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दिल्ली के गंगा राम अस्पताल में 13 साल के बच्चे की सफल सर्जरी

Ratna Netam
9 Oct 2026 2:01 PM IST
दिल्ली के गंगा राम अस्पताल में 13 साल के बच्चे की सफल सर्जरी
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नई दिल्ली। दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में डॉक्टरों ने गंभीर मोटापे और उससे जुड़ी कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे 13 वर्षीय लड़के की सफल लैप्रोस्कोपिक स्लीव गैस्ट्रेक्टोमी सर्जरी की है। बच्चे का वजन लगातार बढ़ते हुए लगभग 186 किलोग्राम तक पहुंच गया था। अत्यधिक वजन के कारण उसे सांस लेने में परेशानी, जोड़ों और पीठ में दर्द, नींद में बाधा और स्लीप एपनिया जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। अस्पताल के लैप्रोस्कोपिक, लेजर और जनरल सर्जरी विभाग ने यह ऑपरेशन किया।बच्चे की कम उम्र और अत्यधिक वजन को देखते हुए यह मामला विशेष महत्व रखता है। किशोरावस्था में गंभीर मोटापा केवल शारीरिक गतिविधियों को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि इससे नींद, मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन से जुड़ी कई परेशानियां भी पैदा हो सकती हैं। इस मामले में भी बच्चे का बढ़ता वजन उसके स्वास्थ्य और सामान्य दिनचर्या पर असर डाल रहा था।
परिवार में भी रहा है मोटापे का इतिहास
बच्चे के परिवार में मोटापे का इतिहास रहा है। उसके माता-पिता दोनों पहले मोटापे की समस्या से परेशान थे। बाद में उन्होंने अपना वजन नियंत्रित करने के लिए बैरिएट्रिक सर्जरी करवाई थी। परिवार के इस चिकित्सा इतिहास से संकेत मिलता है कि बच्चे में मोटापा बढ़ने के पीछे केवल खानपान और जीवनशैली ही नहीं, बल्कि पारिवारिक और आनुवंशिक कारणों की भी संभावित भूमिका हो सकती है।हालांकि, किसी व्यक्ति में मोटापे के आनुवंशिक कारणों की पुष्टि के लिए चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी होता है। मोटापा एक जटिल स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें आनुवंशिक प्रवृत्ति, भोजन की आदतें, शारीरिक गतिविधियां, हार्मोन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियां भूमिका निभा सकती हैं।
लगातार बढ़ता गया वजन, 186 किलो तक पहुंचा
जानकारी के अनुसार, बच्चे का वजन पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ता गया। परिवार ने खानपान में बदलाव और जीवनशैली में सुधार के माध्यम से वजन कम करने की कोशिश की, लेकिन इन प्रयासों से पर्याप्त और लंबे समय तक वजन में कमी नहीं आ सकी।धीरे-धीरे बच्चे का वजन लगभग 186 किलोग्राम तक पहुंच गया। इतनी कम उम्र में अत्यधिक वजन के कारण उसे कई शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। वजन बढ़ने के साथ उसके लिए सामान्य गतिविधियां भी चुनौतीपूर्ण हो सकती थीं।गंभीर मोटापे के मामलों में शरीर के विभिन्न अंगों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। विशेष रूप से हड्डियों, जोड़ों, रीढ़ की हड्डी और श्वसन प्रणाली पर इसका असर देखने को मिलता है। यही वजह है कि अत्यधिक मोटापे से पीड़ित बच्चों और किशोरों का समय रहते चिकित्सकीय मूल्यांकन महत्वपूर्ण माना जाता है।
सांस लेने में तकलीफ और नींद में परेशानी
बच्चे को सांस लेने में कठिनाई हो रही थी। इसके अलावा उसे रात में तेज खर्राटे आने और नींद बार-बार टूटने की समस्या भी थी। वह स्लीप एपनिया से भी प्रभावित था।स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें सोते समय व्यक्ति की सांस बार-बार रुक सकती है या उसका प्रवाह बाधित हो सकता है। इसके कारण नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है और दिन में थकान, चिड़चिड़ापन तथा ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी समस्याएं हो सकती हैं।बच्चे में नींद संबंधी परेशानियों के साथ गुस्से से जुड़ी व्यवहार संबंधी समस्याएं भी सामने आई थीं। हालांकि, इन व्यवहार संबंधी समस्याओं का कोई एक निश्चित कारण उपलब्ध जानकारी से स्थापित नहीं होता।विशेषज्ञों के अनुसार, गंभीर मोटापे के साथ नींद संबंधी विकार होने पर बच्चे के समग्र स्वास्थ्य का मूल्यांकन करना आवश्यक होता है।
जोड़ों और पीठ के दर्द से भी था परेशान
अत्यधिक वजन के कारण बच्चे को जोड़ों और पीठ में दर्द की शिकायत भी थी। शरीर का वजन बढ़ने से घुटनों, कूल्हों और रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।बचपन और किशोरावस्था में लगातार दर्द की समस्या शारीरिक गतिविधियों में भागीदारी को प्रभावित कर सकती है। इससे नियमित व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली बनाए रखना भी मुश्किल हो सकता है।बच्चे की स्थिति में मोटापे के साथ कई स्वास्थ्य समस्याओं का एक साथ मौजूद होना उपचार की दृष्टि से महत्वपूर्ण था। परिवार की ओर से पहले किए गए प्रयासों के बावजूद वजन में स्थायी कमी नहीं होने के कारण सर्जरी का विकल्प अपनाया गया।
क्या है लैप्रोस्कोपिक स्लीव गैस्ट्रेक्टोमी सर्जरी?
लैप्रोस्कोपिक स्लीव गैस्ट्रेक्टोमी मोटापे के उपचार में इस्तेमाल होने वाली एक बैरिएट्रिक सर्जरी है। इस प्रक्रिया में पेट के आकार को छोटा किया जाता है, जिससे भोजन ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाती है।लैप्रोस्कोपिक तकनीक में पेट पर छोटे चीरे लगाकर विशेष उपकरणों और कैमरे की सहायता से ऑपरेशन किया जाता है। पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में कुछ मरीजों को इससे कम दर्द और अपेक्षाकृत जल्दी रिकवरी का लाभ मिल सकता है।हालांकि, यह एक बड़ी शल्य चिकित्सा प्रक्रिया है और इसके अपने जोखिम भी होते हैं। विशेष रूप से बच्चों और किशोरों में ऐसी सर्जरी का निर्णय उम्र, विकास, मोटापे की गंभीरता, संबंधित बीमारियों और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों का आकलन करने के बाद लिया जाता है।सर्जरी के बाद नियमित चिकित्सकीय निगरानी, पोषण संबंधी देखभाल, आवश्यक विटामिन और खनिजों की पूर्ति तथा जीवनशैली में बदलाव महत्वपूर्ण होते हैं।
कम उम्र में गंभीर मोटापा बना चिंता का विषय
बच्चों में गंभीर मोटापा एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चुनौती है। इससे टाइप-2 डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, फैटी लिवर, स्लीप एपनिया और हड्डियों तथा जोड़ों से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।हालांकि, हर मोटापे से प्रभावित बच्चे को सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती। अधिकांश मामलों में चिकित्सक सबसे पहले खानपान, शारीरिक गतिविधियों, व्यवहार संबंधी सहयोग और आवश्यकता के अनुसार अन्य उपचारों पर ध्यान देते हैं। चुनिंदा गंभीर मामलों में विशेषज्ञों की टीम बैरिएट्रिक सर्जरी पर विचार कर सकती है।सर गंगा राम अस्पताल में 13 वर्षीय बच्चे की सफल सर्जरी ऐसे ही एक गंभीर मामले को सामने लाती है, जिसमें अत्यधिक वजन के साथ कई स्वास्थ्य समस्याएं मौजूद थीं।उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऑपरेशन सफल रहा है। हालांकि, सर्जरी के बाद बच्चे के वजन में कितनी कमी आई है, उसकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति कैसी है और अस्पताल से छुट्टी कब मिली या मिलेगी, इसकी विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।यह मामला कम उम्र में गंभीर मोटापे की समय पर पहचान, विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखभाल और लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी निगरानी के महत्व को रेखांकित करता है।
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