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निफ्टी 50 से आगे निकले छोटे शेयर, माइक्रोकैप इंडेक्स ने दिया 37% से ज्यादा रिटर्न
Ashish verma
4 Oct 2026 3:33 PM IST

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बिज़नेस Business : शेयर बाजार में चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर के दौरान निवेशकों को अलग-अलग सेगमेंट में बेहद अलग तस्वीर देखने को मिली। जहां बाजार के प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 की चाल सुस्त रही और इसमें 1 प्रतिशत से भी कम की बढ़त दर्ज की गई, वहीं स्मॉलकैप, मिडकैप और माइक्रोकैप शेयरों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया। खास तौर पर माइक्रोकैप शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है।
आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से सितंबर की अवधि में निफ्टी माइक्रोकैप 250 इंडेक्स ने 37 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया। इस प्रदर्शन के साथ माइक्रोकैप सेगमेंट ने निफ्टी 50, मिडकैप और स्मॉलकैप को काफी पीछे छोड़ दिया। यानी जिन निवेशकों ने इस अवधि में छोटे आकार की कंपनियों पर दांव लगाया, उन्हें बड़ी कंपनियों की तुलना में कहीं ज्यादा रिटर्न मिला।
निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स का प्रदर्शन भी मजबूत रहा। पहली छमाही में इस इंडेक्स ने करीब 25 प्रतिशत का रिटर्न दिया। स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने और कई शेयरों में आई तेज बढ़त का असर पूरे इंडेक्स पर दिखाई दिया। निफ्टी 50 के मुकाबले स्मॉलकैप इंडेक्स का प्रदर्शन कई गुना बेहतर रहा।
वहीं निफ्टी मिडकैप 150 इंडेक्स भी निवेशकों को अच्छा रिटर्न देने में सफल रहा। अप्रैल से सितंबर के बीच इसमें 12.54 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। हालांकि इसका रिटर्न स्मॉलकैप और माइक्रोकैप इंडेक्स से कम रहा, लेकिन निफ्टी 50 की तुलना में इसका प्रदर्शन काफी मजबूत रहा।
सबसे दिलचस्प तस्वीर निफ्टी 50 की रही। देश की प्रमुख बड़ी कंपनियों को ट्रैक करने वाले इस इंडेक्स में पहली छमाही के दौरान 1 प्रतिशत से भी कम की तेजी दर्ज की गई। ऐसे में बाजार के भीतर साफ तौर पर एक बड़ा अंतर देखने को मिला। लार्जकैप शेयरों की तुलना में निवेशकों की दिलचस्पी मिडकैप, स्मॉलकैप और माइक्रोकैप कंपनियों में ज्यादा दिखाई दी।
यदि रिटर्न के आधार पर इन चार इंडेक्स की तुलना की जाए तो निफ्टी माइक्रोकैप 250 करीब 37 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद निफ्टी स्मॉलकैप 250 ने करीब 25 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप 150 ने 12.54 प्रतिशत का रिटर्न दिया। इसके मुकाबले निफ्टी 50 की बढ़त 1 प्रतिशत से भी कम रही।
छोटी कंपनियों के शेयरों में तेज तेजी निवेशकों के लिए आकर्षक जरूर रही है, लेकिन इनके साथ जोखिम भी अपेक्षाकृत ज्यादा रहता है। माइक्रोकैप और स्मॉलकैप शेयरों में कीमतों का उतार-चढ़ाव बड़ी कंपनियों के मुकाबले अधिक हो सकता है। तेजी के दौर में इनमें बड़ा रिटर्न दिखाई देता है, लेकिन बाजार का रुख बदलने पर इनमें तेज गिरावट का जोखिम भी बना रहता है।
इसलिए केवल पिछला रिटर्न देखकर किसी शेयर या इंडेक्स में निवेश का फैसला करना उचित नहीं माना जाता। निवेशकों के लिए कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार, वैल्यूएशन, कर्ज, मुनाफे की क्षमता और भविष्य की संभावनाओं को समझना भी जरूरी है। खासकर माइक्रोकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में निवेश करते समय जोखिम क्षमता का ध्यान रखना महत्वपूर्ण होता है।
फिलहाल पहली छमाही के आंकड़े यह दिखाते हैं कि बाजार की असली तेजी बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। निफ्टी 50 जहां मामूली बढ़त के साथ सुस्त रहा, वहीं छोटे शेयरों ने निवेशकों को बड़ा रिटर्न दिया। माइक्रोकैप 250 का 37 प्रतिशत से अधिक और स्मॉलकैप 250 का करीब 25 प्रतिशत रिटर्न इस अवधि की सबसे बड़ी बाजार गतिविधियों में शामिल रहा।
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