व्यापार
बैंक की गलती से कट गई रकम RBI के इस नियम से वापस मिलेंगे पैसे
Ratna Netam
2 Sept 2026 5:57 PM IST

x
नई दिल्ली। बैंक खाते से अचानक पैसे कट जाएं, ATM से कैश न निकले लेकिन खाते से रकम डेबिट हो जाए या UPI पेमेंट फेल होने के बावजूद बैलेंस कम हो जाए तो परेशान होना स्वाभाविक है। हालांकि ऐसे मामलों में ग्राहकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक यानी **RBI ने अलग-अलग नियम और समय-सीमा तय की है।** कई तरह के फेल डिजिटल ट्रांजैक्शन में बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को निर्धारित समय के भीतर रकम अपने आप वापस करनी होती है। तय समय से ज्यादा देरी होने पर कुछ मामलों में ग्राहक **100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मुआवजे** का भी हकदार हो सकता है।
लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है कि हर गलत डेबिट पर एक जैसा नियम लागू नहीं होता। ATM, UPI, IMPS, कार्ड पेमेंट और अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन के लिए अलग-अलग नियम हो सकते हैं। इसलिए पैसा कटते ही सबसे पहले यह पहचानना जरूरी है कि मामला **फेल ट्रांजैक्शन**, बैंक की गलती या किसी **अनधिकृत/फ्रॉड ट्रांजैक्शन** से जुड़ा है।
ATM से पैसे नहीं निकले लेकिन खाते से कट गए?
यह सबसे आम बैंकिंग समस्याओं में से एक है। ग्राहक ATM से पैसे निकालने की कोशिश करता है, मशीन कैश नहीं देती लेकिन मोबाइल पर खाते से पैसे कटने का मैसेज आ जाता है।
RBI के निर्धारित Turn Around Time यानी TAT के मुताबिक अगर **ATM से कैश नहीं निकला लेकिन खाते से रकम डेबिट हो गई**, तो बैंक को फेल ट्रांजैक्शन की रकम अधिकतम **T+5 दिनों** में वापस करनी होती है। यहां 'T' का मतलब ट्रांजैक्शन की तारीख है।
अगर बैंक निर्धारित समय में रकम वापस नहीं करता है तो नियम के तहत देरी के लिए **100 रुपये प्रति दिन** का मुआवजा ग्राहक के खाते में दिया जाना है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसे मामलों में लागू मुआवजा ग्राहक की शिकायत का इंतजार किए बिना स्वतः यानी suo motu दिया जाना चाहिए।
UPI से पैसे कटे लेकिन सामने वाले को नहीं मिले
UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऐसी शिकायतें भी आम हैं जिनमें ग्राहक के बैंक खाते से पैसे कट जाते हैं लेकिन जिस व्यक्ति को पैसे भेजे गए, उसके खाते में रकम नहीं पहुंचती।
RBI के TAT फ्रेमवर्क के अनुसार UPI के जरिए **फंड ट्रांसफर में ग्राहक का खाता डेबिट हो गया लेकिन लाभार्थी के खाते में रकम क्रेडिट नहीं हुई**, तो लाभार्थी बैंक को रकम क्रेडिट करने में असमर्थ होने पर अधिकतम **T+1 दिन** तक ऑटो रिवर्सल करना होता है।
अगर इसमें निर्धारित समय से ज्यादा देरी होती है तो **100 रुपये प्रतिदिन** का मुआवजा लागू हो सकता है।
इसलिए UPI पेमेंट फेल होने के बाद तुरंत दोबारा भुगतान करने से पहले ट्रांजैक्शन की स्थिति जरूर जांच लें, खासकर जब बड़ी रकम का मामला हो।
दुकान पर UPI पेमेंट फेल हुआ तो नियम अलग
UPI में हर फेल ट्रांजैक्शन के लिए T+1 वाला नियम नहीं है।
अगर ग्राहक के खाते से पैसे कट गए लेकिन **मर्चेंट यानी दुकानदार के सिस्टम पर पेमेंट की पुष्टि नहीं हुई**, तो इस स्थिति में ऑटो रिवर्सल की अधिकतम समय-सीमा **T+5 दिन** है। इसके बाद देरी होने पर 100 रुपये प्रतिदिन के मुआवजे का प्रावधान है।
इसलिए व्यक्ति को भेजे गए UPI ट्रांसफर और दुकान या मर्चेंट को किए गए UPI भुगतान में अंतर समझना जरूरी है।
IMPS फेल हुआ तो कब वापस आएंगे पैसे?
IMPS में भी कई बार खाते से रकम डेबिट होने के बाद लाभार्थी के खाते में पैसा नहीं पहुंचता।
RBI के फ्रेमवर्क के मुताबिक ऐसी स्थिति में यदि लाभार्थी के खाते में पैसा क्रेडिट नहीं किया जा सकता तो **T+1 दिन** तक ऑटो रिवर्सल होना चाहिए। तय समय के बाद देरी होने पर **100 रुपये प्रतिदिन** के मुआवजे का प्रावधान है।
इस तरह RBI ने अलग-अलग डिजिटल भुगतान प्रणालियों के लिए अधिकतम समाधान समय निर्धारित किया है।
डेबिट या क्रेडिट कार्ड से पेमेंट फेल होने पर क्या होगा?
अगर आपने किसी दुकान के PoS टर्मिनल पर कार्ड से भुगतान किया और खाते से पैसे कट गए लेकिन मर्चेंट को भुगतान की पुष्टि नहीं मिली तो बैंक को अधिकतम **T+5 दिन** में ऑटो रिवर्सल करना होता है।
इसी तरह Card Not Present यानी ऑनलाइन/e-commerce कार्ड ट्रांजैक्शन में भी खाता डेबिट होने के बावजूद मर्चेंट के सिस्टम पर कन्फर्मेशन नहीं मिलने की स्थिति के लिए RBI का TAT फ्रेमवर्क लागू होता है।
PoS से जुड़े ऐसे फेल ट्रांजैक्शन में निर्धारित T+5 दिन के बाद देरी पर 100 रुपये प्रतिदिन का मुआवजा लागू हो सकता है।
बैंक ने नहीं बल्कि किसी और ने पैसे निकाले तो क्या करें?
अगर मामला फेल ट्रांजैक्शन का नहीं बल्कि **अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन** का है तो नियम अलग हैं।
उदाहरण के लिए आपने कोई भुगतान नहीं किया लेकिन आपके खाते से पैसे चले गए। ऐसी स्थिति में सबसे जरूरी काम बैंक को तुरंत सूचना देना है।
RBI के ग्राहक सुरक्षा नियमों के अनुसार अगर अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन बैंक की गलती, लापरवाही या सिस्टम की कमी के कारण हुआ है तो ग्राहक की **शून्य देनदारी** हो सकती है। ऐसे मामले में यह मायने नहीं रखता कि ग्राहक ने बैंक को कब सूचना दी।
वहीं यदि गलती न बैंक की है और न ग्राहक की बल्कि सिस्टम में किसी तीसरे पक्ष की वजह से है और ग्राहक बैंक से ट्रांजैक्शन की सूचना मिलने के **तीन कार्य दिवस के भीतर** शिकायत कर देता है तो भी शून्य देनदारी का प्रावधान है।
4 से 7 दिन की देरी की तो बदल जाएगा नियम
अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन की शिकायत करने में समय बेहद महत्वपूर्ण है।
अगर तीसरे पक्ष से जुड़े ऐसे मामले में ग्राहक **4 से 7 कार्य दिवस** के बीच बैंक को सूचना देता है तो ग्राहक की देनदारी सीमित हो सकती है। यह ट्रांजैक्शन की रकम या RBI द्वारा निर्धारित संबंधित सीमा में से जो कम हो, उसके अनुसार तय होती है।
सात कार्य दिवस से ज्यादा देरी होने पर ग्राहक की देनदारी संबंधित बैंक की बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति के अनुसार निर्धारित की जा सकती है।
इसलिए अनधिकृत ट्रांजैक्शन दिखते ही शिकायत करना बेहद जरूरी है।
OTP या बैंकिंग जानकारी खुद साझा की तो?
अगर नुकसान ग्राहक की अपनी लापरवाही के कारण हुआ है—उदाहरण के लिए उसने पेमेंट क्रेडेंशियल किसी दूसरे व्यक्ति से साझा कर दिए—तो RBI के नियमों के अनुसार बैंक को सूचना देने तक हुए नुकसान की जिम्मेदारी ग्राहक पर आ सकती है।
हालांकि ग्राहक द्वारा बैंक को सूचना देने के बाद होने वाले नुकसान को बैंक को वहन करना होगा।
इसलिए OTP, PIN, CVV, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड और UPI PIN जैसी संवेदनशील जानकारी किसी से साझा नहीं करनी चाहिए।
बैंक या RBI के नाम से फोन करने वाला कोई व्यक्ति अगर OTP या PIN मांगता है तो उसे जानकारी न दें।
अनधिकृत ट्रांजैक्शन में 10 कार्य दिवस का नियम
अगर अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन में ग्राहक शून्य या सीमित देनदारी के लिए पात्र है तो ग्राहक द्वारा बैंक को सूचना देने के बाद बैंक को संबंधित रकम का **शैडो रिवर्सल 10 कार्य दिवस के भीतर** करना होता है।
RBI के निर्देशों के मुताबिक इसके लिए बैंक को बीमा दावे के निपटारे का इंतजार नहीं करना चाहिए। रकम को अनधिकृत ट्रांजैक्शन की तारीख के हिसाब से वैल्यू डेट किया जाना चाहिए।
इसके अलावा शिकायत का समाधान और ग्राहक की देनदारी का निर्धारण बैंक की बोर्ड-अनुमोदित नीति के अनुसार किया जाना चाहिए, लेकिन इसकी अधिकतम सीमा **90 दिन** है।
डेबिट कार्ड या बैंक खाते के मामले में ग्राहक को ब्याज का नुकसान नहीं होना चाहिए और क्रेडिट कार्ड के मामले में अतिरिक्त ब्याज का बोझ नहीं पड़ना चाहिए।
पैसे कट जाएं तो सबसे पहले क्या करें?
गलत या संदिग्ध डेबिट दिखते ही ग्राहक को ट्रांजैक्शन का SMS, बैंक स्टेटमेंट, UPI reference/transaction ID और स्क्रीनशॉट जैसे सबूत सुरक्षित रखने चाहिए।
इसके बाद संबंधित बैंक के आधिकारिक ग्राहक सेवा माध्यम, मोबाइल बैंकिंग ऐप, इंटरनेट बैंकिंग या शाखा के जरिए शिकायत दर्ज कराएं और **complaint/reference number** जरूर लें।
अगर मामला अनधिकृत ट्रांजैक्शन का है तो इंतजार न करें। जितनी जल्दी बैंक को जानकारी देंगे, RBI के ग्राहक देनदारी संबंधी नियमों का लाभ मिलने की संभावना उतनी बेहतर रहेगी।
फेल ट्रांजैक्शन के मामले में निर्धारित TAT समाप्त होने के बाद भी रकम वापस नहीं आई हो तो शिकायत नंबर के साथ बैंक से मामला आगे बढ़ाया जा सकता है।
बैंक सुनवाई न करे तो RBI तक पहुंचाएं शिकायत
अगर बैंक आपकी शिकायत का समाधान नहीं करता है तो RBI की शिकायत व्यवस्था का सहारा लिया जा सकता है।
महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि **1 जुलाई 2026 से Reserve Bank – Integrated Ombudsman Scheme, 2026 (RB-IOS 2026)** लागू हो चुकी है। इसने 2021 की पुरानी एकीकृत लोकपाल योजना की जगह ली है। यह RBI द्वारा विनियमित संस्थाओं की सेवा में कमी से संबंधित पात्र शिकायतों के समाधान के लिए निःशुल्क व्यवस्था है।
आमतौर पर ग्राहक को पहले संबंधित बैंक या विनियमित संस्था के सामने शिकायत करनी होती है। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत समाधान नहीं मिलने पर RBI Ombudsman का रास्ता अपनाया जा सकता है। RBI की शिकायत व्यवस्था ग्राहकों के लिए निःशुल्क है।
[RBI शिकायत पोर्टल पर जाएं
शिकायत के नाम पर किसी एजेंट को पैसे न दें
RBI की शिकायत प्रक्रिया के लिए किसी बिचौलिए या एजेंट को पैसे देने की जरूरत नहीं है।
ग्राहक अपनी शिकायत स्वयं दर्ज कर सकता है। RBI के जागरूकता संदेशों में भी ग्राहकों को बताया गया है कि बैंक, NBFC या भुगतान प्रणाली से जुड़ी अनसुलझी शिकायतों को आधिकारिक शिकायत प्रणाली के जरिए उठाया जा सकता है।
इसलिए इंटरनेट पर दिखने वाले फर्जी 'RBI complaint helpline' नंबर या रिफंड दिलाने का दावा करने वाले एजेंटों से सावधान रहें।
हर मामले में 100 रुपये रोज नहीं मिलेंगे
RBI के नियमों को लेकर एक भ्रम अक्सर देखने को मिलता है कि खाते से गलत पैसा कटते ही बैंक को 100 रुपये रोज देना होगा।
ऐसा नहीं है।
100 रुपये प्रतिदिन का मुआवजा कुछ निर्धारित प्रकार के failed transactions में RBI द्वारा तय TAT से ज्यादा देरी होने पर लागू होता है।** उदाहरण के लिए ATM में कैश न मिलने पर T+5, UPI व्यक्ति-से-व्यक्ति ट्रांसफर या IMPS में लाभार्थी को रकम न मिलने पर T+1 और UPI मर्चेंट पेमेंट के कुछ मामलों में T+5 की समय-सीमा निर्धारित है।
अनधिकृत ट्रांजैक्शन के मामले में अलग ग्राहक-देनदारी और रिवर्सल नियम लागू होते हैं।
घबराने के बजाय तुरंत शिकायत करें
बैंक खाते से पैसा कटने का मतलब यह नहीं है कि रकम हमेशा के लिए चली गई। फेल ATM, UPI, IMPS और कार्ड ट्रांजैक्शन के लिए RBI ने समय-सीमा तय कर रखी है और कई मामलों में बैंक को रकम अपने आप रिवर्स करनी होती है। समय-सीमा से ज्यादा देरी होने पर निर्धारित मामलों में मुआवजा भी मिल सकता है।
वहीं अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन में सबसे अहम बात **तुरंत रिपोर्ट करना** है। तीन कार्य दिवस के भीतर सूचना देने पर पात्र थर्ड-पार्टी ब्रीच मामलों में ग्राहक की देनदारी शून्य हो सकती है, जबकि देरी होने पर नियम बदल सकते हैं।
इसलिए खाते से गलत रकम कटने पर ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड सुरक्षित रखें, तुरंत बैंक में शिकायत दर्ज करें और शिकायत नंबर संभालकर रखें। बैंक से समाधान नहीं मिलने पर RBI की लोकपाल व्यवस्था का इस्तेमाल करें। सही समय पर उठाया गया कदम आपके पैसे वापस दिलाने में सबसे महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
Next Story





