व्यापार
दिवाली पर मिलावटी मिठाइयों का खेल, FSSAI ने की बड़ी कार्रवाई
Rajeshwari Nishad
8 Nov 2026 5:14 PM IST

x
बिज़नेस : दिवाली के त्योहार पर जहां देशभर में मिठाइयों की खरीदारी और बिक्री में तेजी देखने को मिली, वहीं मिलावटी खाद्य पदार्थों के मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी। त्योहार के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट की कई घटनाएं सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कार्रवाई चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देशभर में 1,185 प्रतिष्ठानों के फूड लाइसेंस रद्द किए हैं। इसके साथ ही करीब 82 करोड़ रुपये मूल्य के खाद्य पदार्थ जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। त्योहार के दौरान खाद्य सुरक्षा को लेकर हुई इस कार्रवाई ने मिलावट के कारोबार और उपभोक्ताओं की सेहत से जुड़े सवालों को एक बार फिर प्रमुखता से सामने ला दिया है।
दिवाली के अवसर पर मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। लोग अपने परिवार, रिश्तेदारों और परिचितों को मिठाई उपहार में देते हैं। ऐसे समय में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है। लेकिन मिलावट की घटनाएं सामने आने से उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण मिठाई की पहचान करना चुनौती बन सकता है।
1185 प्रतिष्ठानों के फूड लाइसेंस रद्द
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन से जुड़ी कार्रवाई के तहत देशभर में 1,185 प्रतिष्ठानों के फूड लाइसेंस रद्द किए गए हैं।खाद्य व्यवसाय संचालित करने वाले प्रतिष्ठानों के लिए निर्धारित सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों का पालन करना आवश्यक होता है। इन मानकों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है।लाइसेंस रद्द किए जाने की कार्रवाई गंभीर प्रशासनिक कदम माना जाता है। हालांकि, इन 1,185 प्रतिष्ठानों में कितनी मिठाई की दुकानें, खाद्य निर्माण इकाइयां या अन्य खाद्य व्यवसाय शामिल हैं, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।इसके अलावा लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई किन राज्यों में कितने प्रतिष्ठानों के खिलाफ हुई, इसकी भी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
82 करोड़ रुपये के खाद्य पदार्थ जब्त
खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कार्रवाई में करीब 82 करोड़ रुपये मूल्य के खाद्य पदार्थ जब्त किए जाने की जानकारी दी गई है।यह राशि कार्रवाई के बड़े स्तर को दर्शाती है। हालांकि, जब्त किए गए खाद्य पदार्थों में मिठाइयों, दूध, मावा, घी और अन्य सामग्री का कितना हिस्सा था, इसका अलग-अलग विवरण उपलब्ध नहीं है।यह भी स्पष्ट नहीं है कि जब्त की गई पूरी सामग्री प्रयोगशाला जांच में मिलावटी पाई गई थी या कार्रवाई विभिन्न खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों के आधार पर की गई थी।किसी खाद्य पदार्थ की जब्ती और उसके मिलावटी होने की पुष्टि अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता के बारे में अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
दिवाली पर बढ़ जाती है मिठाइयों की मांग
दिवाली देश के सबसे बड़े त्योहारों में शामिल है। इस अवसर पर मिठाइयों की खरीदारी का विशेष महत्व होता है। लोग घरों में पूजा के लिए मिठाई लाते हैं और अपने रिश्तेदारों तथा मित्रों के बीच भी मिठाइयां बांटते हैं।त्योहार के दिनों में मिठाई की दुकानों पर ग्राहकों की संख्या बढ़ जाती है। इसके साथ ही दूध, मावा, घी, चीनी और अन्य खाद्य सामग्री की मांग भी बढ़ सकती है।मांग में तेजी के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखना कारोबारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी से उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। इसलिए त्योहार के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
मिलावटी मिठाइयां सेहत के लिए खतरनाक
मिठाइयों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता सीधे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है। यदि दूध, मावा, घी या अन्य सामग्री में हानिकारक पदार्थों की मिलावट की जाती है, तो इससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं।खराब गुणवत्ता या दूषित खाद्य पदार्थों के सेवन से पेट दर्द, उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं।कुछ मामलों में असुरक्षित रंगों या अन्य प्रतिबंधित पदार्थों का इस्तेमाल भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है।हालांकि, हर चमकीली या अधिक रंगीन मिठाई को केवल देखकर मिलावटी नहीं कहा जा सकता। इसी तरह मिठाई के स्वाद या गंध से भी उसकी गुणवत्ता की पूरी पुष्टि नहीं होती।खाद्य पदार्थ की वास्तविक गुणवत्ता का निर्धारण वैज्ञानिक जांच और निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाता है।
मिठाई खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान
त्योहार के अवसर पर मिठाई खरीदते समय उपभोक्ताओं को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए।सबसे पहले विश्वसनीय और स्वच्छता का ध्यान रखने वाले प्रतिष्ठानों से मिठाई खरीदना बेहतर है। दुकान में खाद्य पदार्थों को किस तरह रखा गया है, इस पर भी ध्यान देना चाहिए।पैक्ड मिठाइयों के मामले में निर्माण और उपयोग की अंतिम तिथि, सामग्री का विवरण तथा आवश्यक लेबल की जांच करनी चाहिए।जहां लागू हो, वहां खाद्य व्यवसाय का FSSAI लाइसेंस या पंजीकरण नंबर भी देखा जा सकता है।यदि मिठाई से असामान्य गंध आ रही हो, उस पर फफूंद दिखाई दे या वह खराब लग रही हो, तो उसका सेवन नहीं करना चाहिए।संदिग्ध खाद्य पदार्थों के संबंध में संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग को शिकायत की जा सकती है।
खाद्य कारोबारियों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण
खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है। मिठाई बनाने और बेचने वाले प्रतिष्ठानों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।खाद्य कारोबारियों को गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल का इस्तेमाल करना चाहिए। मिठाई तैयार करने से लेकर भंडारण और बिक्री तक स्वच्छता का ध्यान रखना आवश्यक है।खाद्य पदार्थों को उचित तापमान पर रखना और खराब सामग्री को बिक्री से हटाना भी जरूरी है।त्योहार के दौरान बढ़ती मांग के बावजूद सुरक्षा मानकों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
मिलावट रोकने के लिए सतत निगरानी जरूरी
दिवाली के दौरान सामने आई मिलावट संबंधी घटनाओं ने खाद्य सुरक्षा की निगरानी के महत्व को रेखांकित किया है।खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण, नमूनों की जांच और नियमों के उल्लंघन पर उचित कार्रवाई आवश्यक है।इसके साथ ही उपभोक्ताओं को खाद्य सुरक्षा के बारे में जागरूक करना भी महत्वपूर्ण है।केवल त्योहारों के दौरान ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर निगरानी बनाए रखना जरूरी है।
उपभोक्ताओं की सेहत से समझौता नहीं
दिवाली के अवसर पर देशभर में खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कार्रवाई के तहत 1,185 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस रद्द किए जाने और 82 करोड़ रुपये के खाद्य पदार्थ जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।इन आंकड़ों ने त्योहार के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट रोकने के प्रयासों को चर्चा में ला दिया है।
उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे मिठाई और अन्य खाद्य सामग्री खरीदते समय सावधानी बरतें। वहीं खाद्य कारोबारियों के लिए निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य है।कुल मिलाकर, दिवाली की मिठास के बीच मिलावट की शिकायतें गंभीर चिंता का विषय हैं। सुरक्षित खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक निगरानी, कारोबारियों की जिम्मेदारी और उपभोक्ताओं की जागरूकता तीनों आवश्यक हैं।
Next Story





