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टेक और ऑटो सेक्टर पर संकट
नई दिल्ली: ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़े सेक्टर में नौकरियों को लेकर चिंता बढ़ गई है। जर्मनी की दिग्गज वाहन कंपनी फॉक्सवैगन (Volkswagen) ने लागत कम करने और कंपनी को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए बड़े पुनर्गठन की योजना बनाई है। इसके तहत 2030 तक करीब 1,00,000 कर्मचारियों की संख्या कम करने की तैयारी है, जो कंपनी के कुल वैश्विक कार्यबल का लगभग 15 प्रतिशत है। कंपनी का यह कदम ऑटो उद्योग में अब तक के सबसे बड़े पुनर्गठन अभियानों में से एक माना जा रहा है। फॉक्सवैगन इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, चीन की कंपनियों की चुनौती और बढ़ती उत्पादन लागत के दबाव से जूझ रही है।
EV बदलाव और चीन की प्रतिस्पर्धा बनी चुनौती
फॉक्सवैगन को वैश्विक ऑटो बाजार में तेजी से बदलते हालात का सामना करना पड़ रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में उतार-चढ़ाव और चीनी वाहन निर्माताओं की मजबूत पकड़ ने कंपनी पर दबाव बढ़ाया है। कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता को नए बाजार हालात के अनुसार ढालने, खर्च घटाने और ज्यादा मुनाफे वाले मॉडल पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बना रही है।
कर्मचारियों और प्लांट पर पड़ेगा असर
छंटनी की योजना के साथ जर्मनी में कंपनी के कुछ उत्पादन केंद्रों के भविष्य को लेकर भी सवाल उठे हैं। प्रबंधन और कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा जारी है। कंपनी का कहना है कि पुनर्गठन का उद्देश्य फॉक्सवैगन को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखना है, जबकि कर्मचारी संगठन नौकरियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं।
ऑटो सेक्टर में बदलाव का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑटो उद्योग में तकनीकी बदलाव, ऑटोमेशन और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ते रुझान के कारण कंपनियां अपनी कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव कर रही हैं। फॉक्सवैगन का यह फैसला पूरे ऑटो सेक्टर में चल रहे परिवर्तन का संकेत माना जा रहा है
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