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जियो का 6G नेटवर्क: 5 गुना ज्यादा तेज इंटरनेट देने का दावा

Ashish verma
9 Oct 2026 5:41 PM IST
जियो का 6G नेटवर्क: 5 गुना ज्यादा तेज इंटरनेट देने का दावा
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Jio's 6G Network: रिलायंस जियो ने भारत में अगली पीढ़ी के मोबाइल नेटवर्क की तैयारी की झलक पेश की है। नई दिल्ली में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में कंपनी ने अपना प्री-6जी स्टैक और गीगा मीमो रेडियो प्रदर्शित किया है। इस विकास से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, वैश्विक मानक तय होने के बाद भारत 6जी शुरू करने वाले शुरुआती देशों में शामिल हो सकता है। फिलहाल इसे दुनिया में सबसे पहले भारत में 6जी शुरू होने की निश्चित घोषणा नहीं माना जा सकता। इसके लिए 2030 के आसपास की समयसीमा पर नजर है।
जियो की तैयारी में मौजूदा 5जी नेटवर्क के मुकाबले पांच गुना तक अधिक नेटवर्क क्षमता और काफी कम विलंब का लक्ष्य सामने आया है। यहां पांच गुना क्षमता के दावे को हर मोबाइल उपयोगकर्ता के लिए पांच गुना डाउनलोड स्पीड मिलने की गारंटी समझना सही नहीं होगा। नेटवर्क क्षमता और व्यक्तिगत इंटरनेट स्पीड अलग माप हैं। अभी सामने आई जानकारी भविष्य की तकनीक के विकास और प्रदर्शन से संबंधित है। आम ग्राहकों के लिए 6जी सेवा शुरू करने की निश्चित तारीख, रिचार्ज कीमत और उपलब्धता वाले शहरों की घोषणा इन विवरणों में नहीं है।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस में प्रदर्शित गीगा मीमो रेडियो को कंपनी भारत का पहला ऐसा रेडियो बता रही है। इसके साथ एक साझा बेसबैंड यूनिट भी दिखाई गई है, जिसे 5जी और 6जी दोनों तरह की तैनाती के लिए विकसित किया गया है। यह प्रदर्शन जियो के हार्डवेयर और नेटवर्क तकनीक पर काम करने की दिशा दिखाता है। हालांकि, प्री-6जी उपकरण दिखाए जाने और ग्राहकों को व्यावसायिक सेवा मिलने के बीच मानकीकरण, मूल्यांकन और नेटवर्क की वास्तविक तैनाती जैसे चरण बाकी रहते हैं।
दुनियाभर में 6जी के लिए मानक विकसित करने की प्रक्रिया जारी है। अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ यानी आईटीयू इस अगली पीढ़ी की तकनीक को आईएमटी-2030 के नाम से आगे बढ़ा रहा है। संस्था के अनुसार, प्रस्तावित रेडियो इंटरफेस तकनीकों को तय आवश्यकताओं के आधार पर जांचा जाएगा। आईटीयू की रूपरेखा में अंतिम 6जी तकनीकी मानकों को 2030 तक मंजूरी मिलने की संभावना रखी गई है। इसलिए इस समयसीमा को समझना जरूरी है: यह वैश्विक मानकों के विकास का लक्ष्य है, हर देश में उसी तारीख को सेवा शुरू होने की गारंटी नहीं।
मानकीकरण के अगले चरण के लिए आईटीयू ने फरवरी 2027 से फरवरी 2029 के बीच संभावित रेडियो इंटरफेस तकनीकों के प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। इससे स्पष्ट है कि 6जी की तकनीकी दिशा अभी विकसित हो रही है। कंपनियों के प्रयोग और शुरुआती उपकरण इस प्रक्रिया में योगदान दे सकते हैं, लेकिन प्रस्तावों का मूल्यांकन भी होना है। भारत के शुरुआती देशों में शामिल होने की संभावना इसी व्यापक वैश्विक प्रक्रिया के संदर्भ में सामने आई है।
आईटीयू ने मार्च 2026 में बताया था कि उसके विशेषज्ञ समूह ने 6जी रेडियो इंटरफेस के मूल्यांकन के लिए तकनीकी प्रदर्शन संबंधी मसौदा आवश्यकताओं पर सहमति बनाई है। इनमें कुल 20 आवश्यकताएं शामिल हैं, जिनमें सात नई और विशेष रूप से 6जी के प्रदर्शन से संबंधित हैं। उस समय इनके औपचारिक अनुमोदन के लिए दिसंबर की बैठक प्रस्तावित थी। संस्था ने यह भी स्पष्ट किया है कि न्यूनतम प्रदर्शन आवश्यकताएं वास्तविक नेटवर्क में मिलने वाले प्रदर्शन की गारंटी नहीं देतीं। यही वजह है कि भविष्य के लक्ष्य और ग्राहकों के वास्तविक अनुभव को अलग समझना जरूरी है। ITU
6जी के विकास का उद्देश्य केवल मोबाइल पर तेज डाउनलोड उपलब्ध कराना नहीं है। आईटीयू की रूपरेखा में अधिक भरोसेमंद और कम विलंब वाला संचार, बड़ी संख्या में उपकरणों की कनेक्टिविटी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी सेवाएं तथा संचार के साथ सेंसिंग जैसी क्षमताएं शामिल हैं। इनका उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और आपदा प्रतिक्रिया जैसे क्षेत्रों में करने की परिकल्पना है। हालांकि, ये भविष्य के उपयोग और विकास की दिशाएं हैं। इन्हें अभी उपलब्ध सेवाओं या निश्चित व्यावसायिक सुविधाओं के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
ग्रामीण, दूरस्थ और कम आबादी वाले क्षेत्रों तक बेहतर कनेक्टिविटी पहुंचाना भी वैश्विक 6जी रूपरेखा का हिस्सा है। इसके अलावा स्मार्ट शहरों, परिवहन प्रणालियों और पर्यावरण निगरानी में जुड़े उपकरणों का विस्तार प्रस्तावित उपयोगों में शामिल है। नेटवर्क की उपयोगिता बढ़ाने के साथ उसकी सुरक्षा, ऊर्जा दक्षता और वहनीयता पर भी जोर दिया जा रहा है। इस दृष्टि से अगली पीढ़ी के नेटवर्क का आकलन केवल अधिकतम स्पीड के आंकड़े से नहीं, बल्कि उसकी पहुंच और सेवाओं की विश्वसनीयता से भी होगा।
जियो की 6जी तैयारी के साथ उसका 5जी विस्तार भी जारी रणनीति का हिस्सा है। रिलायंस की जून 2026 की वार्षिक आम बैठक में कंपनी ने 2030 तक सभी ग्राहकों को 5जी पर स्थानांतरित करने का लक्ष्य बताया था। इसी बयान में 6जी मानकों में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका आगे बढ़ाने की बात कही गई। कंपनी ने उपभोक्ताओं और उद्यमों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी तथा भारतीय तकनीक को अंतरराष्ट्रीय साझेदारों तक पहुंचाने की योजना भी रखी थी।
फिलहाल ग्राहकों के लिए मुख्य जानकारी यही है कि जियो ने 6जी से संबंधित शुरुआती तकनीक दिखाई है और भारत को शुरुआती बाजारों में शामिल करने की तैयारी सामने आई है। पांच गुना नेटवर्क क्षमता एक विकास लक्ष्य है। वास्तविक स्पीड, कवरेज, उपकरणों की अनुकूलता और सेवा की कीमत व्यावसायिक पेशकश के समय स्पष्ट होंगी। अभी 6जी रिचार्ज या तत्काल सेवा उपलब्ध होने की पुष्टि नहीं है।
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