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सोने-चांदी की कीमतों में तूफानी तेजी

Rajeshwari Nishad
4 Nov 2026 2:56 PM IST
सोने-चांदी की कीमतों में तूफानी तेजी
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नई दिल्ली। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के नतीजों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में हलचल मचा दी है। डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद अमेरिकी डॉलर में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली है। बुधवार, 4 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गया। वहीं, चांदी की कीमत भी बढ़कर करीब 52 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी राजनीति में बदलते समीकरणों, डॉलर की कमजोरी और बॉन्ड यील्ड में गिरावट के कारण कीमती धातुओं को समर्थन मिला है। हालांकि, आने वाले दिनों में सोने-चांदी की कीमतें किस दिशा में जाएंगी, यह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और आर्थिक आंकड़ों पर भी निर्भर करेगा।
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने बड़ी सफलता हासिल की है। चुनाव नतीजों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक नीतियों को लेकर बाजार में नई अनिश्चितता पैदा हुई है। निवेशकों का अनुमान है कि कांग्रेस में बदले राजनीतिक समीकरणों के कारण सरकार के कई आर्थिक प्रस्तावों को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है।
इस राजनीतिक बदलाव का असर डॉलर पर दिखाई दिया। बुधवार को डॉलर इंडेक्स में करीब 0.54 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 101.17 के आसपास पहुंच गया। डॉलर इंडेक्स दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की मजबूती को दर्शाता है।
डॉलर कमजोर होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी जैसी डॉलर में मूल्यांकित वस्तुएं अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए अपेक्षाकृत सस्ती हो सकती हैं। इससे मांग बढ़ने की संभावना रहती है।
सोने की कीमत में 2 प्रतिशत से ज्यादा उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बुधवार को सोने की कीमत में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। सुबह के कारोबार में हाजिर सोना करीब 2.34 प्रतिशत बढ़कर 4,023 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया।सोने की कीमत में एक कारोबारी सत्र के दौरान लगभग 102 डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी करीब 2.30 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,031 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करते दिखाई दिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट सोने के लिए सकारात्मक संकेत हैं। जब बॉन्ड से मिलने वाला प्रतिफल कम होता है, तो निवेशकों के लिए सोना अपेक्षाकृत आकर्षक बन सकता है।इसके अलावा राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित निवेश के विकल्पों की तलाश करते हैं। ऐसे समय में सोने की मांग बढ़ सकती है।
चांदी की कीमतों में भी जबरदस्त तेजी
सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी करीब 4 प्रतिशत उछलकर 52 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई।हाल के दिनों में आई गिरावट के बाद चांदी में यह तेजी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।इसका प्रमुख कारण यह है कि चांदी का उपयोग निवेश के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियों में भी होता है। सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और विभिन्न औद्योगिक उपकरणों में चांदी की मांग बनी रहती है।
ऐसे में यदि वैश्विक आर्थिक विकास को लेकर चिंता बढ़ती है, तो चांदी की औद्योगिक मांग प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, डॉलर कमजोर रहने और निवेश मांग बढ़ने की स्थिति में कीमतों को समर्थन मिल सकता है।
भारत में सोने-चांदी के क्या हैं दाम?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी का असर भारतीय सर्राफा बाजार और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर भी देखने को मिला है।
बुधवार दोपहर के कारोबार में MCX पर 4 दिसंबर डिलीवरी वाला सोना करीब 2.08 प्रतिशत बढ़कर 1,42,353 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया।वहीं, चांदी का वायदा भाव लगभग 3.55 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,86,081 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया।ये वायदा बाजार के कारोबारी भाव हैं। स्थानीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की वास्तविक खुदरा कीमतें टैक्स, प्रीमियम और अन्य शुल्कों के कारण अलग हो सकती हैं।एक्सपर्ट ने बताया आगे कैसी रहेगी सोने की चालब्रोकरेज फर्म पेपरस्टोन के रिसर्च प्रमुख क्रिस वेस्टन के अनुसार, अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में गिरावट सोने की कीमतों को समर्थन दे रही है।
उनका मानना है कि अमेरिकी राजनीति में बढ़ती अनिश्चितता भी निवेशकों को सोने की ओर आकर्षित कर रही है।वहीं, बोनांजा पोर्टफोलियो के वरिष्ठ रिसर्च विश्लेषक निर्पेंद्र यादव के अनुसार, अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के परिणामों ने वैश्विक वित्तीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है। इसके कारण कीमती धातुओं को निकट अवधि में समर्थन मिल सकता है।हालांकि, उनका कहना है कि केवल चुनाव परिणाम सोने और चांदी के दीर्घकालिक रुझान को बदलने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।कीमतों में स्थायी तेजी के लिए निवेशकों की मजबूत मांग और आर्थिक परिस्थितियों का अनुकूल बने रहना आवश्यक होगा।
क्या सोना और महंगा होगा?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में सोने की कीमतों में तेजी जारी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इसके लिए कई परिस्थितियों का अनुकूल होना जरूरी है।यदि डॉलर में कमजोरी बनी रहती है और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में और गिरावट आती है, तो सोने को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है।इसके विपरीत यदि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाता है, तो डॉलर को मजबूती मिल सकती है। ऐसी स्थिति में सोने की तेजी सीमित हो सकती है।निवेशक इस सप्ताह आने वाले अमेरिकी रोजगार आंकड़ों पर भी नजर बनाए हुए हैं। इनसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और फेडरल रिजर्व की आगामी नीति के संबंध में संकेत मिल सकते हैं।
चांदी में ज्यादा उतार-चढ़ाव की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की कीमतों में आने वाले दिनों में सोने के मुकाबले अधिक उतार-चढ़ाव रह सकता है।
यदि वैश्विक औद्योगिक मांग मजबूत रहती है और डॉलर में गिरावट जारी रहती है, तो चांदी को फायदा मिल सकता है। हालांकि, आर्थिक विकास की रफ्तार कमजोर पड़ने पर औद्योगिक मांग से जुड़ी चिंताएं कीमतों पर दबाव डाल सकती हैं।इसलिए चांदी में मौजूदा तेजी को लगातार बढ़ोतरी की गारंटी नहीं माना जा सकता।
निवेशकों को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, सोने और चांदी में निवेश करने वालों को अमेरिकी डॉलर इंडेक्स, ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक घटनाओं पर नजर रखनी चाहिए।भारतीय निवेशकों के लिए रुपये और डॉलर की विनिमय दर भी महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें स्थिर रहने के बावजूद रुपये में कमजोरी आने पर भारत में सोना महंगा हो सकता है।
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