
नई दिल्ली। दिग्गज कारोबारी अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड (Vedanta Resources Limited) ने अपने कर्ज प्रबंधन को लेकर बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने 2024 में जारी किए गए तीन प्रमुख बॉन्ड सीरीज का पूरा भुगतान कर दिया है। इस भुगतान के साथ ही वेदांता ने करीब 1.5 बिलियन डॉलर यानी लगभग 14,447 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज चुका दिया है। कंपनी के इस कदम से वेदांता लिमिटेड के शेयरों पर लगे सभी प्रतिबंध भी हट गए हैं, जिससे कंपनी और निवेशकों को बड़ी राहत मिली है।
वेदांता रिसोर्सेज ने एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी दी कि उसकी सहायक कंपनी वेदांता रिसोर्सेज फाइनेंस II पीएलसी द्वारा जारी किए गए तीन बॉन्ड्स का पूर्ण भुगतान और निपटारा कर दिया गया है। यह प्रक्रिया 17 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गई है। कंपनी ने बताया कि इन बॉन्ड्स की देनदारी खत्म होने के बाद प्रमोटर ग्रुप के शेयरों पर लगाए गए सभी एन्कम्ब्रेंस यानी प्रतिबंध समाप्त हो गए हैं।
कंपनी ने जिन तीन बॉन्ड सीरीज का भुगतान किया है, उनमें सितंबर 2024 में जारी 90 करोड़ डॉलर के बॉन्ड शामिल हैं, जिन पर 10.875 प्रतिशत ब्याज दर थी और इसकी मैच्योरिटी साल 2029 में थी। इसके अलावा अक्टूबर 2024 में जारी 30 करोड़ डॉलर के बॉन्ड और दिसंबर 2024 में जारी 30 करोड़ डॉलर के बॉन्ड का भी भुगतान किया गया है। दिसंबर वाले बॉन्ड की ब्याज दर 10.25 प्रतिशत थी और इसकी मैच्योरिटी 2028 में तय थी।
इस कर्ज भुगतान के बाद वेदांता लिमिटेड के प्रमोटर ग्रुप की कंपनियों ट्विन स्टार होल्डिंग्स लिमिटेड और वेल्टर ट्रेडिंग लिमिटेड के पास मौजूद शेयरों पर लगे प्रतिबंध हटा दिए गए हैं। इससे पहले इन शेयरों को लेकर कई तरह की शर्तें लागू थीं। इन शर्तों के तहत प्रमोटर समूह को शेयरों की बिक्री या उन पर नई वित्तीय देनदारी बनाने के लिए कुछ नियमों का पालन करना पड़ता था।
कंपनी के लिए यह कदम वित्तीय मजबूती की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वेदांता पिछले कुछ समय से अपने कर्ज को कम करने और बैलेंस शीट मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। बड़े कर्ज भुगतान के बाद कंपनी पर ब्याज का दबाव कम होगा और भविष्य की योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
वेदांता के डिमर्जर प्लान से जुड़ी कंपनियों को भी इस फैसले का फायदा मिला है। वेदांता लिमिटेड से अलग होकर बनी चार नई कंपनियां वेदांता एल्युमीनियम मेटल, वेदांता ऑयल एंड गैस, वेदांता पावर और वेदांता आयरन एंड स्टील लिमिटेड के शेयरों पर भी लगाए गए प्रतिबंध अब समाप्त हो गए हैं।
ये चारों कंपनियां 15 जून 2026 को शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई थीं। प्रतिबंध हटने के बाद इन कंपनियों के कामकाज और शेयरों में ज्यादा लचीलापन आने की उम्मीद है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कर्ज में कमी और शेयरों से प्रतिबंध हटना कंपनी की वित्तीय स्थिति के लिए सकारात्मक संकेत है।
वेदांता समूह लंबे समय से मेटल, माइनिंग, एनर्जी और प्राकृतिक संसाधन क्षेत्रों में काम कर रहा है। अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली कंपनी भारत की प्रमुख कारोबारी कंपनियों में शामिल है। कंपनी की ओर से कर्ज घटाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
हालांकि, शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों को ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी कंपनी के शेयरों में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है। कर्ज कम होना और वित्तीय स्थिति मजबूत होना सकारात्मक संकेत जरूर हैं, लेकिन निवेश से पहले कंपनी के प्रदर्शन, बाजार परिस्थितियों और विशेषज्ञों की सलाह पर भी ध्यान देना जरूरी है।





