सूरज की रोशनी से भारत की तरक्की, सोलर एनर्जी में हासिल की बड़ी उपलब्धि

नई दिल्ली : भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में पिछले एक दशक में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देश में सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, भारत की स्थापित सोलर एनर्जी क्षमता वर्ष 2014 में जहां केवल 3 गीगावाट थी, वहीं 30 जून 2026 तक बढ़कर 162.15 गीगावाट के स्तर पर पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
सरकारी फैक्टशीट के मुताबिक, भारत ने वर्ष 2025 में अकेले करीब 37 गीगावाट नई सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ी। इस तेज विस्तार के साथ भारत ने सालाना सौर क्षमता वृद्धि के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर ग्रोथ मार्केट बन गया। यह उपलब्धि भारत के बढ़ते रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर और सरकार की नीतियों के प्रभाव को दर्शाती है।
सौर ऊर्जा क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में सबसे बड़ा बदलाव बिजली उत्पादन की लागत में आई भारी कमी है। सरकार के अनुसार, ई-रिवर्स ऑक्शन प्रणाली ने सोलर पावर की कीमतों को कम करने में अहम भूमिका निभाई है। इस प्रणाली में कंपनियां कम से कम कीमत पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं। अधिक कंपनियों के बाजार में आने और तकनीक में सुधार के कारण सौर बिजली की दरों में लगातार गिरावट आई।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2010 में सौर ऊर्जा की कीमत करीब 18 रुपये प्रति यूनिट थी, जो धीरे-धीरे घटते हुए 2.44 रुपये प्रति यूनिट के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गई। कम लागत ने सौर ऊर्जा को न केवल उद्योगों के लिए बल्कि आम उपभोक्ताओं और सरकारों के लिए भी अधिक आकर्षक विकल्प बना दिया है।
भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें बड़े स्तर पर सोलर पार्क विकसित करना, रूफटॉप सोलर सिस्टम को प्रोत्साहित करना और घरेलू स्तर पर सौर ऊर्जा अपनाने के लिए सहायता योजनाएं शामिल हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूत करना है।
देश में सौर ऊर्जा की बढ़ती क्षमता का असर रोजगार और निवेश के क्षेत्र में भी दिखाई दे रहा है। सोलर पैनल निर्माण, स्थापना, रखरखाव और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। इसके अलावा, भारत में घरेलू सोलर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्वच्छ ऊर्जा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई है। जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए देश लगातार नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। सौर ऊर्जा इस लक्ष्य को हासिल करने का एक प्रमुख माध्यम बनकर उभरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत में सौर ऊर्जा का विस्तार और तेज हो सकता है। बिजली की बढ़ती मांग, तकनीक में सुधार और ऊर्जा भंडारण की नई सुविधाओं के विकास से सोलर सेक्टर को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
भारत ने जिस तेजी से सौर ऊर्जा क्षमता में विस्तार किया है, वह देश के ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव की कहानी को दिखाता है। वर्ष 2014 से 2026 के बीच सौर क्षमता में करीब 50 गुना से ज्यादा की वृद्धि यह संकेत देती है कि भारत भविष्य में स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर तेजी से बढ़ रहा है।





