
नई दिल्ली। देश में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की योजना को लेकर सरकार ने संसद में बड़ा अपडेट दिया है। केंद्र सरकार ने कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू ईंधन विकल्पों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम (EBP) पर बड़े पैमाने पर खर्च किया है। सरकार के अनुसार, इथेनॉल खरीद और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में लिखित जवाब देते हुए बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMC) ने इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2024-25 के दौरान इथेनॉल खरीद पर कुल ₹73,996 करोड़ खर्च किए हैं। इससे पहले इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2023-24 में कंपनियों ने ₹48,757 करोड़ और 2025-26 में जून तक करीब ₹49,577 करोड़ खर्च किए हैं।
सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश की पेट्रोलियम आयात निर्भरता को कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना और किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत उपलब्ध कराना है। इथेनॉल का उत्पादन घरेलू कृषि उत्पादों से किया जाता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है।
इथेनॉल मिश्रण को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे सामने आते रहे हैं। कुछ लोगों ने इथेनॉल युक्त पेट्रोल से वाहनों के माइलेज में कमी आने की बात कही थी। हालांकि, सरकार ने इस कार्यक्रम को पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया है। केंद्र का कहना है कि इथेनॉल मिश्रण से पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता घटेगी और प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।
राज्यसभा में मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि तेल कंपनियां घरेलू स्रोतों से ईंधन-ग्रेड इथेनॉल की खरीद करती हैं। इसके लिए गन्ने और अनाज आधारित कच्चे माल का इस्तेमाल किया जाता है। गन्ने से मिलने वाले सी-हेवी और बी-हेवी गुड़, गन्ने का रस और चीनी की चाशनी जैसे उत्पादों से इथेनॉल तैयार किया जाता है।
इसके अलावा अनाज आधारित स्रोतों में खराब या क्षतिग्रस्त अनाज, भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास उपलब्ध अतिरिक्त चावल और मक्का का उपयोग भी इथेनॉल उत्पादन के लिए किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि इससे किसानों को बाजार उपलब्ध होता है और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलती है।
मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि 16 जुलाई 2026 तक सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम के तहत विकृत निर्जल इथेनॉल की आपूर्ति के लिए 501 इथेनॉल निर्माण इकाइयों को पंजीकृत किया है। इससे देश में इथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है।
हालांकि, पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक करने को लेकर सरकार ने अभी कोई निर्णय नहीं लिया है। पेट्रोलियम राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के लक्ष्य के आगे बढ़ने की कोई आधिकारिक योजना घोषित नहीं की गई है।
भारत ने पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को तय समय से पहले हासिल किया था और अब देश में E20 पेट्रोल को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार भविष्य में तकनीकी क्षमता, वाहनों की अनुकूलता और उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति तय करेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, इथेनॉल मिश्रण से भारत को कच्चे तेल के आयात बिल को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसके लिए पर्याप्त उत्पादन क्षमता, बेहतर गुणवत्ता नियंत्रण और वाहनों के लिए उपयुक्त ईंधन मानकों को बनाए रखना जरूरी होगा। फिलहाल सरकार का फोकस 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल की व्यवस्था को मजबूत करने पर है।





