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नई दिल्ली। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के बहुप्रतीक्षित IPO से पहले एक और महत्वपूर्ण चर्चा तेज हो गई है। NSE अपने शेयरों को IPO के बाद प्रतिद्वंद्वी BSE पर लिस्ट करने जा रहा है, लेकिन भविष्य में उसके शेयर NSE के अपने ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर भी खरीदे-बेचे जा सकें, इस संभावना पर विचार किया जा रहा है। अगर बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी SEBI से इसकी मंजूरी मिलती है तो NSE के शेयरों के लिए एक अतिरिक्त ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म उपलब्ध हो सकता है।
हालांकि फिलहाल इसे अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। NSE प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि अपने शेयरों को अपने ही प्लेटफॉर्म पर ट्रेड कराने के लिए SEBI के पास अभी कोई औपचारिक आवेदन नहीं किया गया है। ऐसे में यह योजना फिलहाल संभावना और विचार के स्तर पर है।
पहले BSE पर होगी NSE की लिस्टिंग
NSE का IPO 17 सितंबर 2026 को निवेशकों के लिए खुलने वाला है और 21 सितंबर तक इसमें बोली लगाई जा सकेगी। IPO के लिए 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है।
NSE की लिस्टिंग करीब 24 सितंबर को होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि NSE खुद एक स्टॉक एक्सचेंज है, लेकिन उसके शेयर अपने प्लेटफॉर्म के बजाय प्रतिद्वंद्वी BSE पर लिस्ट किए जाएंगे।
मौजूदा नियामकीय ढांचे में किसी स्टॉक एक्सचेंज के अपने शेयर उसी एक्सचेंज पर लिस्ट करने को लेकर हितों के टकराव और निगरानी से संबंधित महत्वपूर्ण सवाल खड़े होते हैं। इसी वजह से NSE की प्राथमिक लिस्टिंग BSE पर प्रस्तावित है।
क्या NSE पर भी खरीद सकेंगे NSE के शेयर?
यही इस पूरी योजना का सबसे दिलचस्प पहलू है। रिपोर्ट्स के अनुसार NSE भविष्य में अपने शेयरों को अपने प्लेटफॉर्म पर भी ट्रेडिंग की अनुमति दिलाने की संभावना पर विचार कर सकता है।
एक संभावित व्यवस्था के तहत NSE के शेयरों की औपचारिक लिस्टिंग BSE पर बनी रह सकती है, जबकि NSE प्लेटफॉर्म पर उन्हें 'Permitted to Trade' श्रेणी में कारोबार की अनुमति दी जा सकती है।
अगर ऐसा हुआ तो निवेशकों के पास NSE के शेयरों में कारोबार के लिए BSE के अलावा NSE प्लेटफॉर्म का विकल्प भी उपलब्ध हो सकता है।
हालांकि ऐसा करने के लिए नियामकीय मंजूरी बेहद महत्वपूर्ण होगी। NSE एक मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशन है, इसलिए अपने ही शेयरों की अपने प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग से निगरानी और हितों के टकराव जैसे मुद्दे सामने आ सकते हैं।
SEBI की मंजूरी होगी जरूरी
NSE अपने स्तर पर यह व्यवस्था लागू नहीं कर सकता। इसके लिए SEBI की अनुमति जरूरी होगी। नियामक को यह देखना होगा कि अपने शेयरों की ट्रेडिंग की सुविधा देने वाला एक्सचेंज बाजार निगरानी, नियमों के पालन और निवेशकों के हितों के बीच पर्याप्त स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चित करेगा।
इसी वजह से अगर NSE भविष्य में औपचारिक प्रस्ताव देता है तो SEBI द्वारा इसके लिए विशेष शर्तें या निगरानी व्यवस्था तय की जा सकती है।
फिलहाल NSE के MD और CEO आशीषकुमार चौहान ने स्पष्ट किया है कि एक्सचेंज ने अपने शेयरों को NSE प्लेटफॉर्म पर ट्रेड कराने की अनुमति के लिए SEBI के पास आवेदन नहीं किया है।
इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि IPO के तुरंत बाद NSE के शेयर दोनों एक्सचेंजों पर कारोबार करने लगेंगे।
निवेशकों को क्या फायदा हो सकता है?
अगर भविष्य में NSE के शेयरों को BSE के साथ NSE प्लेटफॉर्म पर भी ट्रेडिंग की अनुमति मिलती है तो इसका सबसे बड़ा संभावित फायदा लिक्विडिटी के रूप में देखा जा सकता है।
भारत में कई बड़ी कंपनियों के शेयर NSE और BSE दोनों एक्सचेंजों पर ट्रेड होते हैं। इससे निवेशकों को अपनी पसंद के प्लेटफॉर्म पर शेयर खरीदने और बेचने का विकल्प मिलता है।
NSE के शेयरों के मामले में स्थिति थोड़ी अलग होगी, क्योंकि कंपनी खुद एक स्टॉक एक्सचेंज है। अगर उसके शेयरों को अपने प्लेटफॉर्म पर भी कारोबार की मंजूरी मिलती है तो ट्रेडिंग वॉल्यूम और निवेशकों की भागीदारी बढ़ने की संभावना हो सकती है।
हालांकि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि SEBI किस तरह की व्यवस्था को मंजूरी देता है।
क्या निफ्टी में भी शामिल हो सकता है NSE?
NSE के शेयरों की अपने प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग से जुड़ा एक और दिलचस्प सवाल उसके प्रमुख इंडेक्स में संभावित एंट्री का है। अगर भविष्य में सभी जरूरी पात्रता शर्तें पूरी होती हैं और नियामकीय व्यवस्था इसकी अनुमति देती है तो NSE के शेयरों के किसी NSE इंडेक्स में शामिल होने की संभावना पर भी चर्चा हो सकती है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि IPO के बाद NSE का शेयर सीधे Nifty 50 में शामिल हो जाएगा। किसी भी शेयर को प्रमुख इंडेक्स में जगह पाने के लिए मार्केट कैपिटलाइजेशन, फ्री-फ्लोट, लिक्विडिटी और अन्य निर्धारित मानकों को पूरा करना होता है।
इसलिए NSE के शेयर की इंडेक्स में संभावित एंट्री को फिलहाल भविष्य की संभावना के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
NSE का IPO कितना बड़ा?
NSE का IPO भारतीय शेयर बाजार के सबसे चर्चित इश्यू में शामिल है। ताजा जानकारी के अनुसार IPO का आकार करीब 22,562 करोड़ रुपये है।
यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी OFS है। इसका अर्थ है कि NSE नए शेयर जारी करके अपने लिए पूंजी नहीं जुटा रहा, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेच रहे हैं।
IPO में करीब 12.64 करोड़ शेयरों की बिक्री प्रस्तावित है। इसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया समेत कई मौजूदा संस्थागत शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेच रहे हैं।
1,700 से 1,785 रुपये के प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर NSE का मूल्यांकन करीब 4.42 लाख करोड़ रुपये बैठता है।
वर्षों के इंतजार के बाद आया IPO
NSE की शेयर बाजार में लिस्टिंग का इंतजार काफी लंबे समय से किया जा रहा था। एक्सचेंज ने करीब एक दशक पहले IPO की दिशा में कदम बढ़ाए थे, लेकिन नियामकीय और कानूनी मामलों के कारण प्रक्रिया लंबे समय तक अटकी रही।
अब SEBI से जरूरी मंजूरी मिलने के बाद NSE का IPO आगे बढ़ रहा है। यह भारत के कैपिटल मार्केट के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
NSE भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है और इक्विटी तथा डेरिवेटिव सेगमेंट में इसका बड़ा कारोबार है। ऐसे में खुद NSE का सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कंपनी बनना निवेशकों के लिए भी खास घटना है।
BSE पहले से है शेयर बाजार में लिस्टेड
NSE का प्रमुख प्रतिद्वंद्वी BSE पहले से शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनी है। दिलचस्प बात यह है कि BSE के शेयर NSE पर ट्रेड होते हैं। अब NSE के IPO के बाद इसके शेयर BSE पर सूचीबद्ध होने वाले हैं।
यही कारण है कि भविष्य में NSE के शेयरों की NSE पर भी ट्रेडिंग की संभावना बाजार में दिलचस्पी पैदा कर रही है।
अगर SEBI इसकी अनुमति देता है तो NSE के शेयरों के लिए भी व्यापक ट्रेडिंग व्यवस्था बन सकती है। लेकिन नियामक के सामने हितों के टकराव से बचने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती होगी।
अभी निवेशकों को क्या समझना चाहिए?
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि NSE के शेयरों की अपने ही प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग को मंजूरी **अभी नहीं मिली है**। इसे तय व्यवस्था समझना गलत होगा।
NSE का IPO 17 सितंबर को खुलने वाला है और प्रस्तावित लिस्टिंग BSE पर होगी। इसके बाद अगर NSE अपने शेयरों को अपने प्लेटफॉर्म पर भी ट्रेड कराने की दिशा में आगे बढ़ता है तो उसे SEBI की मंजूरी लेनी होगी।
इसलिए 'डबल ट्रेडिंग' का रास्ता भविष्य में खुल सकता है, लेकिन अभी इसकी गारंटी नहीं है। SEBI की मंजूरी और उसके द्वारा निर्धारित नियम ही तय करेंगे कि NSE के शेयर BSE के साथ NSE पर भी खरीदे-बेचे जा सकेंगे या नहीं।
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