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रसोई का बजट बिगड़ा, महंगा हुआ खाद्य तेल

Saba Naaz
21 July 2026 8:18 PM IST
रसोई का बजट बिगड़ा, महंगा हुआ खाद्य तेल
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नई दिल्ली। आम लोगों की रसोई पर महंगाई का असर एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। खाने के तेल की कीमतों में पिछले कुछ दिनों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मूंगफली तेल, सोयाबीन तेल, सरसों तेल, पाम तेल और बिनौला तेल समेत कई खाद्य तेलों के दाम बढ़ गए हैं। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कम आवक, त्योहारी मांग में बढ़ोतरी, रुपये की कमजोरी और आयातित तेलों की बढ़ती लागत के कारण कीमतों में यह तेजी आई है।

खाद्य तेल हर भारतीय घर की रोजमर्रा की जरूरत है। इसके दाम बढ़ने से सीधे तौर पर घरेलू बजट पर असर पड़ता है। बाजार में इस समय सरसों तेल की कीमतों में सबसे ज्यादा तेजी देखी जा रही है। कुछ समय पहले तक जो सरसों तेल सोयाबीन और पाम तेल के मुकाबले सस्ता था, अब वह ₹10 से ₹15 प्रति किलो तक महंगा हो गया है।

व्यापारियों के अनुसार, किसानों ने पिछले दिनों सोयाबीन की फसल से अच्छे दाम हासिल किए थे। अब वे कम कीमत पर अपनी उपज बेचने से बच रहे हैं, जिसके कारण मंडियों में सोयाबीन की आवक तेजी से कम हुई है। वहीं बिनौला तेल की उपलब्धता भी काफी कम हो गई है। इससे बाजार में तेलों की सप्लाई पर दबाव बढ़ा है और कीमतों में तेजी आई है।

त्योहारी सीजन की बढ़ती मांग भी तेल की कीमतों में उछाल का बड़ा कारण मानी जा रही है। बरसात के मौसम में अचार बनाने वाली कंपनियों की ओर से सरसों तेल की मांग बढ़ जाती है। इसके अलावा आने वाले त्योहारों को देखते हुए खाद्य तेलों की खपत बढ़ने लगी है। मांग बढ़ने और उपलब्धता कम होने से कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में बदलाव का असर भी भारतीय बाजार पर पड़ा है। पिछले सप्ताह डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट आने से आयात किए जाने वाले खाद्य तेल महंगे हो गए हैं। भारत बड़ी मात्रा में पाम तेल और अन्य खाद्य तेलों का आयात करता है। रुपये की कमजोरी के कारण आयात लागत बढ़ने से घरेलू बाजार में तेलों के दाम ऊपर चले गए हैं।

सरकार की ओर से पाम और पामोलीन तेल पर आयात शुल्क बढ़ाए जाने का असर भी कीमतों पर पड़ा है। बाजार जानकारों का कहना है कि इन सभी कारणों के संयुक्त प्रभाव से पिछले सप्ताह लगभग सभी प्रमुख खाद्य तेलों के भाव में बढ़ोतरी हुई है।

मंडियों में सोयाबीन की आवक में भारी गिरावट दर्ज की गई है। पहले जहां रोजाना लाखों बोरी सोयाबीन की आवक होती थी, वहीं अब यह घटकर काफी कम रह गई है। बताया जा रहा है कि मंडियों में सोयाबीन की आवक लगभग 60 हजार बोरी से घटकर करीब 10 हजार बोरी तक पहुंच गई है, जबकि रोजाना खपत की मांग ढाई से तीन लाख बोरी के आसपास है। कम आवक को देखते हुए सोयाबीन खरीद के भाव में भी बढ़ोतरी की गई है।

मूंगफली तेल की कीमतों में भी सुधार देखा गया है। बाजार में मूंगफली की उपलब्धता कम है, जबकि ब्रांडेड कंपनियों की ओर से इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। बिनौला तेल की कमी के कारण मूंगफली तेल की मांग और बढ़ गई है, जिससे इसके दाम में भी तेजी आई है।

मौजूदा बाजार भाव की बात करें तो सरसों दाना करीब ₹8,075 से ₹8,100 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। सरसों तेल के थोक भाव में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह लगभग ₹16,550 प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल के दाम में भी इजाफा हुआ है।

सोयाबीन दाना और सोयाबीन लूज के भाव में भी तेजी आई है। सोयाबीन दाना करीब ₹7,550 से ₹7,600 प्रति क्विंटल और सोयाबीन लूज ₹7,400 से ₹7,475 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। मूंगफली तेल और तिलहन के दाम में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में यदि तेल-तिलहन की आवक नहीं बढ़ी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें ऊंची रहीं तो खाद्य तेलों के दाम और बढ़ सकते हैं। हालांकि, नई फसल की आवक बढ़ने और सप्लाई बेहतर होने पर कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल आम उपभोक्ताओं को महंगे तेल के कारण रसोई का खर्च संभालने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

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