
Business बिजनेस: भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रहती है, खासकर जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इसी बीच केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश में ईंधन कीमतों को लेकर बड़ा बयान दिया है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जो बढ़ोतरी हुई है, वह दुनिया के अधिकांश देशों की तुलना में काफी कम है। उनके अनुसार, भारत उन 193 देशों में शामिल है, जहां ईंधन की कीमतों में सबसे कम वृद्धि दर्ज की गई है।
मंत्री ने यह भी बताया कि भारत की ऊर्जा नीति दीर्घकालिक रणनीति पर आधारित है, जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ को कम करना और ईंधन की कीमतों को स्थिर बनाए रखना है। सरकार की ओर से समय-समय पर किए गए कर समायोजन और आपूर्ति प्रबंधन के फैसलों ने भी कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद की है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में जब भी कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो उसका असर सभी देशों पर पड़ता है, लेकिन भारत ने अपनी नीतियों के जरिए इस प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया है। इसके लिए सरकार ने कई बार केंद्रीय उत्पाद शुल्क में बदलाव, रणनीतिक भंडार का उपयोग और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की बड़ी आबादी और ईंधन की उच्च मांग को देखते हुए कीमतों में स्थिरता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। इसके बावजूद सरकार का यह दावा कि भारत में ईंधन कीमतों में सबसे कम वृद्धि हुई है, देश की ऊर्जा प्रबंधन क्षमता को दर्शाता है।
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय संकटों के समय भी घरेलू बाजार में स्थिरता बनाए रखना किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होता है। भारत ने इस दिशा में संतुलित नीति अपनाकर उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की है।
हरदीप सिंह पुरी के बयान के बाद यह चर्चा फिर तेज हो गई है कि भारत किस तरह ऊर्जा सुरक्षा और मूल्य स्थिरता के बीच संतुलन बना रहा है। सरकार का कहना है कि आने वाले समय में भी इसी रणनीति के तहत ईंधन बाजार को नियंत्रित करने पर ध्यान दिया जाएगा।





