
Business बिजनेस : देश की सड़कों पर जल्द ही हाइड्रोजन से चलने वाली बसें और ट्रक दौड़ते नजर आ सकते हैं। केंद्र सरकार इस दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है और हाइड्रोजन आधारित वाहनों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी कर रही है।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को इस योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार देश में स्वच्छ और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने के लिए हाइड्रोजन फ्यूल पर आधारित परिवहन प्रणाली को आगे बढ़ा रही है। इसी कड़ी में देश की 10 प्रमुख सड़कों पर हाइड्रोजन से चलने वाली बसें और ट्रक चलाए जाएंगे।
इस पायलट प्रोजेक्ट का उद्देश्य हाइड्रोजन ईंधन की व्यवहारिकता, सुरक्षा, लागत और संचालन क्षमता का परीक्षण करना है। सरकार का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल होता है तो भविष्य में इसे बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है। इससे न केवल पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम होगी, बल्कि प्रदूषण में भी भारी कमी आएगी।
नितिन गडकरी लंबे समय से वैकल्पिक ईंधन और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की वकालत करते रहे हैं। उन्होंने कहा है कि भारत को ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए स्वच्छ ईंधन की ओर तेजी से बढ़ना होगा। हाइड्रोजन फ्यूल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाले वाहन कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य कर सकते हैं, जिससे वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। हालांकि, इसके उत्पादन, भंडारण और वितरण को लेकर अभी भी कई तकनीकी चुनौतियां बनी हुई हैं।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जिन 10 सड़कों पर यह प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा, वहां हाइड्रोजन बसों और ट्रकों के संचालन की निगरानी की जाएगी। इसके साथ ही सुरक्षा मानकों, इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों और रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
भारत में तेजी से बढ़ते परिवहन क्षेत्र और ऊर्जा की बढ़ती मांग को देखते हुए यह पहल बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो आने वाले वर्षों में देश के बड़े शहरों और हाईवे नेटवर्क पर हाइड्रोजन वाहनों की संख्या बढ़ सकती है।
सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में भारत को ग्रीन फ्यूल आधारित परिवहन प्रणाली की ओर ले जाया जाए, जिससे न केवल प्रदूषण कम हो बल्कि ऊर्जा के नए विकल्प भी विकसित हो सकें।





