
Mumbai मुंबई : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। कई दिनों से जारी बाजार की तेजी पर ब्रेक लग गया और निवेशकों को बड़ी बिकवाली का सामना करना पड़ा।बुधवार को कारोबार खत्म होने के समय बीएसई सेंसेक्स 1,677.12 अंकों यानी 2.15 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ 76,503.60 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी-50 भी 516.65 अंक यानी 2.12 प्रतिशत गिरकर 23,882.05 के स्तर पर पहुंच गया। दोनों प्रमुख सूचकांकों में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार में गिरावट की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव रहा। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव के कारण निवेशकों में चिंता बढ़ गई। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी बाजार की धारणा को कमजोर किया। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से वैश्विक महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका के चलते निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत जैसे कच्चे तेल आयात करने वाले देशों पर महंगे तेल का सीधा असर पड़ सकता है। इससे कंपनियों के खर्च बढ़ सकते हैं और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है। यही कारण रहा कि निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों में बिकवाली शुरू कर दी।
बाजार में गिरावट का असर लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों पर देखने को मिला। बैंकिंग, ऑटो, आईटी, मेटल और ऊर्जा क्षेत्र के कई शेयर दबाव में रहे। भारी बिकवाली के कारण सेंसेक्स के ज्यादातर प्रमुख शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।इससे पहले पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में भारतीय बाजार में मजबूती देखने को मिली थी और निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा था। लेकिन बुधवार की तेज गिरावट ने बाजार की तेजी पर अचानक विराम लगा दिया।
वैश्विक बाजारों में भी अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आने वाले आर्थिक आंकड़ों को लेकर निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं।बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यदि अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होता है और तेल की कीमतों में स्थिरता आती है तो बाजार में फिर से सुधार देखने को मिल सकता है। वहीं, तनाव बढ़ने पर बाजार में और उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रह सकती है।





