
Business बिजनेस : भारत के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक नई चिंता सामने आई है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई चेन, शिपिंग रूट्स और कमोडिटी बाजारों में बढ़ी अनिश्चितता का असर अब भारत के हाउसिंग सेक्टर पर भी दिखाई देने लगा है। इस स्थिति को लेकर रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म एनारॉक ने एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है।
रिपोर्ट के अनुसार, यदि मौजूदा वैश्विक तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो 2026 में देश के सात प्रमुख शहरों में प्रस्तावित करीब 5.4 लाख घरों की समय पर डिलीवरी प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की लागत, निर्माण गति और डिलीवरी शेड्यूल पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने से कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। स्टील, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री की आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है, जिससे रियल एस्टेट डेवलपर्स की लागत भी प्रभावित हो रही है। इसके अलावा शिपिंग रूट्स में बाधा और लॉजिस्टिक्स खर्च में वृद्धि ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया है।
एनारॉक की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत के प्रमुख महानगरों में चल रहे बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पहले से ही समय सीमा के दबाव में हैं। ऐसे में यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर नहीं होती हैं, तो प्रोजेक्ट्स की डिलीवरी में और देरी हो सकती है। इससे खरीदारों पर भी असर पड़ेगा, जो अपने घर की समय पर डिलीवरी का इंतजार कर रहे हैं।
रियल एस्टेट सेक्टर के जानकारों का मानना है कि इस तरह की वैश्विक अनिश्चितताओं का असर केवल निर्माण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे निवेश, मांग और प्रॉपर्टी बाजार की गति भी प्रभावित होती है। यदि निर्माण लागत बढ़ती है, तो इसका असर घरों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत हुआ है और बड़े डेवलपर्स के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन हैं। इसके बावजूद, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर प्रोजेक्ट टाइमलाइन पर देखा जा सकता है।
कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब भारत के रियल एस्टेट सेक्टर तक पहुंचने लगा है। एनारॉक की रिपोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो देश के प्रमुख शहरों में लाखों घरों की डिलीवरी प्रभावित हो सकती है, जिससे हाउसिंग मार्केट में नई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।





