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नई दिल्ली। ब्याज दरों में लगातार बनी अनिश्चितता का असर क्रेडिट फंड में आने वाले निवेश पर पड़ सकता है। BofA सिक्योरिटीज की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, दरों में बढ़ती अस्थिरता निवेशकों को जोखिम वाली संपत्तियों से दूरी बनाने के लिए मजबूर कर रही है। ऐसे माहौल में क्रेडिट फंड में निवेश की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा समय में ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव का माहौल क्रेडिट फंड के लिए अनुकूल नहीं दिख रहा है। दरों में ज्यादा बदलाव के कारण निवेशक अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्पों जैसे सरकारी डेट इंस्ट्रूमेंट्स की ओर रुख कर सकते हैं। इससे क्रेडिट फंड में निवेश प्रवाह प्रभावित होने की आशंका है।
BofA सिक्योरिटीज ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि SMOVEU3M इंडेक्स पर अस्थिरता लगभग 90 पॉइंट के स्तर पर बनी हुई है। यह स्थिति बताती है कि ब्याज दरों के बाजार में अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जब ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव बढ़ता है तो निवेशक ज्यादा जोखिम वाले फंड में पैसा लगाने से बचने लगते हैं।SMOVEU3M इंडेक्स ICE BofAML स्वैप MOVE 3-मंथ इंडेक्स है। यह तीन महीने के ओवर-द-काउंटर (OTC) ब्याज दर स्वैप से जुड़ी बाजार में अनुमानित अस्थिरता को मापता है। इस इंडेक्स के जरिए बाजार में ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंता और संभावित उतार-चढ़ाव का अंदाजा लगाया जाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्याज दर बाजार में बढ़ती चिंता का असर बॉन्ड बाजार में निवेश प्रवाह पर सीधे तौर पर दिखाई दे रहा है। समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान सरकारी बॉन्ड, मनी मार्केट और हाई-यील्ड फंड से निवेश की निकासी दर्ज की गई।BofA सिक्योरिटीज के अनुसार, निवेशक मौजूदा परिस्थितियों में ज्यादा सुरक्षित विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ब्याज दरों में अनिश्चितता रहने पर बॉन्ड बाजार में भी निवेशकों का रुख सतर्क हो जाता है। इससे क्रेडिट फंड जैसे उत्पादों में निवेश कम हो सकता है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दो सप्ताह तक लगातार निकासी के बाद हाई-ग्रेड फंड में दोबारा निवेश आना शुरू हुआ है। इसके बावजूद BofA सिक्योरिटीज ने इस रिकवरी को लेकर सावधानी बरतने की बात कही है।रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ब्याज दरों में अस्थिरता लंबे समय तक बनी रहती है तो हाई-ग्रेड फंड में निवेश का यह सुधार जारी रहना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। निवेशकों का भरोसा बाजार की स्थिरता और ब्याज दरों की दिशा पर निर्भर करेगा।
हाई-ग्रेड फंड में निवेश का रुझान भी अलग-अलग अवधि के फंड में अलग रहा। मिड-टर्म और लॉन्ग-टर्म फंड में निवेश आया, जबकि शॉर्ट-टर्म फंड से निकासी दर्ज की गई। इस वजह से लगातार छह सप्ताह तक चलने वाला निवेश का सिलसिला खत्म हो गया।ब्याज दरों में बदलाव का सीधा असर बॉन्ड और क्रेडिट मार्केट पर पड़ता है। जब दरें तेजी से बदलती हैं तो निवेशकों के लिए भविष्य के रिटर्न का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में वे ज्यादा स्थिर और कम जोखिम वाले निवेश विकल्पों को प्राथमिकता देने लगते हैं।
क्रेडिट फंड आमतौर पर डेट सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं और इनमें जोखिम का स्तर सरकारी बॉन्ड की तुलना में अधिक हो सकता है। इसलिए बाजार में अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक इन फंडों से दूरी बना सकते हैं।BofA सिक्योरिटीज की रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब वैश्विक वित्तीय बाजार ब्याज दरों की दिशा को लेकर सतर्क हैं। केंद्रीय बैंकों की नीतियां, महंगाई के आंकड़े और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े संकेत ब्याज दरों के बाजार को प्रभावित करते हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, ब्याज दरों में स्थिरता आने पर जोखिम वाली संपत्तियों में निवेशकों की रुचि फिर बढ़ सकती है। लेकिन जब तक बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहता है, निवेशक सुरक्षित विकल्पों को प्राथमिकता दे सकते हैं।
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि बॉन्ड बाजार में निवेश का रुझान केवल मौजूदा दरों पर निर्भर नहीं करता, बल्कि भविष्य की ब्याज दरों की उम्मीदों से भी प्रभावित होता है।कुल मिलाकर BofA सिक्योरिटीज की रिपोर्ट ने संकेत दिया है कि ब्याज दरों में लगातार अनिश्चितता क्रेडिट फंड के लिए चुनौती बनी हुई है। बढ़ती अस्थिरता के कारण निवेशक जोखिम वाले विकल्पों को लेकर सतर्क हो सकते हैं और सरकारी डेट जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। हालांकि, ब्याज दरों की स्थिति में सुधार आने पर निवेश प्रवाह में बदलाव देखने को मिल सकता है।
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