
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में अगस्त से एक बड़ा बदलाव लागू किया गया है, जिसका सीधा असर फ्यूचर एंड ऑप्शन (F&O) सेगमेंट में शामिल स्टॉक्स पर पड़ेगा। मार्केट रेगुलेटर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी CAS (Closing Auction Session) सिस्टम की शुरुआत की है। इस नए सिस्टम का उद्देश्य शेयरों के आखिरी भाव यानी क्लोजिंग प्राइस को ज्यादा पारदर्शी बनाना और कीमतों में हेरफेर की संभावना को कम करना है।
अब तक F&O स्टॉक्स का क्लोजिंग प्राइस वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) के आधार पर तय होता था। कई बार बाजार बंद होने से कुछ मिनट पहले बड़े ऑर्डर आने से शेयरों की अंतिम कीमत प्रभावित होने की आशंका रहती थी। इसी समस्या को दूर करने के लिए SEBI ने नया ऑक्शन सिस्टम लागू किया है।
नए नियमों के तहत F&O स्टॉक्स में सामान्य ट्रेडिंग दोपहर 3:15 बजे तक चलेगी। इसके बाद क्लोजिंग ऑक्शन सेशन शुरू होगा। यह पूरा सिस्टम करीब 15 मिनट का होगा। इसमें पहले ऑर्डर एंट्री का चरण होगा, जहां निवेशक अपने ऑर्डर डाल सकेंगे। इसके बाद दूसरे चरण में ऑर्डर मैचिंग प्रक्रिया होगी। इस दौरान बाजार ऑर्डर में बदलाव या रद्द करने की सुविधा सीमित रहेगी।
CAS के दौरान अलग-अलग खरीद और बिक्री ऑर्डर को एक साथ मिलाकर एक संतुलित कीमत निकाली जाएगी। यही कीमत उस स्टॉक की आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस मानी जाएगी। इससे बाजार में किसी एक बड़े ऑर्डर या आखिरी समय में किए गए ट्रेड से कीमतों को प्रभावित करना मुश्किल हो जाएगा।
SEBI के इस कदम का असर मुख्य रूप से उन कंपनियों के शेयरों पर होगा जो F&O ट्रेडिंग के दायरे में आती हैं। वहीं, गैर-F&O कैटेगरी वाले सामान्य इक्विटी शेयरों के लिए ट्रेडिंग समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इन शेयरों में बाजार पहले की तरह शाम 3:30 बजे बंद होगा।
इसके अलावा इक्विटी डेरिवेटिव्स यानी F&O सेगमेंट के ट्रेडिंग समय में भी बदलाव किया गया है। अब इस सेगमेंट में कारोबार शाम 3:40 बजे तक जारी रहेगा। इससे ट्रेडर्स को कारोबार के लिए अतिरिक्त 10 मिनट का समय मिलेगा।
SEBI ने प्री-ओपन सेशन के नियमों में भी बदलाव किया है। नए सिस्टम के तहत सुबह 9 बजे से 9:07 बजे तक निवेशक अपने ऑर्डर डाल सकेंगे। इसके बाद 9:07 बजे से 9:15 बजे तक ऑर्डर मैचिंग की प्रक्रिया होगी। नियमित बाजार कारोबार सुबह 9:15 बजे शुरू होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि CAS सिस्टम से बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और क्लोजिंग प्राइस ज्यादा सटीक तरीके से तय होंगे। इससे म्यूचुअल फंड, इंडेक्स फंड और बड़े संस्थागत निवेशकों को फायदा मिलेगा क्योंकि उनके पोर्टफोलियो का मूल्यांकन ज्यादा सही तरीके से हो सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, रिटेल निवेशकों पर इस बदलाव का सीधा असर बहुत ज्यादा नहीं पड़ेगा, क्योंकि उनके लिए सामान्य ट्रेडिंग प्रक्रिया लगभग पहले जैसी ही रहेगी। हालांकि, जिन निवेशकों के पास F&O स्टॉक्स हैं, उन्हें नए क्लोजिंग टाइम और ऑक्शन प्रक्रिया को समझना जरूरी होगा।
SEBI इस बदलाव के जरिए बाजार में होने वाली संभावित गड़बड़ियों पर लगाम लगाना चाहता है। कई बार आखिरी कुछ मिनटों में बड़े संस्थागत निवेशकों के भारी ऑर्डर से शेयरों की कीमतों में अचानक बदलाव देखने को मिलता था। इससे इंडेक्स और पैसिव फंड्स के प्रदर्शन पर भी असर पड़ सकता था।
नए CAS सिस्टम में सभी ऑर्डर एक साथ प्रक्रिया में शामिल होंगे और एक संतुलित कीमत तय होगी। इससे किसी एक निवेशक या संस्था के लिए क्लोजिंग प्राइस को अपने हिसाब से प्रभावित करना कठिन हो जाएगा।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भारतीय शेयर बाजार को अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब ले जाने वाला है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और शेयर बाजार में कीमतों की खोज यानी प्राइस डिस्कवरी प्रक्रिया ज्यादा मजबूत होगी। आने वाले समय में SEBI इस सिस्टम के प्रभाव की समीक्षा कर सकता है और जरूरत पड़ने पर इसे अन्य शेयरों तक भी बढ़ाया जा सकता है।





