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चीनी के दाम बढ़े, एक महीने में 7% महंगी हुई

Kavita2
8 July 2026 5:00 PM IST
चीनी के दाम बढ़े, एक महीने में 7% महंगी हुई
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नई दिल्ली: देश में चीनी की कीमतों में पिछले कुछ हफ्तों के दौरान तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। गन्ने के उत्पादन पर कम बारिश के संभावित असर की चिंताओं और मांग में सुधार के कारण चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। जून महीने में चीनी की कीमतों में करीब 6 से 7 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून की शुरुआती स्थिति और गन्ने की फसल को लेकर चिंता ने चीनी बाजार पर असर डाला है। इसके अलावा, मास खत्म होने के बाद मांग में सुधार भी कीमतों में तेजी का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।

महाराष्ट्र में एक्स-मिल कीमतों में बढ़ोतरी

देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में चीनी की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। चीनी मिलों के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में एक्स-मिल चीनी की कीमतें बढ़कर करीब 41.5 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं।

एक महीने पहले यही कीमतें लगभग 38.5 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास थीं। यानी एक महीने के भीतर चीनी की एक्स-मिल कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है।

महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में चीनी मिलें संचालित होती हैं और देश के कुल चीनी उत्पादन में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में यहां कीमतों में होने वाला बदलाव पूरे देश के बाजार पर असर डालता है।

कोल्हापुर बाजार में भी तेजी

चीनी के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में शामिल कोल्हापुर बाजार में भी कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला है।

जानकारी के अनुसार, 7 जून से 7 जुलाई के बीच मिलों की औसत चीनी टेंडर कीमतों में 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। कीमतें 3,835 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 4,120 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि चीनी मिलों की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आगे चलकर खुदरा बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।

कम बारिश से गन्ने की फसल पर चिंता

चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण गन्ने के उत्पादन को लेकर चिंता बताई जा रही है। जून में कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश हुई, जिससे आगामी गन्ना उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई गई।

हालांकि अभी फसल की स्थिति को लेकर अंतिम तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन बाजार में भविष्य की आपूर्ति को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। इसी वजह से व्यापारियों और मिलों ने कीमतों में तेजी का रुख अपनाया है।

मांग बढ़ने से भी मिला समर्थन

कीमतों में बढ़ोतरी का एक कारण मांग में सुधार भी माना जा रहा है। आमतौर पर मासिक अवधि खत्म होने के बाद बाजार में खरीदारी बढ़ती है।

त्योहारों के सीजन में चीनी की मांग और बढ़ने की उम्मीद रहती है, लेकिन मौजूदा समय में भी घरेलू खपत में सुधार देखा गया है। मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन में बदलाव ने कीमतों को ऊपर पहुंचाने में भूमिका निभाई है।

खुदरा कीमतों पर पड़ेगा असर

बाजार में आमतौर पर खुदरा चीनी कीमतें एक्स-मिल कीमतों में बदलाव का अनुसरण करती हैं। ऐसे में अगर मिल स्तर पर कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को भी महंगी चीनी खरीदनी पड़ सकती है।

हालांकि खुदरा बाजार में कीमतों का असर पहुंचने में कुछ समय लग सकता है, क्योंकि इसमें परिवहन, भंडारण और वितरण लागत भी शामिल होती है।

सरकार और बाजार की नजर उत्पादन पर

चीनी उद्योग से जुड़े लोगों की नजर अब मानसून की प्रगति और गन्ने की फसल की स्थिति पर है। अगर बारिश सामान्य रहती है और उत्पादन बेहतर होता है तो कीमतों में स्थिरता आ सकती है।

वहीं, अगर उत्पादन में कमी की आशंका बढ़ती है तो आने वाले महीनों में चीनी बाजार पर दबाव बना रह सकता है।

किसानों और मिलों के लिए अहम समय

चीनी की बढ़ती कीमतों का असर गन्ना किसानों और चीनी मिलों दोनों पर पड़ता है। किसानों के लिए बेहतर कीमतें आय बढ़ाने में मदद कर सकती हैं, जबकि मिलों को भी बिक्री से फायदा मिल सकता है।

हालांकि उपभोक्ताओं के लिए महंगी चीनी चिंता का विषय बन सकती है। आने वाले समय में मानसून, उत्पादन अनुमान और सरकारी नीतियां चीनी बाजार की दिशा तय करेंगी।

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