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मुंबई। भारतीय शेयर बाजार बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी और मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ किए जाने के बाद निवेशकों में सतर्कता बढ़ गई। इसके साथ ही कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, महंगाई के जोखिम और रुपये में कमजोरी ने भी बाजार की धारणा पर दबाव बनाया।कारोबार के अंत में NSE का निफ्टी 50 सूचकांक **173.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत गिरकर 22,603.05** पर बंद हुआ। वहीं BSE सेंसेक्स **429.11 अंक या 0.59 प्रतिशत टूटकर 72,638.70** पर बंद हुआ। इससे पहले पिछले दो कारोबारी सत्रों में बाजार में तेज बढ़त दर्ज की गई थी, जिसके बाद बुधवार को निवेशकों ने मुनाफावसूली भी की।
PL कैपिटल में एडवाइजरी और डीलिंग के चीफ बिजनेस ऑफिसर विक्रम कासत के मुताबिक, पिछले दो सत्रों की जोरदार तेजी के बाद भारतीय शेयरों में प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिली। उन्होंने कहा कि RBI के मौद्रिक नीति फैसले से पहले भी निवेशकों में सतर्कता थी और नीति के बाद महंगाई तथा ब्याज दरों को लेकर चिंता और बढ़ गई।RBI की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट में **25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.50 प्रतिशत** कर दिया। यह फरवरी 2023 के बाद पहली दर वृद्धि है। इसके साथ ही RBI ने मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, रेपो रेट में बढ़ोतरी काफी हद तक अनुमान के अनुरूप थी, लेकिन नीति रुख में बदलाव ने निवेशकों को ज्यादा सतर्क किया।
‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ का अर्थ यह है कि RBI आने वाले समय में महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए जरूरत के अनुसार धीरे-धीरे सख्त मौद्रिक कदम उठा सकता है। इससे निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कमजोर पड़ सकती है। खासतौर पर ऊंची कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक मौद्रिक सख्ती ने केंद्रीय बैंक की चिंता बढ़ाई है।RBI ने FY27 के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को बढ़ाकर **7.1 प्रतिशत** किया है, जबकि महंगाई का अनुमान भी बढ़ाकर **5.2 प्रतिशत** कर दिया गया। इससे यह संकेत मिला कि अर्थव्यवस्था की वृद्धि मजबूत बनी हुई है, लेकिन कीमतों का दबाव भी व्यापक हो रहा है।
बुधवार को बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्सों में से ज्यादातर लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी ऑटो में करीब **1.44 प्रतिशत**, FMCG में **0.99 प्रतिशत**, IT में **1.31 प्रतिशत**, मेटल में **2.31 प्रतिशत**, फार्मा में **0.42 प्रतिशत**, रियल्टी में **1.85 प्रतिशत**, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में **1.32 प्रतिशत** और ऑयल एंड गैस इंडेक्स में करीब **0.51 प्रतिशत** की गिरावट दर्ज की गई। मेटल शेयरों पर मजबूत डॉलर और वैश्विक कमोडिटी बाजार की अनिश्चितता का दबाव रहा।
रेट-सेंसिटिव सेक्टरों पर भी RBI के फैसले का असर दिखा। ऑटो और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में ब्याज दर बढ़ने से कर्ज महंगा होने की चिंता ने निवेशकों को सतर्क किया। रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद होम लोन, कार लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट ऋणों की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं, जिसका असर मांग पर पड़ने की आशंका रहती है।हालांकि बैंकिंग शेयरों में शुरुआती नुकसान बाद में कुछ हद तक कम हुआ। विश्लेषकों का मानना है कि रेपो रेट बढ़ने से बैंक अपने लोन की दरों में तेजी से बदलाव कर सकते हैं, जिससे कुछ बैंकों को ब्याज आय के मोर्चे पर समर्थन मिल सकता है। इसी कारण वित्तीय शेयरों में कारोबार के दौरान रिकवरी देखने को मिली।
बाजार पर रुपये की कमजोरी ने भी दबाव बनाया। भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले पांच महीने के निचले स्तर के आसपास पहुंच गया। ऊंची कच्चे तेल की कीमतों से भारत के आयात बिल और चालू खाते पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है, जिससे रुपये पर भी दबाव पड़ता है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई और मुद्रा दोनों के लिए चुनौती बनती हैं।वैश्विक स्तर पर भी निवेशक पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की सख्त मौद्रिक नीति पर नजर बनाए हुए हैं। बुधवार को ब्रेंट क्रूड में भी तेजी दर्ज की गई। इससे भारतीय बाजार में महंगाई को लेकर चिंता और गहरी हुई।
शेयर विशेष की बात करें तो टाइटन के शेयरों में लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। कंपनी के ज्वेलरी कारोबार की बिक्री बाजार की उम्मीद से कमजोर रहने के कारण शेयर पर दबाव रहा। दूसरी तरफ कुछ बैंकिंग शेयरों ने बाजार की व्यापक गिरावट के बावजूद बढ़त दर्ज की।विश्लेषकों का कहना है कि निकट अवधि में बाजार की दिशा RBI के अगले संकेतों, कच्चे तेल की चाल, रुपये की स्थिति और वैश्विक ब्याज दरों पर निर्भर करेगी। ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ रुख से यह संदेश गया है कि यदि महंगाई का दबाव बना रहता है तो RBI आगे भी सख्ती जारी रख सकता है।कुल मिलाकर बुधवार का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए सतर्कता वाला रहा। दो सत्रों की तेजी के बाद मुनाफावसूली, RBI की दर वृद्धि और सख्त नीति संकेतों ने बाजार को नीचे खींचा। सेंसेक्स 429 अंक और निफ्टी 173 अंक टूटकर बंद हुए, जबकि ऑटो, मेटल, IT और रियल्टी जैसे प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली का दबाव सबसे ज्यादा दिखाई दिया।
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