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नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को एक बार फिर गिरावट देखने को मिली। लगातार दबाव के बीच घरेलू बाजार में निवेशकों का भरोसा कमजोर नजर आया और सेंसेक्स 492 अंक से ज्यादा टूट गया। वहीं निफ्टी में भी गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अंतरराष्ट्रीय तनावों के चलते बाजार पर दबाव बना रहा।मंगलवार के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 492.70 अंक यानी करीब 0.63 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,235.46 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 132.75 अंक गिरकर 24,154.90 के स्तर पर पहुंच गया। यह बाजार में लगातार कमजोरी का संकेत है।शेयर बाजार में गिरावट का असर लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों पर देखने को मिला। आईटी, बैंकिंग और कई बड़े शेयरों में बिकवाली का दबाव रहा। निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाते हुए कई कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली की, जिससे बाजार की तेजी गायब हो गई।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई चिंता
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में से एक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। कच्चा तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने और कंपनियों की लागत पर असर पड़ने की आशंका रहती है।भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर अर्थव्यवस्था और बाजार पर पड़ता है। महंगे तेल से रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और कंपनियों के मार्जिन पर भी असर पड़ सकता है।
विदेशी बाजारों का भी दिखा असर
भारतीय बाजारों पर वैश्विक घटनाक्रमों का भी प्रभाव पड़ा। पश्चिम एशिया में तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों में सतर्कता बढ़ी है। विदेशी निवेशक जोखिम वाले बाजारों से दूरी बना सकते हैं, जिससे शेयर बाजार में दबाव बढ़ता है।अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी का असर एशियाई बाजारों पर पड़ा। वैश्विक निवेशक महंगाई, ब्याज दरों और आर्थिक संकेतकों को लेकर सतर्क बने हुए हैं।
सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में गिरावट
आज के कारोबार में कई बड़े शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। खासतौर पर एशियन पेंट्स और इंफोसिस जैसे शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। इन बड़े शेयरों में गिरावट ने सेंसेक्स पर दबाव बढ़ाया।बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट का असर पूरे इंडेक्स पर पड़ता है। इसलिए निवेशकों की नजर अब कंपनियों के तिमाही प्रदर्शन और वैश्विक संकेतों पर बनी हुई है।
निवेशकों की चिंता बढ़ी
शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण छोटे निवेशकों में भी चिंता बढ़ रही है। कई निवेशक बाजार की दिशा को लेकर सतर्क हो गए हैं और नई खरीदारी से पहले स्थिति साफ होने का इंतजार कर रहे हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में गिरावट के समय घबराने की बजाय लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान देना चाहिए। मजबूत कंपनियों के शेयरों में लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करने वाले निवेशकों को उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है।
विदेशी निवेशकों की भूमिका अहम
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब विदेशी निवेशक बिकवाली करते हैं तो बाजार पर दबाव बढ़ जाता है। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी गिरावट को सीमित करने में मदद करती है।आने वाले दिनों में विदेशी निवेश, कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक घटनाक्रम और कंपनियों के नतीजे बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल निवेशकों को सावधानी के साथ कारोबार करने की जरूरत है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालांकि, लंबी अवधि के लिए मजबूत कंपनियों में निवेश के अवसर भी बन सकते हैं।शेयर बाजार में गिरावट और तेजी दोनों ही सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। निवेशकों को किसी भी फैसले से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति और बाजार के जोखिमों को समझना जरूरी है।फिलहाल सेंसेक्स में 492 अंकों से अधिक की गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अब बाजार की नजर आने वाले आर्थिक संकेतों और वैश्विक घटनाक्रमों पर रहेगी।
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