व्यापार
मिडिल ईस्ट तनाव से तेल महंगा EIA ने बढ़ाया ब्रेंट का अनुमान
Ratna Netam
7 Oct 2026 4:12 PM IST

x
वॉशिंगटन। अमेरिकी एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) ने 2026 की चौथी तिमाही के लिए ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत का अनुमान बढ़ाकर औसतन **105 डॉलर प्रति बैरल** कर दिया है। यह पिछले महीने के अनुमान से 14 डॉलर प्रति बैरल अधिक है। एजेंसी ने इसके पीछे मिडिल ईस्ट में तेल सप्लाई से जुड़ी लगातार रुकावटों, ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों, वैश्विक इन्वेंट्री में कमी और डीजल बाजार में बनी तंगी को प्रमुख कारण बताया है।
EIA की अक्टूबर 2026 की शॉर्ट-टर्म एनर्जी आउटलुक रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट से तेल की आवाजाही चौथी तिमाही में भी सामान्य स्तर से नीचे रहने की संभावना है। हालांकि सितंबर में क्षेत्र में बंद पड़े उत्पादन की मात्रा मई में संघर्ष बढ़ने के बाद के उच्च स्तर से काफी नीचे आ चुकी थी। एजेंसी ने सितंबर के दौरान बंद उत्पादन का अनुमान लगभग 48 लाख बैरल प्रतिदिन लगाया है, जो अगस्त में 58 लाख बैरल प्रतिदिन और मई में करीब 1.09 करोड़ बैरल प्रतिदिन था।
EIA का अनुमान है कि चौथी तिमाही के दौरान मिडिल ईस्ट में औसतन करीब 45 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन प्रभावित रह सकता है। हालांकि उत्पादन और निर्यात धीरे-धीरे बढ़ने की उम्मीद भी जताई गई है। इसके लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से संगठित काफिलों की आवाजाही, वैकल्पिक पाइपलाइन और निर्यात मार्गों का इस्तेमाल तथा जहाज-से-जहाज तेल ट्रांसफर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
सितंबर में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत करीब **114 डॉलर प्रति बैरल** रही, जो अगस्त के मुकाबले 23 डॉलर अधिक थी। EIA के अनुसार, तेल बुनियादी ढांचे और टैंकरों पर बढ़े हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता तेज हुई और कीमतों में उछाल आया।
सबसे ज्यादा असर सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हुए हमलों से देखने को मिला। यह पाइपलाइन होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करते हुए रेड सी के यानबू पोर्ट तक कच्चा तेल पहुंचाने का अहम रास्ता है। EIA का अनुमान है कि हमलों से पहले इस मार्ग के जरिए रोजाना 50 लाख बैरल से अधिक तेल निर्यात किया जा रहा था। हमले के बाद पाइपलाइन का प्रवाह अस्थायी रूप से बाधित हुआ और 15 सितंबर को ब्रेंट की दैनिक कीमत 131 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।
सितंबर के अंतिम सप्ताह में पाइपलाइन की मरम्मत और आंशिक रूप से सप्लाई बहाल होने के बाद कीमतों में कुछ नरमी आई। EIA के मुताबिक, 22 सितंबर से ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन ने आंशिक रूप से फिर काम करना शुरू किया। इसी दौरान सऊदी अरब ने ओमान के तट के आसपास जहाज-से-जहाज ट्रांसफर का इस्तेमाल बढ़ाया, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल शिपमेंट में कुछ सुधार आया।
इसके बावजूद एजेंसी ने चेतावनी दी है कि तेल की भौतिक आपूर्ति और कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन जैसी महत्वपूर्ण ऊर्जा परिसंपत्तियों पर हमले यह दिखाते हैं कि वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होने के बावजूद क्षेत्रीय तनाव वैश्विक तेल बाजार को तेजी से प्रभावित कर सकता है।
EIA ने वैश्विक तेल भंडार में गिरावट को भी ऊंची कीमतों का बड़ा कारण माना है। एजेंसी का अनुमान है कि 2026 की तीसरी तिमाही में वैश्विक पेट्रोलियम इन्वेंट्री करीब **19 लाख बैरल प्रतिदिन** की दर से घटी। चौथी तिमाही में भी इन्वेंट्री में लगभग **7 लाख बैरल प्रतिदिन** की और कमी आने की संभावना जताई गई है। कम भंडार बाजार में उपलब्ध अतिरिक्त सप्लाई को सीमित करते हैं, जिससे किसी भी नई आपूर्ति बाधा का कीमतों पर तेज असर पड़ सकता है।
डीजल बाजार में बनी तंगी भी कच्चे तेल की कीमतों को सहारा दे रही है। EIA के अनुसार, सीमित डीजल आपूर्ति के कारण रिफाइनरियों को डीजल की मांग पूरी करने के लिए अधिक कच्चे तेल की प्रोसेसिंग करनी पड़ रही है। इससे क्रूड की मांग ऊंची बनी रहती है और कीमतों को अतिरिक्त समर्थन मिलता है।
हालांकि EIA को उम्मीद है कि 2027 में हालात कुछ बेहतर हो सकते हैं। एजेंसी का अनुमान है कि वैकल्पिक निर्यात व्यवस्था के विस्तार और क्षेत्रीय उत्पादन के धीरे-धीरे बहाल होने से 2027 की पहली तिमाही में बंद उत्पादन घटकर करीब 27 लाख बैरल प्रतिदिन रह सकता है। साथ ही अमेरिका में मजबूत तेल उत्पादन भी वैश्विक सप्लाई को सहारा दे सकता है।
एजेंसी ने 2027 के लिए ब्रेंट की औसत कीमत करीब **84 डॉलर प्रति बैरल** रहने का अनुमान लगाया है। यानी EIA का मानना है कि 2026 की चौथी तिमाही में कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं, लेकिन अगले वर्ष सप्लाई में सुधार होने पर उनमें नरमी संभव है।
तेल कीमतों में तेजी का असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर भी पड़ सकता है। ऊंची क्रूड कीमतें आयात बिल, तेल कंपनियों के मार्केटिंग मार्जिन, परिवहन लागत और महंगाई पर दबाव बढ़ा सकती हैं। खासकर डीजल की वैश्विक कमी यदि लंबे समय तक बनी रहती है तो माल ढुलाई और औद्योगिक लागत पर इसका असर दिखाई दे सकता है।
कुल मिलाकर EIA का नया अनुमान बताता है कि वैश्विक तेल बाजार फिलहाल मिडिल ईस्ट की स्थिति को लेकर बेहद संवेदनशील बना हुआ है। होर्मुज से सप्लाई बहाल करने की कोशिशों और वैकल्पिक रास्तों से कुछ राहत जरूर मिल रही है, लेकिन पाइपलाइन हमले, कम वैश्विक भंडार और डीजल बाजार की तंगी के कारण चौथी तिमाही में ब्रेंट क्रूड का औसत 105 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है।
Next Story





