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फिटमेंट फैक्टर 4 की मांग सैलरी में हो सकती है बड़ी बढ़ोतरी

Ratna Netam
27 Sept 2026 4:24 PM IST
फिटमेंट फैक्टर 4 की मांग सैलरी में हो सकती है बड़ी बढ़ोतरी
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बिजनेस : केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कर्मचारियों की सैलरी में संभावित बढ़ोतरी के बीच फिटमेंट फैक्टर सबसे अहम मुद्दों में से एक बना हुआ है। कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर को 4 तक रखने और न्यूनतम मूल वेतन को बढ़ाकर 72,000 रुपये करने की मांग चर्चा में है। अगर इस स्तर के फिटमेंट फैक्टर को स्वीकार किया जाता है तो केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि अंतिम वेतन, फिटमेंट फैक्टर और अन्य लाभों को लेकर आधिकारिक फैसला सरकार और वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही होगा।7वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये तय किया गया था। अब 8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों की सबसे बड़ी उम्मीद इसी न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी से जुड़ी हुई है। फिटमेंट फैक्टर-4 की मांग को सरल तरीके से समझें तो मौजूदा 18,000 रुपये के न्यूनतम मूल वेतन को चार से गुणा करने पर यह रकम 72,000 रुपये होती है। इसी गणना के आधार पर न्यूनतम वेतन 72,000 रुपये किए जाने की मांग सामने आ रही है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि प्रत्येक कर्मचारी का वेतन सीधे चार गुना हो जाएगा। नया वेतन ढांचा तैयार करते समय कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। इसमें मौजूदा बेसिक पे, महंगाई भत्ता, वेतन स्तर, सेवा की अवधि, भत्ते और आयोग की अंतिम सिफारिशें शामिल हो सकती हैं। इसलिए केवल फिटमेंट फैक्टर के आधार पर किसी कर्मचारी की अंतिम इन-हैंड सैलरी तय नहीं की जा सकती।केंद्रीय कर्मचारियों के लिए फिटमेंट फैक्टर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा असर संशोधित बेसिक पे की गणना पर पड़ता है। बेसिक पे बढ़ने के बाद उससे जुड़े कई दूसरे भत्तों और लाभों पर भी प्रभाव पड़ सकता है। यही वजह है कि कर्मचारी संगठन अधिक फिटमेंट फैक्टर की मांग करते रहे हैं। महंगाई और रोजमर्रा के खर्च में बढ़ोतरी को देखते हुए कर्मचारियों की अपेक्षा है कि नए वेतन आयोग में उनकी वास्तविक क्रय शक्ति का भी ध्यान रखा जाए।
8वें वेतन आयोग का असर केवल मौजूदा कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। इसकी सिफारिशों से केंद्र सरकार के पेंशनर्स को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। वेतन संरचना में बदलाव के साथ पेंशन के निर्धारण और उससे जुड़े लाभों पर भी प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में लाखों कर्मचारी और पेंशनर्स आयोग से जुड़े हर अपडेट पर नजर बनाए हुए हैं।सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि आखिर नया फिटमेंट फैक्टर कितना होगा। अलग-अलग स्तरों पर कई आंकड़ों को लेकर चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन कर्मचारियों की मांग और अंतिम सरकारी निर्णय में अंतर हो सकता है। फिटमेंट फैक्टर-4 और 72,000 रुपये न्यूनतम वेतन को फिलहाल मांग के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इसे सरकार की ओर से तय अंतिम वेतन मान लेना सही नहीं होगा।
वेतन आयोग अपनी सिफारिशें तैयार करते समय कर्मचारियों के वेतन के अलावा देश की आर्थिक स्थिति, सरकारी वित्त पर पड़ने वाले प्रभाव, महंगाई, पेंशन दायित्व और विभिन्न कर्मचारी वर्गों की जरूरतों जैसे पहलुओं का अध्ययन करता है। इसके बाद रिपोर्ट सरकार के सामने रखी जाती है। सरकार रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद यह तय करती है कि किन सिफारिशों को स्वीकार किया जाएगा और उन्हें किस रूप में लागू किया जाएगा।अगर न्यूनतम बेसिक पे में बड़ी बढ़ोतरी होती है तो इसका असर कर्मचारियों के मासिक वेतन के साथ भविष्य में मिलने वाले कई वित्तीय लाभों पर भी दिखाई दे सकता है। इसके अलावा वेतन स्तरों के बीच अंतर और पे मैट्रिक्स की संरचना भी महत्वपूर्ण होगी। नए आयोग में मौजूदा पे मैट्रिक्स में बदलाव होगा या कोई नई व्यवस्था लाई जाएगी, इसे लेकर भी कर्मचारियों की दिलचस्पी बनी हुई है।
कर्मचारियों के बीच 72,000 रुपये न्यूनतम वेतन का आंकड़ा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मौजूदा 18,000 रुपये के बेसिक पे के मुकाबले यह काफी बड़ी वृद्धि होगी। लेकिन इस गणना को सीधे संभावित सैलरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अंतिम आंकड़ा आयोग की सिफारिश और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को 8वें वेतन आयोग की आगे की प्रक्रिया और आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार करना होगा। फिटमेंट फैक्टर-4 की मांग स्वीकार होती है या आयोग किसी अलग फॉर्मूले की सिफारिश करता है, इस पर सभी की नजर रहेगी। जब तक आधिकारिक रूप से नया फिटमेंट फैक्टर और संशोधित वेतन संरचना घोषित नहीं होती, तब तक 72,000 रुपये न्यूनतम वेतन को एक मांग और संभावित गणना के रूप में ही समझना उचित होगा।
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