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LIC का OFS हिट, फिर भी शेयर में बिकवाली; जानिए क्यों टूटा स्टॉक

Ratna Netam
4 Aug 2026 10:09 PM IST
LIC का OFS हिट, फिर भी शेयर में बिकवाली; जानिए क्यों टूटा स्टॉक
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नई दिल्ली : देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी **भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC)** के शेयरों में मंगलवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर करीब **7.86 प्रतिशत** तक टूट गया और 391 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इंट्रा-डे ट्रेडिंग के दौरान शेयर 389 रुपये तक फिसल गया, जिससे यह अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर के काफी करीब पहुंच गया। दिलचस्प बात यह है कि शेयर में यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब सरकार की ओर से एलआईसी में हिस्सेदारी बिक्री के लिए लाए गए **ऑफर फॉर सेल (OFS)** को संस्थागत निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। निवेशकों ने करीब **36,400 करोड़ रुपये** की बोलियां लगाई हैं।
सरकार एलआईसी में अपनी हिस्सेदारी कम करने की प्रक्रिया के तहत संस्थागत निवेशकों को **28.46 करोड़ से अधिक शेयर** बेच रही है। इन शेयरों का न्यूनतम मूल्य **382 रुपये प्रति शेयर** तय किया गया है। संस्थागत निवेशकों के लिए खुला यह ऑफर पहले ही दिन पूरी तरह सफल रहा और निवेशकों ने अपेक्षा से कहीं अधिक रुचि दिखाई। प्राप्त बोलियों के अनुसार निवेशकों ने **383.84 रुपये प्रति शेयर** के सांकेतिक मूल्य पर **94.45 करोड़ से अधिक शेयरों** के लिए आवेदन किया। इस आधार पर कुल बोलियों का मूल्य लगभग **36,400 करोड़ रुपये** बैठता है।
संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस शेयर बिक्री में **ग्रीन-शू ऑप्शन** का उपयोग करने का निर्णय लिया है। ग्रीन-शू ऑप्शन का इस्तेमाल तब किया जाता है जब किसी शेयर बिक्री को उम्मीद से अधिक मांग मिलती है। इससे सरकार अतिरिक्त शेयर बेचकर अधिक धन जुटा सकती है। अनुमान है कि यदि न्यूनतम मूल्य पर 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री पूरी होती है तो सरकार को लगभग **31,000 करोड़ रुपये** प्राप्त होंगे।
अब यह ऑफर खुदरा निवेशकों के लिए भी खोला जाएगा। बुधवार से खुदरा निवेशक भी इस ऑफर में आवेदन कर सकेंगे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि खुदरा निवेशकों की भागीदारी भी इस ऑफर की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, क्योंकि एलआईसी देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी होने के साथ-साथ करोड़ों पॉलिसीधारकों का भरोसेमंद नाम भी है।
सरकार की इस हिस्सेदारी बिक्री का एक प्रमुख उद्देश्य **भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI)** द्वारा निर्धारित न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (Minimum Public Shareholding) के नियमों का पालन करना भी है। वर्तमान में केंद्र सरकार के पास एलआईसी की **96.5 प्रतिशत हिस्सेदारी** है, जबकि सेबी के नियमों के अनुसार सूचीबद्ध कंपनियों में न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है। सेबी ने एलआईसी को **16 मई 2027** तक कम से कम **10 प्रतिशत सार्वजनिक हिस्सेदारी** हासिल करने की समय-सीमा दी है। इस ऑफर के माध्यम से सरकार उसी दिशा में आगे बढ़ रही है।
गौरतलब है कि मई 2022 में एलआईसी का ऐतिहासिक आईपीओ लाया गया था। उस समय सरकार ने **3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी** बेचकर करीब **21,000 करोड़ रुपये** जुटाए थे। आईपीओ का प्राइस बैंड **902 से 949 रुपये प्रति शेयर** रखा गया था। इसके बाद अप्रैल 2026 में एलआईसी के निदेशक मंडल ने शेयरधारकों के लिए **एक के बदले एक बोनस शेयर** जारी करने को मंजूरी दी थी।
इस बीच कंपनी के शीर्ष प्रबंधन में भी हाल ही में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। एलआईसी ने **शतमन्यु श्रीवास्तव** को नया **मुख्य वित्त अधिकारी (CFO)** नियुक्त किया है। उन्होंने 28 जुलाई 2026 से यह जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह कंपनी में कार्यकारी निदेशक और रिस्क ऑफिसर के रूप में कार्यरत थे। वहीं **वरदराजन मुतुवेंकटरमन** को कंपनी का नया **चीफ रिस्क ऑफिसर** बनाया गया है। वह 1992 से एलआईसी से जुड़े हुए हैं और लंबे प्रशासनिक अनुभव के बाद इस पद पर नियुक्त किए गए हैं।
शेयर बाजार में एलआईसी के प्रदर्शन की बात करें तो मंगलवार को कंपनी का शेयर लगभग **7.86 प्रतिशत** टूटकर **391 रुपये** पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह **389 रुपये** तक फिसल गया। कंपनी का **52 सप्ताह का निचला स्तर 361 रुपये** और **52 सप्ताह का उच्च स्तर 468.30 रुपये** है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ऑफर फॉर सेल के दौरान अक्सर शेयरों पर दबाव देखने को मिलता है, क्योंकि बाजार में अतिरिक्त शेयर उपलब्ध होने से कीमतों पर असर पड़ सकता है।
हालांकि संस्थागत निवेशकों की मजबूत प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि लंबी अवधि के निवेशकों का एलआईसी पर भरोसा कायम है। अब बाजार की नजर खुदरा निवेशकों की भागीदारी और ऑफर के अंतिम परिणाम पर रहेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि हिस्सेदारी बिक्री पूरी होने के बाद एलआईसी के शेयरों में दोबारा तेजी लौटती है या नहीं।
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