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SBI ग्राहकों का डेटा लीक, बैंक ने की पुष्टि

Rajeshwari Nishad
21 Oct 2026 6:03 PM IST
SBI ग्राहकों का डेटा लीक, बैंक ने की पुष्टि
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नई दिल्ली: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ग्राहकों के डेटा की सुरक्षा को लेकर एक अहम मामला सामने आया है। बैंक ने स्वीकार किया है कि डेटा लीक की घटना में उसके 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड प्रभावित हुए हैं। सामने आई जानकारी के अनुसार, प्रभावित रिकॉर्ड में ग्राहकों के नाम, जेंडर और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर जैसी व्यक्तिगत जानकारियां शामिल हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक ने जांच शुरू कर दी है और जरूरी सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है और साइबर अपराधी वित्तीय संस्थानों के ग्राहकों की निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश करते रहते हैं। ग्राहकों का डेटा लीक होने से पहचान की चोरी, फर्जी कॉल, धोखाधड़ी वाले संदेश और ऑनलाइन ठगी का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह पुष्टि नहीं हुई है कि इस घटना के कारण किसी ग्राहक के खाते से पैसे निकाले गए हैं या बैंकिंग लेनदेन प्रभावित हुए हैं।
SBI ने 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड प्रभावित होने की बात मानी
भारतीय स्टेट बैंक देश के सबसे बड़े सरकारी बैंकों में शामिल है। ऐसे में उसके ग्राहकों की जानकारी से जुड़ी किसी भी सुरक्षा घटना को गंभीरता से देखा जाता है। बैंक के अनुसार, डेटा लीक की घटना में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड प्रभावित हुए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रभावित जानकारी में ग्राहकों के नाम, जेंडर और पंजीकृत मोबाइल नंबर शामिल हैं। इस तरह की जानकारी अपने आप में बैंक खाते तक पहुंच देने के लिए पर्याप्त नहीं होती, लेकिन साइबर अपराधी इसका इस्तेमाल ग्राहकों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर, ठग किसी ग्राहक का नाम और मोबाइल नंबर जानकर बैंक अधिकारी बनकर फोन कर सकते हैं। वे खाते में समस्या, केवाईसी अपडेट, कार्ड ब्लॉक होने या किसी संदिग्ध लेनदेन का डर दिखाकर संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।
इसी वजह से डेटा लीक की घटना के बाद ग्राहकों के लिए सतर्क रहना जरूरी है। हालांकि, बैंक के प्रभावित रिकॉर्ड की संख्या और हैकर समूह के दावों को अलग-अलग समझना चाहिए, क्योंकि दोनों के आंकड़े समान होना जरूरी नहीं है।
हैकर समूह ने लाखों रिकॉर्ड हासिल करने का किया था दावा
इस मामले में सीरियसिम नाम के एक हैकर समूह का भी जिक्र सामने आया है। बताया गया है कि समूह ने एसबीआई से जुड़े लाखों गोपनीय रिकॉर्ड और संवेदनशील दस्तावेज हासिल करने का दावा किया था।
दावे के मुताबिक, चोरी किए गए डेटा में ग्राहकों के नाम और पते के अलावा लोन आवेदन तथा खाता खोलने से संबंधित दस्तावेज शामिल हो सकते हैं। हालांकि, हैकर समूह की ओर से किए गए दावे और बैंक द्वारा स्वीकार किए गए 3,897 प्रभावित रिकॉर्ड के बीच अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।
किसी साइबर अपराधी समूह का दावा अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं होता कि बताए गए सभी रिकॉर्ड वास्तव में हासिल किए गए हैं या उनकी संख्या सही है। इसलिए डेटा की वास्तविक मात्रा, लीक के स्रोत और संवेदनशील दस्तावेजों के प्रभावित होने की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही की जानी चाहिए।
बैंक की ओर से जांच शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि डेटा किस माध्यम से लीक हुआ, किन प्रणालियों या रिकॉर्ड पर असर पड़ा और क्या किसी अनधिकृत व्यक्ति ने जानकारी तक पहुंच बनाई थी।
ग्राहकों को किस तरह का खतरा हो सकता है?
नाम और मोबाइल नंबर जैसी जानकारी लीक होने के बाद साइबर ठग इसका इस्तेमाल सोशल इंजीनियरिंग यानी लोगों को धोखे में लेकर जानकारी हासिल करने के लिए कर सकते हैं। वे खुद को बैंक कर्मचारी, केवाईसी अधिकारी या किसी सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर ग्राहकों से संपर्क कर सकते हैं।
ऐसे मामलों में ठग ग्राहकों से ओटीपी, एटीएम या डेबिट कार्ड का पिन, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड और अन्य
गोपनीय
जानकारी मांग सकते हैं। कुछ मामलों में फर्जी लिंक भेजकर लोगों को ऐसी वेबसाइट पर ले जाया जाता है, जो असली बैंक की वेबसाइट जैसी दिखाई देती है।
यदि लीक हुए डेटा में लोन आवेदन या खाता खोलने से जुड़े दस्तावेज भी शामिल हों, तो संभावित जोखिम अधिक गंभीर हो सकता है। ऐसे दस्तावेजों में व्यक्ति की पहचान और वित्तीय स्थिति से संबंधित जानकारी हो सकती है। हालांकि, इस मामले में इन सभी दस्तावेजों के लीक होने की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
SBI ग्राहकों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
डेटा लीक की खबर के बाद ग्राहकों को घबराने के बजाय कुछ जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिए।
1. ओटीपी और पासवर्ड साझा न करें: बैंक कर्मचारी होने का दावा करने वाला कोई भी व्यक्ति फोन या संदेश पर ओटीपी, पिन या इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड मांगे, तो जानकारी साझा न करें।
2. संदिग्ध लिंक से बचें: एसएमएस, ईमेल या सोशल मीडिया पर आए अनजान लिंक के जरिए बैंकिंग खाते में लॉगिन करने से बचें। बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का ही इस्तेमाल करें।
3. खाते के लेनदेन पर नजर रखें: बैंक खाते और कार्ड से जुड़े संदेशों को ध्यान से देखें। कोई अनजान या संदिग्ध लेनदेन दिखाई देने पर तुरंत बैंक को सूचित करें।
4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: कोई व्यक्ति डेटा लीक का हवाला देकर खाते को सुरक्षित करने, पैसे ट्रांसफर करने या केवाईसी पूरा करने के नाम पर दबाव बनाए, तो उस पर भरोसा न करें।
5. आधिकारिक माध्यम से संपर्क करें: किसी भी संदेह की स्थिति में SBI की आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित ग्राहक सेवा माध्यम से जानकारी लें। ठगी होने पर तुरंत बैंक को सूचित करें और भारत के साइबर अपराध पोर्टल या हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से शिकायत दर्ज कराएं।
बैंक ने शुरू की जांच
SBI का कहना है कि वह घटना से जुड़े जरूरी सुरक्षा उपाय कर रहा है और डेटा लीक की जांच शुरू कर दी गई है। जांच के परिणाम सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि जानकारी किस तरह प्रभावित हुई और ग्राहकों की सुरक्षा के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल ग्राहकों को किसी भी अनजान कॉल या संदेश पर भरोसा करने से बचना चाहिए। केवल नाम और मोबाइल नंबर जैसी जानकारी जानने वाला व्यक्ति भी भरोसा जीतने की कोशिश कर सकता है, इसलिए किसी के साथ गोपनीय बैंकिंग विवरण साझा नहीं करना चाहिए।
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