
Business व्यापार : गुरुवार 11 जून को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। घरेलू शेयर बाजार पर ग्लोबल संकेतों का असर साफ तौर पर देखने को मिला, जिसके चलते निवेशकों में सतर्कता का माहौल रहा और बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया।
30 शेयरों वाला सेंसेक्स 0.20 प्रतिशत या 150.63 अंक की गिरावट के साथ 73,832.55 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं 50 शेयरों वाला निफ्टी 0.23 प्रतिशत या 53.35 अंक टूटकर 23,161.60 के स्तर पर बंद हुआ। पूरे कारोबारी सत्र के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन अंत में प्रमुख इंडेक्स लाल निशान पर ही बंद हुए।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ता तनाव और आर्थिक आंकड़ों में बदलाव रहा। वेस्ट एशिया यानी मिडिल ईस्ट क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इससे निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति (risk-off sentiment) देखने को मिली, जिसका सीधा असर इक्विटी बाजारों पर पड़ा।
इसके अलावा अमेरिका में जारी हुए महंगाई के आंकड़ों में तेज उछाल ने भी बाजार की दिशा को प्रभावित किया। महंगाई बढ़ने से यह आशंका बढ़ जाती है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकता है। इसका असर वैश्विक निवेश प्रवाह पर पड़ता है और उभरते बाजारों जैसे भारत में विदेशी निवेशक सतर्क हो जाते हैं।
इन्हीं कारणों से वैश्विक इक्विटी बाजारों में भी दबाव देखने को मिला, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा। कारोबार के दौरान कई सेक्टरों में बिकवाली हावी रही, खासकर बैंकिंग, आईटी और मेटल शेयरों में कमजोरी देखी गई। हालांकि कुछ चुनिंदा शेयरों में हल्की खरीदारी भी देखने को मिली, लेकिन वह पूरे बाजार को संभाल नहीं सकी।
विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा समय में बाजार पूरी तरह ग्लोबल संकेतों पर निर्भर है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति स्थिर नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को इस समय सावधानी बरतने और लंबी अवधि की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
घरेलू स्तर पर आर्थिक आंकड़े और कंपनियों के तिमाही नतीजे आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करेंगे। वहीं वैश्विक मोर्चे पर मिडिल ईस्ट की स्थिति और अमेरिकी फेड की नीतियां भी निवेशकों की नजर में रहेंगी।
कुल मिलाकर, गुरुवार का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए दबाव भरा रहा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान पर बंद हुए, जिससे निवेशकों की संपत्ति पर हल्का असर देखने को मिला। आने वाले सत्रों में बाजार की चाल काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम और आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी।





