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मुंबई में ठाकरे भाइयों का शक्ति प्रदर्शन, ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग क्यों?
jantaserishta.com
4 Oct 2026 3:32 PM IST

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मुंबई: मुंबई में रविवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक साथ नजर आए। दोनों नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस मार्च में हजारों समर्थकों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। प्रदर्शन की शुरुआत मेट्रो स्टेशन के पास से हुई और मार्च महानगरपालिका भवन की ओर बढ़ा। दोनों नेताओं की एकजुटता को महाराष्ट्र की राजनीति में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।
उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। दोनों नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची तैयार करने और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए, ताकि लोगों का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा बना रहे।
राज ठाकरे ने SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल
प्रदर्शन के दौरान राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने मांग की कि राज्य में इस प्रक्रिया को रद्द किया जाए। राज ठाकरे ने सवाल उठाया कि मतदाता सूची में इतने बड़े बदलाव क्यों किए जा रहे हैं और जिन लोगों के नाम हटाए जाने की बात कही जा रही है, वे कौन हैं।
राज ठाकरे ने यह भी कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति से निजी दुश्मनी के कारण नहीं है। उनके मुताबिक, सरकार बनाने का फैसला जनता और मतदाताओं का होना चाहिए, न कि चुनाव आयोग का। उन्होंने चुनावी व्यवस्था में निष्पक्षता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।
उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग की नियुक्ति पर उठाई आपत्ति
उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि देशभर में बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु का भी जिक्र करते हुए मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए।
उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से संबंधित व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में विपक्ष और अन्य संवैधानिक पदों की भूमिका महत्वपूर्ण होनी चाहिए। उनके आरोपों का केंद्र चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और उसकी कार्यप्रणाली रही।
चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को लेकर भी चर्चा
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद के बीच चुनाव आयोग के भीतर SIR से संबंधित फैसलों पर कथित असहमतियों की खबरें भी चर्चा में हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कुछ फैसलों तथा आदेशों पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में ऐसे मामलों की संख्या कम से कम 14 बताई गई है।
इन दावों के बाद विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों और रिपोर्ट में बताए गए घटनाक्रम को स्वतंत्र रूप से समझना जरूरी है। चुनाव आयोग की ओर से संबंधित मुद्दों पर दिए गए आधिकारिक स्पष्टीकरण को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन की तैयारी
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन का मुद्दा मुंबई तक सीमित नहीं है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन करने की घोषणा की है। उनके अनुसार, आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से किया जाएगा और महात्मा गांधी के बताए रास्ते पर चलने की बात कही गई है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित आरोपों पर चुनाव आयोग क्या स्पष्टीकरण देता है और आगे इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की रणनीति क्या रहती है।
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