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शेयर बाजार: अगले हफ्ते इन बड़े कारकों पर टिकी रहेगी निवेशकों की नजर

Tara Tandi
27 Sept 2026 1:40 PM IST
शेयर बाजार: अगले हफ्ते इन बड़े कारकों पर टिकी रहेगी निवेशकों की नजर
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मुंबई: लगातार सातवें हफ़्ते गिरावट के साथ बंद होने के बाद, आने वाले हफ़्ते में भारतीय शेयर बाज़ार की चाल कच्चे तेल की कीमतों, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड, विदेशी फंड के प्रवाह, मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिका के अहम आर्थिक डेटा पर निर्भर करेगी।
पूरे हफ़्ते बाज़ार का मूड सुस्त रहा और शुरुआती सेशन में इंडेक्स एक सीमित दायरे में कारोबार करते रहे। हालांकि, गुरुवार को हुई ज़बरदस्त बिकवाली ने निवेशकों के भरोसे को कमज़ोर किया, लेकिन शुक्रवार को कुछ चुनिंदा ब्लू-चिप शेयरों में 'वैल्यू बाइंग' (सस्ते भाव पर खरीदारी) से बाज़ार को उबरने में मदद मिली।
शुक्रवार को सेंसेक्स 315.20 अंक या 0.43% बढ़कर 73,895.74 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 77.40 अंक या 0.34% की बढ़त के साथ 23,140.50 पर बंद हुआ। हालिया गिरावट के बाद कई लार्ज-कैप शेयरों के आकर्षक वैल्यूएशन पर आने से बैंकिंग, ऑयल एंड गैस और ऑटोमोबाइल शेयरों में खरीदारी देखी गई।
नए हफ़्ते में, कच्चे तेल की कीमतें इक्विटी बाज़ार के लिए सबसे अहम कारकों में से एक बनी रहेंगी। ब्रेंट क्रूड के $100 प्रति बैरल के स्तर से ऊपर बने रहने के कारण, महंगाई के दबाव, आयात की बढ़ती लागत और कॉर्पोरेट मार्जिन पर दबाव को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
हालांकि, तेल की कीमतों में हालिया नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली है। बाज़ार के लोग कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर बारीकी से नज़र रखेंगे क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव में कोई भी नई बढ़ोतरी कीमतों को फिर से बढ़ा सकती है।
अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के हालिया नीतिगत फ़ैसले के बाद ग्लोबल बॉन्ड यील्ड पर भी बारीकी से नज़र रखी जाएगी। बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और अमेरिकी डॉलर के मज़बूत होने से जोखिम लेने की क्षमता कम हो सकती है और भारत समेत उभरते बाज़ारों से पूंजी की निकासी हो सकती है। इसके उलट, यील्ड में कोई भी कमी इक्विटी को सहारा दे सकती है और निवेशकों के मूड को बेहतर बना सकती है।
अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे टकराव से जुड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी निवेशकों की नज़र में हैं। खबरों के मुताबिक, ईरान ने प्रतिबंधों में ढील और व्यापक युद्धविराम उपायों के बदले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सामान्य शिपिंग गतिविधियों को बहाल करने के लिए सात-दिवसीय रूपरेखा का प्रस्ताव दिया है। तनाव कम करने की दिशा में कोई भी प्रगति एनर्जी मार्केट को स्थिर करने में मदद कर सकती है, जबकि फिर से तनाव बढ़ने से ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
हाल के हफ्तों में लगातार बिकवाली के दबाव के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधि अहम बनी रहेगी। जानकारों का मानना ​​है कि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की मज़बूत भागीदारी और 'ओवरसोल्ड' मार्केट की स्थिति से बीच-बीच में रिकवरी में मदद मिल सकती है।
हालांकि, लंबे समय तक रिकवरी कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता, ग्लोबल यील्ड में कमी, जियोपॉलिटिकल हालात में सुधार और विदेशी फंड के बाहर जाने की रफ़्तार कम होने पर निर्भर करेगी।
निवेशक अगले हफ़्ते आने वाले अहम अमेरिकी आर्थिक डेटा पर भी बारीकी से नज़र रखेंगे। उम्मीद है कि यह डेटा दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की स्थिति, महंगाई के ट्रेंड और ब्याज दरों की संभावित चाल के बारे में और संकेत देगा। इसके नतीजों का असर ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट और दुनिया भर के इक्विटी मार्केट में फंड के प्रवाह पर पड़ सकता है।
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