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RBI के फैसले के बाद संभला बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी बढ़त के साथ बंद

Ratna Netam
5 Aug 2026 9:29 PM IST
RBI के फैसले के बाद संभला बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी बढ़त के साथ बंद
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मुंबई : भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन उतार-चढ़ाव से भरे सत्र के बाद मामूली बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किए जाने, मौद्रिक नीति में स्थिरता बनाए रखने और वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में तनाव तथा कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी जैसी परिस्थितियों के बावजूद घरेलू बाजार सकारात्मक दायरे में बंद होने में सफल रहा। हालांकि दिन के दौरान बाजार ने अच्छी तेजी दिखाई, लेकिन अंतिम घंटों में मुनाफावसूली के कारण अधिकांश बढ़त सीमित रह गई। इसके बावजूद निवेशकों की संपत्ति में एक ही दिन में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये का इजाफा दर्ज किया गया।
कारोबार के अंत में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 152 अंक यानी 0.19 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,581 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी-50 सूचकांक लगभग 10 अंक यानी 0.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,624.65 के स्तर पर बंद हुआ। दोनों प्रमुख सूचकांकों ने दिन की शुरुआत मजबूत बढ़त के साथ की थी और शुरुआती कारोबार में निवेशकों का उत्साह साफ दिखाई दिया। हालांकि दोपहर बाद बाजार में बिकवाली बढ़ने से अधिकांश इंट्राडे बढ़त समाप्त हो गई।
सेंसेक्स ने अपने पिछले बंद 78,428.95 के मुकाबले करीब 0.79 प्रतिशत की मजबूती के साथ 79,055.38 पर कारोबार की शुरुआत की, जो दिन का उच्चतम स्तर भी रहा। इसके बाद मुनाफावसूली के चलते सूचकांक फिसलकर एक समय 78,285.74 के निचले स्तर तक पहुंच गया। इसी तरह निफ्टी ने 24,669.20 पर शुरुआत की और कारोबार के दौरान 24,677.60 का उच्चतम तथा 24,497.95 का न्यूनतम स्तर छुआ।
व्यापक बाजार की बात करें तो मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। निफ्टी मिडकैप सूचकांक 0.18 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक 0.76 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। इससे संकेत मिला कि बड़े शेयरों में सीमित तेजी के बावजूद मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी का माहौल बना रहा।
सेक्टरवार प्रदर्शन में धातु, रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मेटल, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी ऑटो सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर बैंकिंग क्षेत्र में दबाव देखने को मिला। निफ्टी बैंक और निफ्टी प्राइवेट बैंक सूचकांक कमजोरी के साथ बंद हुए, जिससे प्रमुख सूचकांकों की तेजी सीमित रही।
निफ्टी-50 के प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में श्रीराम फाइनेंस, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, जेएसडब्ल्यू स्टील, हिंडाल्को, एनटीपीसी और बजाज ऑटो शामिल रहे। इन कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। दूसरी ओर टीसीएस, अपोलो हॉस्पिटल्स, एचसीएल टेक, सन फार्मा, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और एसबीआई लाइफ के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिसने बाजार की कुल बढ़त पर असर डाला।
बाजार की मजबूती का सबसे बड़ा फायदा निवेशकों को मिला। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण बढ़कर 492.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह लगभग 489.5 लाख करोड़ रुपये था। यानी निवेशकों की कुल संपत्ति में एक ही दिन में लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का इजाफा हुआ।
बाजार को सबसे अधिक राहत भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति से मिली। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अगस्त 2026 की समीक्षा बैठक में नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखा। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपना "तटस्थ" रुख भी बरकरार रखा। बाजार पहले से ही किसी बड़े बदलाव की आशंका में था, लेकिन दरों में स्थिरता बनाए रखने के फैसले ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया।
आरबीआई ने अपने आर्थिक आकलन में वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान दोहराया। वहीं खुदरा महंगाई यानी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति लगभग 5 प्रतिशत रहने का अनुमान भी बरकरार रखा गया। इससे यह संकेत मिला कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में बनी हुई है और विकास की रफ्तार जारी रहने की संभावना है।
वैश्विक स्तर पर भी निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति पर बनी रही। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका, ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौते की दिशा में प्रगति हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि जलडमरूमध्य को आंशिक रूप से खोलने से जुड़ा समझौता जल्द घोषित किया जा सकता है। हालांकि क्षेत्रीय तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर निवेशकों की सतर्कता बनी रही।
विश्लेषकों का मानना है कि आरबीआई की स्थिर नीति, भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत विकास संभावनाएं और घरेलू निवेशकों की लगातार खरीदारी आने वाले दिनों में बाजार को सहारा दे सकती है। हालांकि वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। फिलहाल बाजार ने उतार-चढ़ाव के बीच मजबूती दिखाते हुए निवेशकों का भरोसा कायम रखा है।
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