Global टेंशन ने बिगाड़ा खेल, सेंसेक्स धड़ाम निफ्टी भी फिसला

Mumbai मुंबई : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ अंतरिम समझौता खत्म होने की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ गई, जिसका दबाव घरेलू बाजारों पर भी देखने को मिला। सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ लाल निशान पर बंद हुआ।बुधवार को बीएसई का प्रमुख सूचकांक BSE Sensex 1,677.12 अंक यानी 2.15 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ 76,503.60 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय सेंसेक्स 1,921.69 अंक तक फिसलकर 76,259.03 अंक के स्तर पर पहुंच गया था।वहीं, एनएसई का प्रमुख सूचकांक NIFTY 50 भी दबाव में रहा। निफ्टी 516.65 अंक यानी 2.12 प्रतिशत टूटकर 23,882.05 अंक पर बंद हुआ। दिनभर बाजार में बिकवाली का दबाव बना रहा और निवेशकों ने सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख किया।
ट्रंप के बयान से बढ़ी बाजार की चिंता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ अंतरिम समझौते के खत्म होने की बात कही। उन्होंने कहा कि बातचीत जारी रखी जाएगी, लेकिन ईरान के साथ मौजूदा स्थिति को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई। ट्रंप के इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई और इसका असर तेल कीमतों तथा शेयर बाजारों पर पड़ा।
निवेशकों को भारी नुकसान
दोपहर तक गिरावट और तेज हो गई थी। करीब 2 बजे सेंसेक्स 1,512 अंक गिरकर 76,668 के स्तर पर आ गया था, जबकि निफ्टी 462 अंक टूटकर 23,936 के आसपास कारोबार कर रहा था। इस भारी गिरावट के चलते निवेशकों की बाजार पूंजी में करीब 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आने का अनुमान लगाया गया।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
बाजार में गिरावट का प्रमुख कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना की कार्रवाई और उसके जवाब में ईरान की ओर से सैन्य गतिविधियों के कारण वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ी। इसके अलावा अमेरिका द्वारा ईरानी तेल बिक्री से जुड़ी छूट समाप्त करने के फैसले ने भी बाजार पर दबाव बनाया।भू-राजनीतिक तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी आई और यह 75 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए चिंता का विषय मानी जाती है, क्योंकि इससे महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है।
वैश्विक बाजार भी दबाव में
अमेरिका-ईरान तनाव का असर केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं रहा। एशियाई और यूरोपीय बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का KOSPI सूचकांक 5 प्रतिशत से अधिक गिर गया। वहीं अमेरिकी बाजारों में भी एसएंडपी 500 और नैस्डैक फ्यूचर्स पर दबाव बना रहा।हालांकि, कुछ बाजारों में मजबूती भी देखने को मिली। चीन के बाजारों में अपेक्षाकृत स्थिरता रही और Alibaba Group के शेयरों में तेजी दर्ज की गई।विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।





