहन से जुड़े कारोबारों की लागत को प्रभावित कर सकती हैं। इन आशंकाओं ने बाजार में निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
घरेलू शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की बिकवाली भी गिरावट की बड़ी वजह बनी है।उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बुधवार, 7 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने लगभग 6,121 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब 4,597 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी।विदेशी निवेशकों की निकासी के पीछे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता जैसे कारण प्रमुख हैं।
अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ने से निवेशक उभरते बाजारों में निवेश कम कर सकते हैं। इससे भारतीय शेयर बाजार में भी बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।मेटल शेयरों में भारी बिकवाली, आईटी ने दिखाई मजबूती
गुरुवार के कारोबार में मेटल सेक्टर के शेयरों पर विशेष दबाव देखने को मिला। जेएसडब्ल्यू स्टील के शेयर में करीब चार प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। रियल्टी और दूसरे कई सेक्टरों में भी कमजोरी रही।
वहीं आईटी सेक्टर ने गिरते बाजार में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। टीसीएस, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस और एचसीएल टेक जैसे शेयरों में बढ़त देखने को मिली।टीसीएस के तिमाही नतीजों से पहले निवेशकों की दिलचस्पी कंपनी के शेयरों में बनी रही। इससे आईटी शेयरों को बाजार की व्यापक गिरावट के बीच कुछ सहारा मिला।हालांकि, बाजार में बिकवाली का दबाव इतना ज्यादा था कि आईटी शेयरों की बढ़त प्रमुख सूचकांकों को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही।
अदाणी और पेटीएम के शेयरों में भी गिरावट
शेयर बाजार की कमजोरी का असर कई बड़ी कंपनियों पर दिखाई दिया। कारोबार के दौरान अदाणी समूह की कुछ कंपनियों के शेयरों में करीब 10 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।अदाणी एंटरप्राइजेज, अदाणी ग्रीन एनर्जी और अदाणी पावर के शेयर बिकवाली के दबाव में रहे।
वहीं पेटीएम की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस के शेयर में भी लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। डिजिटल भुगतान से जुड़े मर्चेंट शुल्क के लागू होने में देरी की आशंकाओं ने इस क्षेत्र के शेयरों पर दबाव डाला।इसके अलावा ओला इलेक्ट्रिक के शेयर में भी कमजोरी दर्ज की गई।
निवेशकों की करीब 9 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति घटी
शेयर बाजार की तेज गिरावट से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण पर बड़ा असर पड़ा। कारोबार के दौरान निवेशकों की संपत्ति के बाजार मूल्य में करीब 9 लाख करोड़ रुपये की कमी होने की रिपोर्ट सामने आई।
हालांकि, बाजार पूंजीकरण में यह गिरावट निवेशकों के वास्तविक नकद नुकसान के बराबर नहीं होती। शेयरों की कीमतों में बदलाव के कारण सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य घटता-बढ़ता रहता है।बाजार में गिरावट के बीच मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली दिखाई दी। इससे छोटे निवेशकों की चिंता बढ़ी है।
आगे शेयर बाजार की दिशा पर इन संकेतों का असर
आने वाले कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कंपनियों के तिमाही नतीजों से प्रभावित हो सकती है।
खास तौर पर निफ्टी के 22,300 के नीचे पहुंचने के बाद निवेशक बाजार की अगली चाल पर नजर रख रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है।इस बीच निवेशकों के लिए जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय जोखिम, निवेश अवधि और कंपनियों की वित्तीय स्थिति को समझना महत्वपूर्ण है।
गुरुवार की गिरावट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और घरेलू मौद्रिक नीति के फैसले भारतीय बाजार पर बड़ा प्रभाव डाल रहे हैं। अब निवेशकों की निगाहें बाजार में स्थिरता लौटने और कंपनियों के आगामी वित्तीय नतीजों पर टिकी हैं।
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