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कंपनियों की टैक्स चुनौती खारिज, सरकार के पक्ष में फैसला
New Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग पर GST को लेकर लगभग पांच साल से चल रहे विवाद को खत्म करते हुए फैसला सुनाया है कि ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और जुए के लेन-देन पर 28 प्रतिशत गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) लगाया जा सकता है।
कोर्ट ने 2023 में GST कानूनों और नियमों में किए गए बदलावों को भी सही ठहराया, जिससे सरकार को बड़ी जीत मिली है। यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि इस विवाद से लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये के टैक्स क्लेम (जिसमें टैक्स, ब्याज और जुर्माना शामिल है) जुड़े हुए हैं।
भारत का ऑनलाइन गेमिंग उद्योग तेज़ी से बढ़ रहा है। इंडस्ट्री के अनुमान बताते हैं कि वित्त वर्ष 2027 तक यह बाज़ार 8.6 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच सकता है।
विवाद कैसे शुरू हुआ
यह विवाद 2022 में तब शुरू हुआ जब GST अधिकारियों ने एक ऑनलाइन रम्मी प्लेटफ़ॉर्म को नोटिस भेजा।
टैक्स विभाग का आरोप था कि कंपनी केवल अपनी प्लेटफ़ॉर्म फ़ीस पर 18 प्रतिशत GST का भुगतान कर रही थी। विभाग के अनुसार, कंपनी को खिलाड़ियों द्वारा लगाए गए गेम की पूरी राशि पर 28 प्रतिशत GST का भुगतान करना चाहिए था।
कंपनी पर आरोप था कि उसने अपनी टैक्स देनदारी को गलत तरीके से दिखाया और टैक्स की चोरी की। अकेले उस मामले में, टैक्स की मांग लगभग 21,000 करोड़ रुपये थी।
हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक
इससे पहले कर्नाटक हाई कोर्ट ने गेमिंग कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाया था।
कोर्ट ने कहा था कि कौशल-आधारित (skill-based) खेलों को जुआ या सट्टेबाजी नहीं माना जा सकता। इसलिए, ऐसे खेलों पर उसी तरह टैक्स नहीं लगाया जा सकता।
हालांकि, केंद्र सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। देश भर के अलग-अलग हाई कोर्ट में भी इसी तरह के मामले लंबित थे।
GST काउंसिल ने नियम बदले
इस मुद्दे को हल करने के लिए, GST काउंसिल ने मंत्रियों का एक समूह (GoM) बनाया।
समूह ने सिफारिश की कि GST के मकसद से कौशल-आधारित खेलों और किस्मत पर आधारित खेलों (games of chance) के बीच कोई अंतर नहीं किया जाना चाहिए।
इन सिफारिशों के आधार पर, सरकार ने 2023 में GST कानूनों में संशोधन किया और स्पष्ट किया कि खिलाड़ियों द्वारा दांव पर लगाई गई पूरी राशि पर 28 प्रतिशत GST लागू होगा, न कि केवल गेमिंग कंपनियों द्वारा ली जाने वाली प्लेटफ़ॉर्म फ़ीस पर।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के संशोधनों को सही ठहराया और उन GST नोटिसों को बहाल कर दिया जिन्हें पहले कर्नाटक हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था। कोर्ट ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे सभी लंबित नोटिसों का निपटारा एक तय समय-सीमा के भीतर करें।
एक अलग टिप्पणी में, कोर्ट ने कहा कि जब सट्टेबाजी या दांव लगाना किसी स्किल-बेस्ड गेम (कौशल-आधारित खेल) का हिस्सा बन जाता है, तो उसे पूरी तरह से कौशल का खेल नहीं माना जा सकता।
इंडस्ट्री के सामने नई चुनौतियां
जानकारों का मानना है कि इस फैसले से ऑनलाइन गेमिंग के लिए टैक्स ढांचे में स्पष्टता आएगी।
हालांकि, इससे कई गेमिंग कंपनियों के लिए गंभीर वित्तीय चुनौतियां पैदा हो सकती हैं, क्योंकि कुछ टैक्स की मांगें कथित तौर पर उनकी मार्केट वैल्यूएशन से भी अधिक हैं।
हालांकि कानूनी विवाद अब खत्म हो गया है, लेकिन अब ध्यान इस बात पर होगा कि भारी-भरकम टैक्स देनदारी का कितना हिस्सा वास्तव में वसूला जा सकता है और भारत की ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री के भविष्य के विकास पर इसका क्या असर पड़ेगा।
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