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भारतीय IT कंपनियों पर PERM की कार्रवाई, 8 कंपनियां सस्पेंड

Ashish verma
9 Oct 2026 2:13 PM IST
भारतीय IT कंपनियों पर PERM की कार्रवाई, 8 कंपनियां सस्पेंड
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PERM action : अमेरिका में स्थायी निवास की उम्मीद रखने वाले भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी प्रशासन ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक्नोलॉजीज समेत आठ प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम यानी PERM से निलंबित करने की घोषणा की है। यह कार्यक्रम रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। फैसले का सीधा संबंध प्रभावित कंपनियों के जरिए विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से है।
निलंबित कंपनियों की सूची में टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब शामिल हैं। अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सॉन्डरलिंग ने छह बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी दी। माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को भी इस कार्यक्रम से निलंबित किया गया है। इसलिए इसे केवल भारतीय कंपनियों के खिलाफ उठाया गया कदम कहना सही नहीं होगा; कार्रवाई के दायरे में अमेरिकी और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी कंपनियां भी हैं।
अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए इस्तेमाल होने वाली प्रक्रियाओं से अमेरिकी कामगारों के रोजगार के अवसर प्रभावित हुए हैं। प्रशासन ने कार्यक्रम के कथित दुरुपयोग और अमेरिकी कर्मचारियों के हितों का हवाला दिया है। हालांकि, इन आरोपों को कंपनियों के खिलाफ साबित निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कंपनियों पर अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को रखने और वेतन प्रभावित करने के आरोप लगाए, लेकिन उनके बयान में विशिष्ट साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए।
PERM को समझना इस फैसले का असर जानने के लिए जरूरी है। अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार, स्थायी श्रम प्रमाणन किसी नियोक्ता को विदेशी कर्मचारी को अमेरिका में स्थायी रोजगार देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति देता है। इसमें विभाग यह जांचता है कि संबंधित नौकरी के लिए पर्याप्त अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध, इच्छुक और योग्य हैं या नहीं। साथ ही यह सुनिश्चित करना होता है कि विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से समान काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन और कामकाज की परिस्थितियों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़े।
इस प्रक्रिया में आवेदन कर्मचारी खुद अपनी ओर से शुरू नहीं करता, बल्कि पात्र नियोक्ता उसकी ओर से आवेदन करता है। आवेदन से पहले संबंधित नौकरी के लिए निर्धारित प्रचलित वेतन की जानकारी लेना भी आवश्यक होता है। अधिकांश संबंधित रोजगार आधारित आव्रजन मामलों में श्रम प्रमाणन मिलने के बाद ही अगला आवेदन आगे बढ़ाया जाता है। इसीलिए नियोक्ता का PERM कार्यक्रम से निलंबन उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण बाधा बन सकता है, जिनकी स्थायी निवास प्रक्रिया इसी प्रमाणन पर निर्भर है।
फैसले से सबसे अधिक अनिश्चितता उन पेशेवरों के लिए पैदा हो सकती है, जिनके लिए प्रभावित कंपनी ने अभी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया शुरू नहीं की है। नियोक्ता के जरिए आवश्यक आवेदन आगे नहीं बढ़ पाने से स्थायी निवास की समयसीमा प्रभावित हो सकती है। पहले से लंबित मामलों के बारे में भी कर्मचारियों को अपने आवेदन की स्थिति और लागू निर्देशों की जानकारी लेनी होगी। नए और लंबित आवेदनों पर रोक की घोषणा के कारण सभी कर्मचारियों के मामलों को एक जैसी स्थिति में मानना उचित नहीं होगा।
इस कार्रवाई को मौजूदा एच-1बी वीजा के स्वतः रद्द होने के रूप में भी नहीं समझना चाहिए। PERM स्थायी निवास से जुड़ी प्रक्रिया है, जबकि एच-1बी अस्थायी रोजगार की अलग व्यवस्था है। निलंबन का तत्काल असर मुख्य रूप से प्रभावित नियोक्ताओं के जरिए ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया पर है। किसी कर्मचारी के अमेरिका में रहने या काम करने की स्थिति उसके मौजूदा वीजा, उसकी वैधता और व्यक्तिगत आव्रजन मामले पर निर्भर करेगी। केवल इस घोषणा के आधार पर सभी कर्मचारियों की नौकरी खत्म होने या तत्काल भारत लौटने का निष्कर्ष निकालना गलत होगा।
कंपनियों के कारोबार पर असर और कर्मचारियों की व्यक्तिगत परेशानी भी अलग विषय हैं। स्थायी निवास की योजना बना रहे कर्मचारी के लिए आवेदन में देरी महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन इससे पूरी कंपनी के अमेरिकी कारोबार पर समान स्तर का असर पड़ना जरूरी नहीं है। सामने आई जानकारी के अनुसार, टीसीएस ने अपनी कार्यबल रणनीति पर असर नहीं होने की बात कही है। विश्लेषकों ने भी भारतीय आईटी कंपनियों के लिए कारोबारी जोखिम सीमित बताया है। हालांकि, इसे प्रत्येक प्रभावित कर्मचारी की स्थिति सामान्य होने की गारंटी नहीं माना जा सकता।
आगे कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण जानकारी यह होगी कि उनकी कंपनी के जरिए आवेदन किस चरण में है और निलंबन से उस चरण पर क्या प्रभाव पड़ेगा। निलंबन की अवधि और प्रक्रिया बहाल होने की स्थिति स्पष्ट हुए बिना स्थायी निवास मिलने की नई समयसीमा बताना संभव नहीं है। फिलहाल इस फैसले ने प्रभावित कंपनियों के जरिए ग्रीन कार्ड की राह देख रहे पेशेवरों की अनिश्चितता बढ़ाई है। कंपनियों के लिए कारोबार की निरंतरता के साथ कर्मचारियों को उनके मामलों की स्पष्ट जानकारी देना भी
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